वर्षों से जल रही है अखंड ज्योति , बना हुआ है श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र, होती है मनोकामना पूर्ण..! पढें समाचार देखें वीडियो एक ऐसे ही अनोखे मंदिर की..!

रायगढ़/15 वर्षों से जल रही है अखंड ज्योत, पूर्ण होती है भक्तों की मनोकामना 100 साल से भी काफी पुराना है मंदिर भक्तों के आस्था का केंद्र और दुखीहारों की होती है सुनवाईरायगढ़ जिला मुख्यालय से महज 60 किलोमीटर और तमनार ब्लॉक मुख्यालय से तकरीबन 20 किलोमीटर की दूरी मिलूपारा मार्ग पर मोर्गा पाठ पहाड़ के नीचे केलो नदी से लगे मिलुपारा रायगढ़ मुख्यमार्ग के खम्हरिया व मिलूंपारा गांव के सीमा पर मां बंजारी का धाम स्थित है।

स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर तकरीबन 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है, पुराने समय में मंदिर की स्थापना दाम जी बाबू नामक सेठ ने की थी, जिसके पश्चात मंदिर का संरक्षण स्वर्गीय रामनिवास अग्रवाल के द्वारा किया गया पूर्व में पत्थर की मूर्ति स्थापित थी जिसका पूजन अर्चन राहगिर सहित आसपास के ग्रामीण किया करते थे, जिसके पश्चात लोगों के मन में श्रद्धा जागती गई और मंदिर का निर्माण भव्यता से कराया गया विगत 40 वर्षों से मंदिर में पूजा देव नारायण दास कर रहे हैं।

देव नारायण दास ने बताया कि 15 वर्षों से मंदिर में एक जोत अखंड जल्दी आ रही है, मंदिर में कई वर्षों से प्रत्येक मंगलवार को श्रद्धालुओं के लिए खीर प्रसाद का वितरण किया जाता है साथ ही साथ प्रत्येक पूर्णिमा विश्व शांति हेतु चंडी पाठ ,हवन पूजन की जाती है, मंदिर प्रांगण में निर्धन कन्या का विवाह सो जाती है लड़की के साथ मंदिर संस्था द्वारा निशुल्क सहयोग के साथ कराई जाती है, साथ ही वैष्णव लड़कों का यज्ञ पवित्र किया जाता है, ।

इस मंदिर में दो नहीं बल्कि 4 नवरात्र पूजन का आयोजन होता है एक चैत व शारदीय नवरात्र मुख्य रुप से होता है रायगढ़ जिले की बल्कि पड़ोसी राज्य के भी निसंतान दंपत्ति माता के दरबार में अपनी संतान प्राप्ति की मनोकामना की आस्था लेकर माथा टेकने आते हैं, जहां बंजारी माता के आशीर्वाद से लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है, नवरात्र में मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं माथा टेकने आते हैं, पूर्व में मंदिर बहुत ही छोटी थी जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की आस्था मंदिर के प्रति बढ़ती गई विश्वास होता गया वैसे ही मंदिर अब बड़े रूप में हो गई है साथ ही आसपास के परिसर को भी स्वच्छ और सुंदर बनाया जा रहा है।

शारदीय नवरात्र में 325 मनोकामना ज्योति मंदिर के जोत भवन में श्रद्धालुओं द्वारा जलवाई गई है।

वर्तमान के समय में कोरोना का होने के कारण सरकार द्वारा आदेश नियम कानून का पालन करते हुए सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को दर्शन करने दिया जा रहा है मंदिर प्रबंधन द्वारा दर्शन पूर्व श्रद्धालुओं के लिए सैनिटाइजर की भी व्यवस्था कराई गई है। वर्तमान में मंदिर का संरक्षण नरेश अग्रवाल व राहुल अग्रवाल के द्वारा की जा रही है।आज नवरात्रि का प्रथम दिन है और आज मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है मंदिर के पुजारी देव नारायण दास जी आज के पुजन की विधि विधान को बताया ।

माता शैलपुत्री की पूजा विधि:

नवरात्रि प्रतिपदा के दिन कलश या घट स्थापना करें। इसके बाद दुर्गा पूजा का संकल्प लें। फिर माता दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा करें। मां को अक्षत्, सिंदूर, धूप, गंध, पुष्प आदि अर्पित करें। मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप करें। इसके बाद कपूर या गाय के घी से दीपक जलाएं। मां की आरती करें। शंखनाद के साथ घंटी बजाएं। मां को प्रसाद अर्पित करें। पूजा समाप्त होने के बाद घर में सभी को प्रसाद दें।

माता शैलपुत्री के मंत्र:

  1. शिवरूपा वृष वहिनी हिमकन्या शुभंगिनी,

पद्म त्रिशूल हस्त धारिणी,

रत्नयुक्त कल्याण कारीनी..

  1. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:

बीज मंत्र: ह्रीं शिवायै नम:.

  1. वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ .

वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

  1. प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्.

धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥

त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्.

सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥

चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन.

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