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SBI की बुनियादी ब्याज दर (Base Rate) में 10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी! बढेगा EMI का बोझ! खत्म हो रहा सस्ते लोन का जमाना!

भारत की सबसे बड़ी सरकारी बैंक एसबीआई ने अपनी बुनियादी ब्याज दर (base rate) में 10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी है। अब एसबीआई का बेस रेट 7.55 फीसदी हो गया है। इसके कारण ईएमआई चुकाने वालों का बोझ बढ़ सकता है। इस बढ़ोतरी से यह भी अनुमान लगाया जाने लगा है कि अब देश में सस्ते कर्ज का दौर खत्म होने वाला है?

इससे पहले एसबीआई ने सितंबर में अपना बेस रेट पांच बेसिस पॉइंट घटाकर 7.45 फीसदी कर दिया था। इसमें 10 बिंदुओं की बढ़ोतरी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की नई मौद्रिक नीति के एलान के बाद की गई है। रिजर्व बैंक ने 8 दिसंबर को हुई बैठक में नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया था। आरबीआई ने रेपो रेट 4 फीसदी पर और रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर बरकरार रखा था। इसके बाद आशंका जताई गई थी कि अब बैंकें अपने स्तर पर ब्याज दरें बढ़ा सकती हैं। गुरुवार को एसबीआई ने इसकी शुरुआत कर दी। 

दो करोड़ से ज्यादा की एफडी पर ब्याज दर बढ़ाई
एसबीआई ने जहां बेस रेट बढ़ाकर ग्राहकों को झटका दिया है वहीं सावधि जमा (एफडी) पर भी ब्याज दर बढ़ाई है। हालांकि इसका लाभ बड़े ग्राहकों को ही मिलेगा, क्योंकि दो करोड़ रुपये से ज्यादा की एफडी पर ही ब्याज बढ़ाया गया है। 

बेस रेट अर्थव्यवस्था का एक सूचकांक भी होती है। एसबीआई की इस बढ़ोतरी से लगने लगा है कि अब देश में सस्ते कर्ज का दौर खत्म होने वाला है। एसबीआई की तर्ज पर अब अन्य बैंकें भी बेस रेट में वृद्धि कर सकती हैं। बेस रेट बढ़ोतरी का असर बैंक द्वारा दिए जाने वाले कर्ज पर भी पड़ेगा। कर्ज पर ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। 

इसलिए है ब्याज दरें बढ़ने का खतरा
कच्चे तेल की कीमतें इस माह के आरंभ में गिरकर 65 डॉलर प्रति बैरल तक हो गई थी जो 16 दिसंबर को फिर बढ़कर 72 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। इससे विश्व में तेल की मांग बढ़ने का संकेत मिल रहा है। ओमिक्रॉन वायरस को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है, लेकिन यदि यह ज्यादा नहीं फैला और इस पर काबू पाया जा सका तो वैश्विक मांग बढ़ सकती है। थोक मूल्य सूचकांक में भी तीव्र बढ़ोतरी का भी ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है। 

क्या होती है बेस रेट
यह वह न्यूनतम ब्याज दर है जिस पर कोई बैंक अपने ग्राहकों को कर्ज देती है। जिन ग्राहकों ने फ्लोटिंग ब्याज दरों यानी परिवर्तनशील दरों पर होम व अन्य लोन ले रखे हैं, उन पर इसका असर पड़ सकता है। उन्हें ज्यादा ईएमआई चुकानी पड़ेगी या उनका कर्ज की मियाद बढ़ जाएगी, यानी ज्यादा वक्त तक ईएमआई चुकाना पड़ेगी।

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