छत्तीसगढ़/ स्कूल की बाउंड्रीवॉल के लिए खोदे गए 5 फीट के गड्‌ढे में भरा बारिश का पानी ! घर के बाहर खेलते- खेलते गढ्ढे में गिर गया तीन साल का मासूम.. हुई मौत ! सरकारी अफसरों की लापरवाही ने ली मासूम की जान.. पढ़िए पूरी खबर..!

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सूरजपुर, 26 जून। जिले के भैया थाना क्षेत्र अंतर्गत एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। अफसरों की लापरवाही से एक 3 साल के बच्चे की जान चली गई है। स्कूल की बाउंड्रीवॉल बनाने के लिए खुदवाए गए गड्ढे में गिरकर मासूम की मौत हो गई। बच्चा घर के बाहर खेलते-खेलते 50 फीट दूर पानी से भरे गड्‌ढे के पास पहुंचा और निर्माणाधीन बाउंड्री वॉल के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर कर उसकी मौत हो गयी। पूरे क्षेत्र में मातम फैल गया है। गड्‌ढा खुदवाए जाने के बाद उसे कवर करने का कोई इंतजाम नहीं किया गया था। अब हादसे के बाद अधिकारियों की आंख खुली और वहां तार की बाड़ लगाई गई है।

मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत नया करकोली में सरकारी स्कूल के लिए बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया जा रहा है। बाउंड्रीवॉल खड़ा करने के लिए कॉलम बनाने थे इसलिए गड्‌ढे खुदवाए गए थे। बरसात के कारण बारिश का पानी गड्ढों में भर गया तो 2 महीने से बाउंड्री वॉल का काम रुक गया था। शुक्रवार की शाम करीब 4 बजे बिसाहू रजवाड़े का 3 साल का बेटा चिराग रजवाड़े घर के बाहर खेल रहा था और खेलते – खेलते वह अचानक पानी से भरे गड्ढे में गिर गया। काफी देर तक जब वह नहीं दिखाई दिया। बच्चे के गायब होने की सूचना मिलने पर परिजन उसे तलाशने लगे। तभी मानसिक रूप से कमजोर उसके बड़े भाई ने गड्‌ढे की ओर इशारा किया। परिजन जब उधर गए तो पानी से भरे गड्‌ढे में मासूम का शव दिखाई दिया।

घटना के बाद ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल की बाउंड्रीवॉल के कॉलम के लिए दो महीने पहले गड्‌ढे खुदवाए गए थे, लेकिन मिट्‌टी से पट गए। इस पर 3 दिन पहले ग्राम पंचायत ने फिर JCB से 5 फीट गहरे 10 गड्‌ढों की खुदवाई कराई। इसी दौरान बारिश होने के कारण उनमें पानी भर गया। इसके बाद ग्राम पंचायत व अधिकारियों ने लापरवाही दिखाते हुए इन गड्‌ढों को खुला छोड़ दिया। सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।

घटना के बाद शनिवार को SDM प्रकाश सिंह राजपूत ने बिसाहू राजवाड़े को 4 लाख रुपए की मदद की है। और पंचायत ने भी 2500 रुपए दिए हैं। सरकारी अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत की लापरवाही के कारण मासूम की जान चली गई। पिछले 2 महीने से बाउंड्री वॉल के काम नहीं हुआ है तो अगर सुरक्षा अपनाते हुए खुले गड्ढे को घेर दिया गया होता तो आज चिराग जीवित होता।

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