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रायगढ़/ एक तरफ 70 साल का बूढ़ा आदमी और दुसरी तरफ तहसीलदार पुसौर..? कौन किस पर बना रहा है दबाव..?? किसके दावों में दम.. किसके दावे खोखले..??? जानिए सच.. दस्तावेजों के साथ

रायगढ़। बुधवार शाम करीब 5:00 बजे के आसपास सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गाँधी की प्रतिमा के नीचे 70 वर्ष के वृद्ध व्यक्ति झसकेतन भोय, तहसीलदार पुसौर नंदकिशोर सिन्हा के खिलाफ धरने पर बैठे थे। सबसे पहले मामले को समझने के लिए दोनों पक्षों का बयान सुनना जरूरी है। वृद्ध का आरोप है कि उसमें तहसीलदार के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की है जिससे बौखलाकर तहसीलदार ने उन्हें तहसील कार्यालय के सामने उन्हें मारा है और उन्हें गालियां और धमकी दी हैं। वही तहसीलदार ने इस मामले में सारे आरोपों को निराधार बताया है और उस पर झगड़ालू होने का आरोप लगाते हुए एक जमीन पर गलत तरीके से अपने जीवित रिश्तेदार का नाम हटवाने के लिए दबाव बनाए जाने हेतु ऐसा किया जा रहा है। हमने इस मामले की पूरी पड़ताल की। कागजों को खंगाला। दोनों पक्षों के मीडिया को दिए गए आरोप और बयान भी सुने।

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प्रिंट मीडिया में संबंधित खबर और तहसीलदार का बयान

क्या कहना है वृद्ध का

70 वर्षीय झसकेतन भोय तहसीलदार पर अत्याचार, गाली गलौज मारपीट और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वह आज से लगभग 16 वर्ष पूर्व ही प्रथम अपर जिला न्यायाधीश, रायगढ़ की अदालत के अपील में 07 अगस्त 2006 को किये गये फैसले के अनुसार अपनी जमीन का मुकदमा जीत चुका है एवं उसे उक्त जमीन का मालिक घोषित किया जा चुका है। इस 70 वर्ष के ग्रामीण बुजुर्ग ने जब उक्त फैसला दिखाकर तहसीलदार पुसौर नंदकिशोर सिन्हा से प्रार्थना किया कि फैसला मुताबिक रेव्हेन्यु रेकार्ड में उसका नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया है, लेकिन रेकार्ड में एक नाम और गलत रूप से जोड़ दिया गया है, जिसे काट दिया जाए, तो तहसीलदार नंदकिशोर सिन्हा ने राजस्व प्रकरण में दिनांक 02 मई 2022 को अंतिम आदेश पारित करते हुए इस 70 वर्षीय बुजुर्ग का आवेदन पत्र खारिज कर दिया।

तहसीलदार के खिलाफ कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट की याचिका

जिसके बाद झसकेतन ने 27 अक्टूबर 2022 को तहसीलदार नंदकिशोर के विरुद्ध जिला न्यायाधीश, रायगढ़ की अदालत में कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की याचिका पेश किया है। जिसमें तहसीलदार नंदकिशोर सिन्हा की उपस्थिति के लिए दिनांक 09 नवंबर 2022 और दिनांक 04 जनवरी 2023 की तारीख तय की गई थी। जिसके बाद आगामी पेशी 16 जनवरी निर्धारित की गई है। तहसीलदार नंदकिशोर सिन्हा के विरूद्ध चल रहे उपरोक्त मामले का एम. जे.सी. केस नंबर-167/ 2022 है।

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संबंधित खबर और तहसीलदार का बयान

तहसीलदार नंदकिशोर सिन्हा ने मीडिया को बताया कि

इस मामले में डिजिटल मीडिया में दिए हुए अपने बयान में पुसौर के तहसीलदार नंदकिशोर सिन्हा ने बताया है कि

“झसकेतन भोई अपने किसी रिश्तेदार और सहआवेदक मानगोविंद का नाम रिकार्ड से कटवाकर सिर्फ अपना नाम उस भूमि के रिकार्ड में दर्ज करवाने का प्रयास वर्ष 2017/18 से करता आ रहा है। वह मानगोविंद को मरा हुआ बता रहा है, जबकि आज से ठीक एक साल पहले मानगोविन्द का मुख्तियार नामा लेकर एक अन्य व्यक्ति न्यायालय में उपस्थित हुआ था। उसने तब मानगोविंद को विडियो कालिंग करवाकर तहसील न्यायालय में उसके जीवित होने का प्रमाण भी दिया था। वहीं संबंधित मामले में वर्ष 2018 में पदस्थ तत्कालीन तहसीलदार पुसौर पी आर माहेश्वरी ने सिविल न्यायलय के आदेशानुसार रिकार्ड में मानगोविंद का नाम दर्ज किया था। अतः बिना उचित कारण के मानगोविंद का नाम रिकार्ड से नही काटा जा सकता है। अब यदि झसकेतन भोई नियमतः रिकार्ड में अपना नाम ही दर्ज रखवाना चाहता है तो उसे अपीलीय न्यायलय में मानगोविंद का मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज देकर अपील पर जाना चाहिए था, परंतु उसने ऐसा न करके गलत रास्ता अपनाया है।”

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तहसीलदार द्वारा जारी आदेश की कॉपी

क्या निकला दस्तावेजों की पड़ताल में..??

इस मामले में अदालत के इन अभिलेखों की पड़ताल से पता चला कि वृद्ध 16 साल पहले ही केस जीत चुका है। हमने तहसीलदार के उस आदेश की कॉपी भी निकाली, जिसमें तहसीलदार द्वारा बुजुर्ग के आवेदन को खारिज कर दिया गया था। जिसके आसपास ही यह सारा बखेड़ा घूम रहा है। अगर इस आदेश को गौर से पढ़ा जाए तो इससे ज्ञात होता है कि

  • झसकेतन द्वारा अपने सहखातेदार को 54 वर्षों से लापता बताया गया है और इस संबंध में कोई भी मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है। लेकिन सवाल यह होता है कि जो 54 वर्षों से लापता है। उसका मृत्यु प्रमाण पत्र कहां से लाया जाए..? इसमें कहीं भी, मृत्यु, मुख्तियार नामा और वीडियो कॉलिंग जैसी भी कोई बात तहसीलदार द्वारा अंकित नहीं है। जैसा कि पुसौर तहसीलदार ने मीडिया को दिए बयान में कहा है।
  • इस मामले में तहसीलदार के कार्यालय में केस का फैसला तो 02 मई 2022 को ही हो गया है। तहसीलदार के कोर्ट में यह मामला लंबित है ही नहीं! जब निर्णय हो ही गया ऐसे में वह वृद्ध फैसले के बाद भी तहसीलदार पर किस तरह का दबाव बनाना चाह रहा है..? जैसा कि आरोप तहसीलदार ने लगाया है। यह आरोप भी समझ के परे है।
  • तहसीलदार द्वारा मुख्यमंत्री जनदर्शन में उनके विरुद्ध शिकायत की बात तो कही गई है। लेकिन कहीं भी बुजुर्ग द्वारा उनके खिलाफ कोर्ट ऑफ कंटेंट की बात नहीं बताई गई। तहसीलदार के फैसले के बाद उनके विरुद्ध रायगढ़ जिला न्यायाधीश के कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। जिसकी 2 तारीख के हो चुकी हैं और अगले आगामी तारीख 16 जनवरी को है।
  • तहसीलदार नंदकिशोर का यह दावा झूठा साबित हो गया है कि झसकेतन भोय का प्रकरण उनके न्यायालय में लंबित है, जिसमें वह जमीन को अपने नाम पर दर्ज करने का दबाव बनाने के लिए उन्हें बदनाम कर रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि तहसीलदार के कार्यालय में झसकेतन के केस का फैसला तो 02 मई 2022 को ही हो गया है। जिसके बाद अब तहसीलदार नंदकिशोर के खिलाफ जिला न्यायाधीश के कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। जिसे तहसीलदार द्वारा छिपाते हुए मीडिया में गलत बयानबाजी की गई है।

अदालत के अभिलेखों की रोशनी में 70 वर्ष के बुजुर्ग की यह बात सच मालूम पड़ती है कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की कार्यवाही से नाराज नंदकिशोर सिन्हा ने बूढ़े और लाचार झसकेतन पर अपनी पूरी भड़ास निकाली है और अब अपने ओहदे की आड़ में अपने आपको बचाने के लिए बेसिर-पैर की मनगढ़ंत कहानी का ताना-बाना बुनकर डेमेज कंट्रोल का प्रयास कर रहें है।

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