विकास जायसवाल

जब तक जिंदा हु तब तक लिखता रहूंगा..! जब तक है जान तब तक न कलम बदलेगा और न ही रुदबा अंदाज बदलने का तो सोच भी नही सकता । कड़वी सच...!अगर कोई आपको डांट फटकार करता है और उसका डांट फटकार में आपको अपना हित दिखे तो डांट अच्छी है ,,हंस दो डाँटने वाले के सामने और डांट को पिजाओ अमृत की तरह इससे डांटने वाला भी समझेगा की दिल से नही लिया और आप उनसे सिखकर उनसे आगे निकल जाओगे...!