भोजन नहीं मिलने से कोरोना मरीजो ने अस्पताल से बाहर निकल कर किया प्रदर्शन..! बुलानी पड़ी पुलिस..!! एक मरीज के पीछे सरकार कितना खर्च कर रही यह सार्वजनिक करने की मांग….!!

भिलाई. दोपहर का भोजन नहीं मिलने से कोविड केयर सेंटर चंदखुरी में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीज भड़क गए। यहां करीब 200 मरीज भर्ती है। जब चार बजे तक भोजन नहीं मिला तो वे बाहर आकर प्रदर्शन करने लगे। वार्ड से बाहर निकल कर मरीजों के प्रदर्शन करने से वहां हड़कंप मच गया। इसकी सूचना पुलिस को मिली। जेवरा सिरसा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कमान संभाला। वार्ड से बाहर निकलकर प्रदर्शन करने वाले मरीजों को समझा बुझाकर भीतर भेजा। इसके बाद खाना लाया गया। यहां मरीजों को सुबह का नाश्ता भी देर से मिला था। इससे वे नाराज थे पर दोपहर में भोजन नहीं आया तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। घटना गुरुवार की है। कोविड मरीजों के उपचार और भोजन में लापरवाही के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। कोविड मरीजों के वार्ड से बाहर निकलने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया था।

गर्भवती महिलाएं भी दाखिल
हॉस्पिटल में दाखिल एक महिला ने खिड़की से आवाज देकर बताया कि यहां गर्भवती महिलाएं और छोटे दुधमुंहे बच्चों के साथ भी महिलाएं दाखिल हैं। इनको अगर समय पर खाना नहीं मिलेगा, तब क्या हाल होगा। बच्चे को दूध कहां से मिलेगा। इस वजह से सभी निकलकर घर जाने की तैयारी में थे। पुलिस ने रोक लिया। अब भीतर में सभी को रखकर बाहर से दरवाजा बंद कर दिए हैं। मरीजों में खासा रोष है।

मरीज को नहीं किया एडमिट
मरीज को हॉस्पिटल के पीछे रास्ते से भीतर लाया जाता है। कोविड संक्रमित जब प्रदर्शन पर उतारू हो गए, तब नए मरीजों को स्टॉफ ने भीतर लेना बंद कर उनको संभालने में जुट गए। नए मरीज को लेकर आए एंबुलेंस को एक घंटे से अधिक समय तक पीछे खड़ा रखा गया। सामने पुलिस की टीम तैनात कर दी गई।

नाश्ता और भोजन की व्यवस्था
कोविड केयर सेंटर में नाश्ता और दो टाइम भोजन की व्यवस्था करनी ही है। तब बड़ी संख्या में मरीजों के लिए खाना क्यों नहीं पहुंचा। यह बड़ा सवाल है। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि उनको इस मामले में जानकारी नहीं है कि मरीजों को सुबह से खाना नहीं मिला है। जब पुलिस की टीम मौके पर तैनात कर दी गई तो सवाल उठता है कि प्रशासन को इस मामले में जानकारी कैसे नहीं मिली।

बुधवार से पानी को तरस रहे थे मरीज
कोविड अस्पताल में बुधवार से पानी की आपूर्ति प्रभावित है। जिसकी वजह से दाखिल मरीज तनाव में थे। दाखिल मरीजों ने इसकी शिकायत हॉस्पिटल के इंचार्ज से लेकर जिले के चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर के दफ्तर में फोन कर किया है। इसके बाद भी सुबह तक पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी । यहां की अव्यवस्था से मरीज खासे परेशान हैं।

नहाना, टॉयलेट जाना सब कुछ प्रभावित
यहां दाखिल मरीजों ने बताया कि बुधवार को दोपहर 3 बजे से नलों में पानी आना बंद हो गया। लोग नहाने से लेकर टॉयलेट जाने के लिए परेशान हो गए। इसको लेकर मौजूद डॉक्टर से शिकायत की गई। तब उसने मरीजों के सामने ही फोन लगाकर प्लंबर से बात की। प्लंबर ने दूसरा काम बताकर आने से मना कर दिया। डॉक्टर ने मरीजों से कहा कि प्लंबर अभी नहीं आ पाएगा। दूसरे से बात करते हैं। तब से गुरुवार सुबह तक हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। सीएमएचओ के दफ्तर में जिन्होंने फोन उठाया उसने मरीजों से कहा कि जहां दाखिल हो, वहां के इंचार्ज को यह बताओ।

पीने का पानी भी नहीं
हॉस्पिटल के वार्डों में पीने के लिए पानी तक खत्म हो गया। बहुत से मरीजों ने घर से पानी का बोतल मंगवा लिया। जिनके घर से कोई आने वाला नहीं था, वे दूसरे का मुंह तक रहे थे। गुरुवार की सुबह तक हॉस्पिटल के वार्ड क्रमांक -14 में पीने के पानी तक की आपूर्ति नहीं की जा सकी है। दूसरे वार्ड की तरह यहां आरओ लगा है, लेकिन उसमें पानी नहीं आ रहा है। इस वजह से पीने के लिए दूसरे वार्ड से वे पानी लेकर आ रहे हैं। बुधवार को दूसरे वार्डों के आरओ भी खाली पड़े थे।

पेटभर नहीं मिल रहा नाश्ता, खाना
कोविड अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल मरीजों को सुबह नाश्ता में एक दिन इडली, दूसरे दिन सांभर बड़ा, पोहा वगैरह दिया जा रहा है। लोगों को सुबह नाश्ता अच्छे से करने का आदत होता है। यहां नाश्ता के किसी पैक में दो इडली तो किसी में तीन इडली निकल रहा है। वह भी छोटी, मरीज और मांगता है, तो उसे फटकार दिया जाता है। इसी तरह से पोहा और बड़ा का मामला है। शाम को न नाश्ता दे रहे हैं और न चाय मिल रही है। खाना में रोटी, चावल, सब्जी और मीठा दिया जा रहा है। मरीजों का कहना है कि कुछ और डिब्बा रख दिया जाना चाहिए। जिससे मरीज पेटभर कर खाना खा सके।

मनोरंजन का साधन नहीं मानसिक तनाव से गुजर रहे
यहां एक वार्ड में करीब 40 मरीज दाखिल हैं। पूरे दिन वे एक दूसरे को देखते रहते हैं। इस तरह के स्थानों में मरीजों को मनोरंजन के लिए टीवी, कैरम या व्यायाम कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। मरीजों का कहना है कि कोरोना से वे परेशान नहीं है, लेकिन यहां मानसिक तनाव से जरूर गुजर रहे हैं। बेहतर होता कि अलग कमरे में घर पर ही रखने की व्यवस्था कर दी जाती। इस सेंटर के नोडल अधिकारी ऋतुराज रघुवंशी मीडया से बात करने से परहेज करते हैं। वे अपनी जिम्मेदारी बचना चाहते हैं।

बिना लक्षण के आया रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव
कचांदुर के कोरोना केयर सेंटर में दाखिल मरीजों के मुताबिक उनमें से अधिकतर में लक्षण था ही नहीं। जांच के बाद फोन आया कि उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव है और यहां लाकर रख दिया गया है। न उनको बुखार था, न सिर दर्द, न कोई खांसी। सभी मरीजों को जांच की रिपोर्ट तक नहीं मिली है, जिसमें उनके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हो। मरीजों को कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट मिले, यह व्यवस्था जिला प्रशासन को करा देनी चाहिए।

कम से कम दो दिनों में बदला जाए बेडशीट
मरीजों का कहना है कि जब से यहां दाखिल हुए हैं, तब से वही बेडशीट बिछा हुआ है। अब उनके छुट्टी होने का समय आ गया। आशंका है कि उनके जाने के बाद दूसरे मरीज के लिए भी इसे बदला जाएगा या नहीं। इन व्यवस्था को देखने अलग से प्रशासन की ओर से जिम्मेदार को नियुक्ति किया जाना चाहिए।

एक मरीज के पीछे सरकार कितना खर्च कर रही यह सार्वजनिक हो
मरीज यह जानना चाहते हैं कि सरकार एक मरीज के पीछे कितना खर्च रही है। उस राशि से अस्पताल के खर्च के अलावा मरीजों की सुविधाओं के लिए क्या-क्या शामिल है। यह जानकारी किसी को नहीं है। मरीजों का कहना है कि सरकार एक मरीज के पीछे मोटी रकम खर्च कर रही है। एक मरीज ने दावा किया कि प्रति मरीज मोटी रकम का भुगतान अस्पताल प्रबंधन को किया जाता है। उसके बाद भी वांछित सुविधाएं नहीं मिल रही है। उस मरीज ने आशंका जताई की कोडिव अस्पाल में भर्ती के नाम पर सराकरी खजाना खाली करने का कोई षडयंत्र को नहीं चल रहा है। मरीज ने कहा प्रशासन सार्वजनिक करे कि सरकार से प्रति मरीज कितना भुगतान हो रहा है।

निगम आयुक्त हैं नोडल अधिकारी
कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर भुरे ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों को सुबह से भोजन नहीं मिला, इसकी शिकायत नहीं मिली है। कचांदुर कोविड केयर सेंटर के नोडल अधिकारी नगर पालिक निगम, भिलाई के आयुक्त हैं। उनसे जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता सकता हूं।

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