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बचेगा या उजड़ेगा जिंदल का उर्जानगर ? रहेगी या बचेगी जिंदल पावर की रिहाईसी कॉलोनी ऊर्जानगर ! महाजेनको बनाम जिंदल पावर ! पढ़ें रायगढ़ के सबसे बड़े कॉर्पोरेट वार की इनसाइड स्टोरी !!

रायगढ़। महाजेनको को आबंटित गारे पेलमा सेक्टर II कोल ब्लॉक के माइनिंग क्षेत्र के अंदर जिदल पावर लिमिटेड तमनार का विशाल उर्जानगर भी आ रहा है। लगभग १५० एकड़ में बनी इस पाश कालोनी में ५५५ फ्लैट व् बंगले हैं। इसके साथ ही सी.बी.एस.ई मान्यता प्राप्त शानदार सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी इसी कालोनी में संचालित है। जंहा जिंदल के अधिकारीयों व् कर्मचारियों के बच्चे पढ़ते हैं। इसके अलावा इस पाश कालोनी में बड़े बड़े पार्क व् मंदिर भी हैं।

२००६ में बने इस उर्जानगर को लेकर इसके अस्तित्व पर अब सवाल उठने लगे हैं। यद्यपि महाजेनको ने जन सुनवाई के लिये तैयार की गई ई.आई.ए. रिपोर्ट में इसका जिक्र तक नहीं किया है। लेकिन ई.आई.ए. रिपोर्ट में माइनिंग क्षेत्र के दिये गये नक़्शे को गूगल अर्थ में बड़ा कर देखा जाये तो उर्जानगर साफ साफ दिखता है।

क्या लगभग १५० एकड़ में बनी इस पाश कालोनी को महाजेनको अधिग्रहण करेगा ? यदि करता है तो उसके लिये यह काम आसान नहीं होगा। ये कोई निरीह आदिवासी की जमीन – मकान नहीं है जिसे भूअर्जन से आसानी से लिया जा सकेगा। जिंदल जैसी बड़ी व् ताकतवर कंपनी आसानी से इसे अपने हाथों से नहीं जाने देगी। चाहे इसके लिये उसे सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़े। कारण साफ है हजारों की संख्या में इस कालोनी में रहने वाले जिंदल की अधिकारी कर्मचारीयों के लिये दूसरी कालोनी के लिये तमनार में जगह मिलना ही मुश्किल है। साथ ही साथ स्कूल में पढने वाले बच्चों के भविष्य का भी है।

दूसरी तरफ यदि महाजेनको उर्जानगर को छोड़ कर माइनिंग करता है तो उसे इसके लिये कम से कम २०० एकड़ जमीन तो छोडनी ही पड़ेगी और इतने बड़े क्षेत्र से निकलने वाले लाखों टन कोयले से हाथ धोना पड़ेगा। जिसकी कीमत अरबों, खरबों में अनुमानित है।

इसके साथ ही एक दूसरा विरोध भी धीरे धीरे सुलग रहा है इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत तमनार क्षेत्र के 14 गांव आ रहे हैं। ग्रामीणों के बीच महाजनको के इस प्रोजेक्ट को लेकर आम सभाओं का दौर भी शुरू हो गया है।

ताजूब की बात है कि जन सुनवाई के लिये ई.आई.ए. रिपोर्ट पर्यावरण विभाग के पास साल भर पहले से आ चुकी थी लेकिन उसने जिला प्रशासन को इस महत्वपूर्ण तथ्य से अवगत नहीं करवाया और आनन् फानन में जन सुनवाई की तिथी निर्धारित करवा ली।

यदि रायगढ़ कलेक्टर के संज्ञान में यह बात आई होती तो शायद वे कंपनी से इस बारे में सवाल जरुर करते और हो सकता है माइनिंग प्लान दुबारा बनाने कहते !
बहरहाल उर्जानगर का भविष्य आने वाला समय ही तय करेगा | तब तक कयास तो लगाये ही जाते ही रहेंगें।

-रमेश अग्रवाल, जन चेतना रायगढ़

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