दक्षिणमुखी विराजमान है माता ! खुल जाती थी विरासत काल में बंदियों की बेडियां..! केलो नदी व पहाड़ के बीच विराजी हैं मां घटेश्वरी माता..!

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रायगढ़/ दक्षिणमुखी विराजमान है माता का मंदिर खुल जाती थी विरासत काल में बंदियों की बेडियां केलो नदी व पहाड़ के बीच विराजी हैं मां घटेश्वरी माता ।रायगढ़ जिला मुख्यालय से वन मार्ग में महज 25 किलोमीटर व तमनार ब्लॉक मुख्यालय से 4 कलोमीटर रायगढ़ मार्ग पर केलो नदी के किनारे कसडोल गांव में मां घटेश्वरी का मंदिर है , मां घटेश्वरी की मुर्ति स्वमेव विराजमान हैं ,ग्रामीणों के बताए अनुसार मंदिर की कहानी आदिकाल अंग्रेज जमाने से जुडी हुई है , जशपुर जिला से रायगढ़ जाने का पुराने समय में यह मुख्य मार्ग हुआ करता था इसी रास्ते से लोग आवागमन किया करते थे ।


कसडोल निवासी बसंत साहू बताते हैं की कहावत है की राजाओं काल में जब किसी बंदी को इस मार्ग से ले जाया ले जाया जाता था तब मंदिर के सीमा ने पहुंचते ही हाथों की बेडियां और हथकड़ियां खुल जाया करती थी लेकिन बंदी भाग नहीं पाते थे, तमनार की ओर से मंदिर आने से पहले केलो नदी का पुल पड़ता है, पूर्व समय में जब पुल नहीं बना था तब लोग नदी पार कर मंदिर में नवरात्र पूजन करने आया करते थे।

साथ ही साथ भक्तों की आस्था है की घटेश्वरी माता के दरबार में अदालत से जुड़े प्रकरण और शादी में होने वाली बाधाओं की सुनवाई की फरियाद लेकर माता के दरबार में माथा टेकने लोग आते हैं और लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है। कसडोल का यह मंदिर प्रांगण पर्यटन को का केंद्र बना हुआ है जहां अक्सर लोग घूमने आया करते हैं केलो नदी की कलकल धारा वही थोडी दुर पर पहाड तो जंगल के भीतर वन गंगा भी है ।

विडिओ में देखें मां घटेश्वरी का दरबार

मंदिर का आसपास का क्षेत्र जंगली हाथीयों का विचरण क्षेत्र है लेकिन मंदिर आने जाने वाले किसी भी दर्शनार्थियों को कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाई गई है।

मंदिर का निर्माण हाल फिलहाल में हुआ है जैसे जैसे भक्तों की आस्था बढ़ती गई मंदिर का निर्माण में लोग सहयोग करते गए।

इस नवरात्र में मंदिर में 550 ज्योती कलश जगमगा रही हैं जिसमें 400 तेल की व 150 घी की ज्योति कलश है। मंदिर में प्रत्येक दिन सुबह शाम आरती की जाती है मंदिर में पुजन अर्चन मानु बाबा जी के द्वारा की जाती है मंदिर परिसर में ही कुटिया बनाकर बाबा निवास कर रहे हैं।

साथ ही मंदिर समिति के अध्यक्ष जतिन साव बताते हैं कि मंदिर समिति द्वारा चैत्र नवरात्र में भव्य कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है चैत माह कोरोना के ग्रहण के कारण कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो पाया माता रानी का आशीर्वाद रहा तो इस चैत में भव्य कार्यक्रम का आयोजन होगा। वही मंदिर से लगे केलो नदी में पचरी निर्माण का कार्य चल रहा है समिति के द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि कोई भी व्यक्ति अपने पूर्वजों की स्मृति में नदी पर पचडी का निर्माण करवा सकता है एवं निमार्ण हो भी रहा है।

कोरोना काल होने के कारण कोरोना के नियम कानून का पालन करते हुए पूजन अर्चन किया जा रहा है, सीमित संख्या में लोगों को दर्शन की अनुमति दी जा रही है