बहु ने ससुर की अर्थी को कंधा देकर पेश की अनूठी मिसाल…निभाया बेटी का फर्ज..!!

बिलासपुर. जब किसी की मृत्यु होती है तो उसकी अर्थी को कंधा देकर बेटा व परिवार के लोग मुक्तिधाम तक अंत्येष्टि के लिए लेकर जाते हैं। समय के साथ बेटे के अलावा बेटी भी इस फर्ज को पूरा करती देखी गई हैं। लेकिन इस बार इस कार्य को बहू ने करते हुए अपने पिता के समान ससुर के मृत शरीर को कंधा दिया। ऐसा कर बहू ने न सिर्फ बहू बल्कि एक बेटी का फर्ज निभाया है।

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केन्द्रीय स्वर्णकार समाज के अध्यक्ष व विधि महाविद्यालय के प्रोफेसर रहे खेमनाथ स्वर्णकार का निधन हो गया, तब उनकी अंत्येष्टि के लिए उनके शव को कंधा देकर मुक्तिधाम सरकण्डा ले जाया गया। इस दौरान बेटे ने तो अपना फर्ज निभाया ही साथ ही बहू राधिका ने भी ससुर की अर्थी को कंधा दिया। ससुर की अर्थी को कंधा देकर समाज की रूढि़वादी परंपरा को खत्म करते हुए एक बेटी का फर्ज निभाया।

चांपा की बेटी है राधिका
जांजगीर-चांपा जिले के चांपा की राधिका स्वर्णकार का विवाह बिलासपुर के अशोक स्वर्णकार से हुआ। ससुर खेमराज बहु को बेटी की तरह ही माना करते थे। उनकी मृत्यु हो जाने पर राधिका ने अर्थी को कंधा दिया जिसकी सभी ने सराहना की। साथ ही इसे सिर्फ स्वर्णकार समाज ही नहीं बल्कि अन्य समाज के लोग भी एक अच्छा उदाहरण मान कर राधिका की तारीफ कर रहे हैं।