यूनिवर्सिटी एग्जाम 2020: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “फर्स्ट व सेकंड ईयर की परीक्षा कराने का निर्णय लेने के लिए विश्वविद्यालय स्वतंत्र !”

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि विश्वविद्यालय स्नातक (अंडर ग्रेजुएट) और स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट) कोर्सेज के फर्स्ट व सेकेंड ईयर स्टूडेंट्स को अगले ईयर में प्रमोट करने को लेकर परीक्षा कराने के लिए स्वतंत्र है। जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने कहा,

“विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने फर्स्ट और सेकेंड ईयर की परीक्षाएं कराने का फैसला विश्वविद्यालयों के विवेक पर छोड़ दिया है। अगर विश्वविद्यालय परीक्षाएं आयोजित करना चाहते हैं, तो हम उन्हें रोक नहीं सकते। यह न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं है।”

Advertisement

शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी तब कि जब वह फर्स्ट व सेकेंड ईयर की परीक्षा कराने के विरोध में दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आयुष येसुदास नाम के एक छात्र द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि 27 अप्रैल 2020 को जारी यूजीसी की गाइडलाइंस में यह कहा गया था कि अंडर ग्रेजुएट/पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज के फर्स्ट व सेकेंड ईयर स्टूडेंट्स का मूल्यांकन पूरी तरह उनके इंटरनल असेसमेंट के आधार पर होगा न कि परीक्षा कराकर। यूजीसी ने यह फैसला देश में बढ़ते कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्दनेजर लिया था।’

यह भी पढ़े:14 सितंबर से शुरू होंगी कॉलेज की परीक्षाएं ! अटल बिहारी विश्वविद्यालय बिलासपुर ने जारी किया नोटिफिकेशन

कोर्ट ने कहा, ‘यह मामला 14 अगस्त के फैसले में निपटा दिया गया है जिसमें यूजी/पीजी कोर्सेज की फाइनल ईयर की परीक्षाएं अनिवार्य तौर पर कराने की यूजीसी की 6 जुलाई की गाइडलाइंस को सही ठहराया गया है। उसी समय विश्वविद्यालयों को यह स्वतंत्रता भी दी गई है कि वह पिछले वर्षों के छात्रों को प्रमोट करने के लिए परीक्षाएं करवा सकते हैं।’