एक बार ठीक होने के बाद दोबारा फिर हो सकते हैं कोरोना संक्रमित – WHO..पढ़े पूरी खबर..

पूरे विश्व में लोग इस बात को जानना चाहते हैं कि एक बार कोरोना से संक्रमित होने के बाद दोबारा ये इन्फेक्शन हो सकता है या नहीं? ठीक हो चुके लोगों को फिर से कोविड 19 होने का कितना खतरा है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने कहा है कि हालांकि कुछ ऐसे मामले हैं जिससे संकेत मिलते हैं कि कोई व्यक्ति दोबारा कोविड-19 से संक्रमित हो सकता है, लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूएचओ स्वास्थ्य आपात कार्यक्रम के कोविड-19 रिस्पांस की टेक्निकल हेड मारिया वेन केरखोवे ने एक वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “कुछ व्यक्तियों में पीसीआर (पॉलीमर्स चेन रिएक्शन) पॉजिटिविटी केवल कुछ दिनों के लिए नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों तक रह सकती है, और इसका यह मतलब नहीं है कि वह इस दौरान संक्रमित हो.”

डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञ के अनुसार, फॉल्स पॉजिटिविटी या फॉल्स निगेटिविटी से भी इस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है कि कोई व्यक्ति दोबारा कोराना पॉजिटिव हुआ है, लेकिन इसे दोबारा संक्रमण होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, “हम सैद्धांतिक रूप से अनुक्रमण (सिक्वेंसिंग) को देखना चाहेंगे. क्या वायरस को आइसोलेट किया जा सकता है, क्या अनुक्रमण किया जा सकता है, तब हम देख और पता लगा सकते हैं कि क्या कोई दोबारा संक्रमित हुआ है.”

तीन महीने बाद फिर हो सकते हैं वायरस से संक्रमित
उधर, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ माइकल मीना का कहना है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शरीर में इम्यून मॉलिक्यूल बनने लगते हैं, जिन्हें एंटीबॉडी कहा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये एंटीबॉडी किसी मरीज के शरीर में दो-तीन महीने तक रहती है।

हालांकि वैज्ञानिकों और जानकारों का मानना है कि कम समय में कोई एक व्यक्ति दोबारा कोरोना से संक्रमित हो जाए, ऐसी संभावना काफी कम है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि दुनिया में ऐसे मामले क्यों सामने आए जहां कम समय में किसी संक्रमित व्यक्ति को दोबारा कोरोना हो गया हो।

इसके जवाब में वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर किसी संक्रमित व्यक्ति को दोबारा कोरोना हो जाए तो इसका मतलब यह है कि वो पहले पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ होगा।

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