झोलाछाप डॉक्टर की इलाज से नाबालिग की मौत …हप्ते भर में दो लोगो की गई जान…जिम्मेदार मौन

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@डोलकुमार निषाद


जांजगीर चांपा- छत्तीसगढ़ प्रदेश में नर्सिंग होम एक्ट को लागू किए हुए अब 8 साल से भी ज्यादा वक्त हो चुके हैं लेकिन नर्सिंग होम एक्ट को पालन कराने में प्रशासन नाकाम ही साबित होते नजर आ रही हैं वहीं अब नर्सिंग होम एक्ट आला अधिकारियों की कमाई का जरिया भी बन चुका है यही वजह है कि आपको झोलाछाप डॉक्टर हर गली मोहल्ले पर आपको देखने को मिल जाएंगे जो कि कोरोना काल के दौरान भी अपनी दुकानदारी धड़ल्ले के साथ चला रहे हैं बगैर कोरोनावायरस सर्दी,खांसी,बुखार के मरीजों का इलाज भी कर रहे हैं ऐसे में लोगों की जान पर जान बन रही है और झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से कई कोरोना संक्रमितों का मौत का भी मामला सामने आ चुका है,, लेकिन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन झोलाछाप डॉक्टरों के ऊपर कार्यवाही तो दूर की बात झोलाछाप डॉक्टरों को समझाइश देना भी उचित नहीं समझ रहे हैं और कई जगह ऐसे भी देखने को मिला जहां पर झोलाछाप डॉक्टर और झोलाछाप पैथोलॉजी लैब  खुद जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में ही चल रहे हैं. और भोले-भाले ग्रामीण मौत के मुंह में समा रहे हैं लेकिन मजाल है कोई जिम्मेदार अधिकारी झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही कर दे.


दरअसल में पूरा मामला डभरा क्षेत्र का है जहां तेंदूमुड़ी मोड़  नायकटांडा में एक झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही की वजह से सप्ताह भर में 2 मरीजों की मौत हुई है दरसल में तेंदूमुड़ी मोड  नायकटांडा में अमृतलाल साहू नामक एक झोलाछाप डॉक्टर पिछले 10 साल से झोलाछाप डॉक्टर की दुकानदारी चला रहा है,, मंगलवार को तेंदूमुड़ी के रामेश्वर यादव पिता बोररु यादव (16 वर्ष )की तबीयत खराब होने पर इस झोलाछाप डॉक्टर के पास इलाज कराने आए लेकिन इलाज के दौरान मरीज की तबीयत बिगड़ी और तत्काल उसे डभरा समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई.

क्या कहते है ग्रामीण

ठीक इससे एक सप्ताह पहले तेंदूमुड़ी की ही एक और श्याम कुमार नामक युवक की तबीयत खराब होने पर झोलाछाप डॉक्टर अमृतलाल साहू के पास इलाज कराने के लिए लाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई है और यह घटना सप्ताह भर के भीतर एक ही गांव के दो युवकों की मौत झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज की वजह से हुई है.

दवाइयों का जखीरा


कोरोना लक्षण वाले मरीजों का इलाज बिना जांच के

कोरोना काल की दूसरी लहर में झोलाछाप डॉक्टर अमृतलाल साहू के द्वारा कोरोना लक्षण वाले मरीजों के बगैर कोरोना जांच धड़ल्ले के साथ इलाज किया गया भोले-भाले ग्रामीणों को लगा कि बिना जांच डॉक्टर इलाज कर रहा है तो क्यों ना इसी से इलाज कराया जाए. लेकिन उन्हें क्या पता था कि वह इलाज करने वाले  धरती के भगवान के पास नहीं बल्कि धरती के यमराज के पास अपनी इलाज कराने जा रहे हैं. ऐसे कई मामले भी देखने को मिला जहां उक्त झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज की वजह से मरीजों को हायर सेंटर तक रिफर करना पड़ा जहां पर उन्हें अपनी जेब ढीली करके अपनी जान बचानी पड़ी,, लेकिन कोरोना काल के दौरान मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ करने वाले इस झोलाछाप डॉक्टर के ऊपर किसी भी प्रकार की कार्यवाही ना होना जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है कहीं ऐसा तो नहीं कि आला अधिकारी की मिलीभगत से झोलाछाप डॉक्टर अपनी दुकान चला रहे हो.


दो बार हुई कार्यवाही फिर भी चल रही झोलाछाप डॉक्टर की दुकान

 आपको बता दें कि पूर्व में तत्कालीन डभरा एसडीएम बजरंग दुबे के द्वारा झोलाछाप डॉक्टर के दुकान को सीलिंग की कार्यवाही की गई थी उसके बाद एक बार और उस झोलाछाप डॉक्टर की दुकान को सील किया गया था लेकिन सीलिंग के कुछ दिन बाद झोलाछाप डॉक्टर बेखौफ अपनी दुकान को खोल कर फिर से अपनी दुकानदारी शुरू कर देता है.

जल्दी ही कार्यवाही होगी

पहले भी बंद कराया गया था लेकिन वह फिर से मरीजों का इलाज कर रहा है इस बात की जानकारी मुझे आप के माध्यम से मिली है तो इस बार स्वास्थ्य विभाग की टीम और तहसीलदार साहब की टीम के द्वारा इस बार पुनः कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाएगी

डॉ. एन पी मिश्रा खंड चिकित्सा अधिकारी डभरा


मामले की जांच करवाऊंगा कार्यवाही भी होगी

वह इस मामले पर डभरा एसडीएम आरपी आँचला का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी और कार्यवाही भी होगी

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