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रायगढ़: जिंदल स्टील एंड पावर के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा! कहा; ‘जमीन हमारी गई प्रदूषण हम झेल रहे और रोजगार बाहरी को..?’ 9 जनवरी को किया विरोध प्रदर्शन का ऐलान

रायगढ़। रायगढ़ जिला का औद्योगिक जिला है। यहां सैकड़ों छोटे-बड़े उद्योग हैं। जिले का सबसे बड़ा उद्योग समूह जिंदल उद्योग समूह है। जिसके यहां कई कल कारखाने हैं। जिसमें जिंदल स्टील एंड पावर अकेला ही जिले के सारे उद्योगों के बराबर है। लेकिन स्थानीय लोगों के द्वारा क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और रोजगार की समस्या को लेकर जिंदल स्टील एंड पावर (JSPL) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है इसकी शुरुआत ग्राम कोकड़ीतराई के निवासियों एसडीएम को ज्ञापन देकर की गई है और 9 जनवरी को विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया गया है।

क्या है ज्ञापन में

जिला मुख्यालय से लगें जिंदल स्टील एन्ड पावर लिमिटेड कंपनी के खिलाफ स्थानीय लोगो का आक्रोश पनपने लगा है। स्थानीय लोगों की उपेक्षा करने से आस पास के ग्रामीणों में जेएसपीएल के खिलाफ खासी नाराजगी देखी जा रही है। इस संबंध में कोकड़ीतराई के ग्रामीणों एसडीएम को दिये गये आवेदन में कहा है कि जेएसपीएल की स्थापना के बावजूद उनके क्षेत्र में लोगों को रोजगार के अवसर कंपनी में नहीं मिल रहे हैं। दीगर प्रान्त के लोगों को बुलवाकर उन्हें काम पर रखा जाता है। जबकि स्थानीय उद्योगों में प्रथम अधिकार स्थानीय लोगो का होना चाहिए। जमीन हमारी गयी, प्रदूषण हम झेल रहे हैं और रोजगार बाहरी व्यक्तियों को मिल रहा है। इसी के विरोध में 9 जनवरी को किरोड़ीमल नगर के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। ग्रामीणों के इस विरोध के स्वर को देखते हुए जिंदल के अफसरों ने उठापटक शुरू कर दी हैं और बेरोजगारी व प्रदूषण के खिलाफ जिलेवासियों की शिकायत और नाराजगी जगजाहिर होने के डर से उनकी चिंता बढ़ गई है।

सैकड़ों उद्योग मगर रोजगार की जगह मिला प्रदूषण..?

रायगढ़ जिले में उद्योगों की संख्या पर गौर किया जाए तो उसके हिसाब से यहां रोजगार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए मगर, यहां के स्थानीय निवासी आदमी बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं और बदले में मिला तो सिर्फ प्रदूषण! सुबह-सुबह घर की छत पर जमी ‘ब्लैक डस्ट’ प्रत्यक्ष प्रमाण है। जो धीमे-धीमे लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। ऐसा नहीं कि उद्योग के सिर्फ आसपास के क्षेत्र हैं। प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में भी इसका असर व्यापक रूप से देखने को मिलता है। क्योंकि इन उद्योगों से निकलने वाले धुएं में डस्ट के सूक्ष्म कण होते हैं। जो लगातार हवा के साथ कई किलोमीटर दूर तक अपना असर दिखाते हैं।

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