इस जिले की एक ऐसी टीम जो करती है सांप सहित वन्य प्राणियों की रक्षा, और हर रविवार घुम घुम कर करती है जिलों के पिकनिक स्पोर्ट की सफाई..!

कोरबा से बसंत सिंह की रिपोर्ट


कोरबा जिले में कुछ हलचल सी मच रही है यहां के कुछ युवा वर्ग के लोग अचानक ही हर रविवार को बड़े बड़े बोरिया लेकर चेहरे पे मस्क हाथों में ग्लासब पहन कर एक 20से 30लोगो का समुह निकलती है ,दूर जंगलों के बीच बसे पर्यटन स्थल और पिकनिक स्पॉट के लिए और वहां जाके अपने हाथो से वहां फेके हुए प्लास्टिक दोना पत्तल चिप्स के पैकेट दारू की बोलते बियार की बोतले टूटे हुए कांच के टुकड़े और हर उस कचरे को उठाते है, जो वहां मिलता है छोटी छोटी बोरियो में घूम घूम कर सरा कचरा इकठ्ठा करते है। फिर एक जगह जमा कर बड़े बोरियो में भर के उनको एक बड़ी गाड़ी में लादकर शहर में बने कचरा डिपो में लाकर खाली किया जाता है ।


जब आने जाने वाले लोग उनको ऐसे देखते है तो वह कौतूहल का एक नजरा बन जाता है हर कोई अपनी गाड़ी रोक के देखने और पूछने आ जाता है, के आखिर क्या कर रहे है ? ये लोग क्यों कर रहे है ? ये लोग कुछ गांवो वाले जो इन जंगलों में बसते है वो लोग तो पोटली वाले बाबा ,कोई कचरा वाले बाबा ,कोई कबाड़ी ना जाने क्या क्या बोलते भी है,लेकिन जब उनको सरी सच्चाई का पता चलता है तो दोनों हाथ उठा कर ताली भी बजाते है तारीफ करते नहीं थकते ।

इन दिनों टीम आर सी आर एस कोरबा द्वारा एक मुहिम चल रही है जिनमे हर रविवार को टीम के लोग निकाल जाते है, कचरा साफ करने जंगलों में और वहां जाकर सारे कचरों को उठा के गाड़ी में भर कर शहर में बने कचरा डिपो में ले आते है।


मिली जानकारी के अनुसार टीम आर सी आर एस एक ऐसी संस्था है जो कोरबा शहरो में सांपो का जख्मी जानवरो को सुरक्षित तरीके से पकड़ कर उनका इलाज कराती है और उनको सकुशल उनके लिए उपयुक्त जगह देख कर उनको वहां छोड़ आती है। इस बारे में जब टीम के लोगो से पूछा गया तो आर सी आर एस के प्रमुख अध्यक्ष विनाश यादव ने जानकारी दी के कुछ दिनों पहले जंगल घूमते हुए अचानक उनकी नजर एक भालू पर पड़ी जो बुरी तरह से जख्मी था उसके पैर में एक टूटी हुई बियर कि बोतल घुस गया था और उसमें से बहुत खून बह रहा था और वो भालू कुछ कर भी नहीं पा रहा था बस इधर से उधर तड़प रहा था लेकिन हालात में वो भी उनके लिए उस वक़्त कुछ नहीं कर पाए इसका क्या हल निकाला जा सकता है, जिससे जंगली जानवरो के साथ ऐसा ना हो बहुत सोचने के बाद उनको ये तरीका समझ में आया के प्लास्टिक और ऐसी बोतले जंगल को और वहां रहने वाले जानवरो को नुक्सान पहुंचा रही है।


ये बात उन्होंने ग्रुप की मीटिंग में हर किसी को समझाई और सुझाव दिया के हफ्ते के एक दिन क्यों ना हम जंगलों को साफ करने में दे टीम के सभी सदस्यो को सही लगा और सबने एक साथ हा कहा फिर क्या था अब तब से आर सी आर एस का 3 सफाई वाला रविवार था । जहा 1 रानिझारिया 2 कॉफी प्वाइट 3 भी कॉफी प्वाइट रहा ये सभी जगह जाकर अब तक सफाई कर चुके है जि,नका वीडियो भी बना कर अपने you tube चैनल में डालते है ताकि लोग देखे और जागरूक हो के ऐसा करना सही है या नहीं है,अविनाश बताते है के एक बार में तो कोई भी नहीं समझेगा लेकिन धीरे धीरे सब जरूर एक दिन समझेंगे तब तक और उससे आगे भी उनकी टीम ये काम करते रहेगी।


इस पहल की सबसे अच्छी बात ये रही के उनके इस काम कि सराहना सबने की और कई लोगो ने उनके ढेर सारी शुभकामनाएं भी दी बल्कि कई लोग खुद से आके इस अभियान में जुड़े भी और अपने विचार भी बताए ऐसा ही अगर कोरबा के लोग आगे बढ़ कर समाज सेवा में थोड़ा वक्त दे तो हमारा कोरबा एक बहुत अच्छा प्रेरणा स्रोत बन सकता है, सभी शहरो के लिए इसलिए आर सी आर एस टीम ने अपील भी की के जायदा से जायदा लोगो तक ये बात पहुंचाई जाए।

Read More