स्वयं प्रकट हैं माँ मड़वारानी करती हैं गांवों की रक्षा,पहाड़ की चोटी पर कलमी पेड़ के नीचे स्थित है मड़वारानी और भी जानें रोचक तथ्य पढें सामाचार..!

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कोरबा से बसंत सिंह की खास रिपोर्ट

कोरबा/ माँ मड़वारानी मंदिर, छत्तीसगढ ऱाज्य के कोरबा जिले के करतला ब्लॉक के अंतर्गत आता है, कोरबा-चाम्पा मार्ग में मध्य में स्थित है, इस कारण कोरबा तथा चाम्पा से लगभग ये 20-20 km की दूरी में पड़ता है, क्षेत्र का प्रसिद्ध मंदिर है एवं यहाँ के मूल निवासियों के द्वारा माँ मड़वारानी की आराधना की जाती है और उनके श्रद्धा एवं आस्था का प्रतीक हैं और यह माना जाता है की माँ मड़वारानी स्वयं प्रकट होकर आस-पास के गावों की रक्षा करती हैं । माँ मड़वारानी मंदिर, मड़वारानी पहाड़ की चोटी पर कलमी पेड़ के नीचे स्थित है।

स्थापना के सन्दर्भ में कोई स्पष्ट जानकारी तो नही है पर सालों से आसपास के लोगो का आस्था का केंद्र रहा है,

मंदिर के सन्दर्भ में कई रोचक कहानियां भी है, कहा जाता है कि, माँ मड़वारानी अपने शादी के मंडप (मड़वा) को छोड़ कर आ गयी थी ।इसी दौरान बरपाली-मड़वारानी रोड में उनके शरीर से हल्दी एक बड़े पत्थर पर गिरी और वह पत्थर पीला हो गया । माँ मड़वारानी के मंडप से आने के कारण गाँव और पर्वत को मड़वारानी के नाम से जाना जाने लगा । दूसरी प्रसिद्ध कहानी यह है कि माँ मड़वारानी भगवान शिव से कनकी मे मिली एवं मड़वारानी पर्वत पर आई । माँ मड़वारानी संस्कृत में “मांडवी देवी” के नाम से जानी जाती है । यह माना जाता है क़ि कुछ ग्राम वासियों द्वारा देखा गया कि कलमी वृक्ष एवं उसके पत्तियों में हर नवरात्रि को जवा उग जाता है और एक सर्प उसके आस पास विचरण करता है और आज भी कभी-कभी दिखाई पड़ता है ।

ऐसा माना जाता है कि एक दूसरे कलमी पेड़ में मीठे पानी का श्रोत था जो हमेशा बहता रहता था ।पर एक दिन एक ग्रामीण पानी लेते समय अपना बर्तन खो दिया और उसने पेड़ को काटकर देखा पर उसे अपना बर्तन नहीं मिला।

यंहा बलि देने के नाम से हमेशा विरोधाभास बना रहता है, फिर भी ये कम रूप में जारी ही है,

मंदिर के अलावा मड़वारानी अपनी प्राकृतिक छटा के लिए भी प्रसिध्द है, काफी दूर दूर से यंहा लोग आते है, माँ मड़वारानी मंदिर पहाड़ की चोटी पर स्थित है । माँ मड़वारानी मंदिर घने पर्वत में फूलों एवं फलदार वृक्षों से अच्छादित हैं और आयुर्वेदिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।पहाड़ में पशु पक्षियों जैसे भालू, बंदर आदि को विचरण करते देखा जा सकता है।
माँ मड़वारानी मंदिर, पहाड़ ऊपर मुख्यतः चार मार्गों से जाया जा सकता है –

मुख्य रूप से सबसे ज़्यादा उपयोग किया जाने वाला मार्ग माँ मड़वारानी नीचे स्थित मंदिर से जाता है ।
यह मार्ग 5 कि.मी. लंबा है तथा वाहन के द्वारा जाया जा सकता है ।

दूसरा मुख्य मार्ग ग्राम बरपाली से होकर जाता है और यह 1 कि.मी. का मार्ग पूर्णतः सीढ़ियों वाला है ।
यह मार्ग ग्राम झींका-महोरा से शुरू होता है और 1 कि.मी. लंबाई का है ।

यह मार्ग ग्राम खरहरी से शुरू होता है और 4 कि.मी. लंबाई का है ।

हर साल यंहा सैकड़ो की संख्या में ज्योति कलश जलती है, इस बार भी करीब 3400 कलश प्रज्वलित है, जिसमे, अमेरिका, बंगाल, ओडिसा, आदि देश विदेश के श्रद्धालु शामिल है ।