खुशखबरी..! दूसरी लहर में जितनी तेजी से फैला कोरोना, उसी रफ्तार से खत्म भी होगा…!

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नई दिल्ली/देश में कोरोना की दूसरी लहर चुपके से आई। इस लहर में कोरोना वायरस ने संक्रमण की जितनी तेज रफ्तार पकड़ी, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। लेकिन, अब खुशखबरी आ रही है। एक्सपर्ट्स का आकलन है कि कोरोना वायरस की मौजूदा लहर जाएगी भी उतनी ही रफ्तार से। हालांकि, अभी वो टिपिंग पॉइंट आने में देरी है जहां से नए कोरोना केस घटने लगेंगे।

दूसरी लहर में नए कोरोना केस और कोविड मौतों की रफ्तार पहली लहर के मुकाबले बहुत ज्यादा है। नए-नए वेरियेंट्स के कारण हर्ड इम्यूनिटी का तो फॉर्म्युला ही फेल होता दिख रहा है। वहीं, टीकाकरण अभियान की रफ्तार भी आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। दूसरे देशों में कोरोना की दूसरी लहर आई तो लंबे समय तक टिकी नहीं, लेकिन भारत में दूसरी लहर के तहत नए केस अब भी रेकॉर्ड बना रहे हैं। 5 मई को 4.13 लाख नए केस सामने आए और 3,980 मौतें हुईं। लेकिन, एक्सपर्ट्स को यह पता नहीं कि यह लहर कब खत्म होगी। हालांकि, कुछ आंकड़ों से इसका अनुमान जरूर लगाया जा सकता है…

देश में अभी तेज लहर का दौर
कोविड महामारी की अलग-अलग लहरों का अलग-अलग हिस्सों में अध्ययन किया जा सकता है- कुछ दिनों में ही केस दोगुने हो जाएं तो उसे तेज वृद्धि का चरण मान सकते हैं और जब केस तेजी से नीचे जाने लगें तो उसे तेज गिरावट का चरण और फिर लंबे वक्त तक निचले स्तर पर कोरोना केस का स्थिर हो जाना।

पिछले साल के अक्टूबर महीने में अमेरिका इसी दौर से गुजर रहा था जिसका सामना अभी भारत कर रहा है। जनवरी में जब वहां टीकाकरण अभियान शुरू हुआ तो कोरोना की दूसरी लहर काबू में आई।

भारत में दूसरी लहर में कोरोना केस की तेज वृद्धि का दौर मार्च महीने के मध्य में शुरू हुआ और एक महीने से भी कम वक्त में पहली लहर का पीक पार कर गया जो सितंबर महीने में आया था। जहां तक मौतों की बात है तो पिछले रेकॉर्ड को पार करने में भी डेढ़ महीने का ही वक्त लगा।
तेज गिरावट के सिद्धांत के मुताबिक, महामारी की दूसरी लहर में नए कोरोना केस में गिरावट भी तेजी से होगी। लेकिन, महत्वपूर्ण बात यह है कि दूसरी लहर पीक पर कब पहुंचेंगी। इस बीच टीकाकरण अभियान की रफ्तार बढ़ाने और पर्याप्त सावधानियां बरतने की भी जरूरत है।

इजरायल ने कर दिखाया
इजरायल उन गिने-चुने देशों में शामिल है जहां गिरावट के दौर पार कर लिया और मध्य अप्रैल से वहां 200 से भी कम नए कोरोना केस आ रहे हैं। इसका श्रेय इजरायल के तेज टीकाकरण अभियान को जाता है। उसकी 58.5 प्रतिशत आबादी को कोरोना का टीका लग गया है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कोविड-19 पूरी तरह खत्म तो नहीं होगा, लेकिन जब नए केस में तेज गिरावट आए और फिर हर दिन नए केस की संख्या मामूली सीमा में सिमट जाए तो इसका खात्मा माना जा सकता है।

भारत ने नहीं लिया सबक
हालांकि, भारत उन देशों में शुमार है जहां सतर्कता बरतने से तुरंत पीछा छुड़ा लिया गया। पहली लहर में तेज गिरावट का दौर आया तो सार्वजनिक स्थल खोले जाने लगे, पाबंदियां उठाई जाने लगीं तो चारों तरफ लापरवाही का आलम दिखने लगा। लोग मास्क लगाने और सोशल डिस्टैंसिंग का पालन तक की जहमत भी नहीं उठाने लगे। ऐसा व्यवहार तब देखने को मिला जब कोरोना के नए वेरियेंट्स सामने आ रहे थे जो ज्यादा संक्रामक हैं। वहीं, कई देशों में कोरोना की दूसरी लहर आ रही थी। लेकिन भारत की आम जनता ने कोई सबक नहीं लिया। उधर, सरकार भी दूसरी लहर की आशंका भांप नहीं सकी और टीकाकरण अभियान को तेज नहीं किया।

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