Exclusive Story – कहानी केन बेतवा और गांव की … साहब यहां तो पूरा ज़िन्दगी लॉक डाउन है ?

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@हेमंत शर्मा

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में एक गांव जहां ग्रामीण कहते हैं साहब यहां तो हमारा पूरा जीवन लॉकडाउन जैसा निकल रहा है गांव में विकास नहीं बिजली नहीं है सड़के नहीं है इलाज के लिए अस्पताल नहीं है यही नहीं देश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चों के लिए शिक्षा नहीं गांव में 108 एंबुलेंस डायल हंड्रेड जैसी सुविधाएं भी लोगों को नहीं मिल पाता ग्रामीण छोटी-छोटी समस्याओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो रहे हैं हकीकत उस वक्त उजागर होती है जब हमारी टीम गांव में दाखिल होती है मामला है बिजावर विधानसभा क्षेत्र पन्ना टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच ग्राम पंचायत खरीयनी अंतर्गत ढोडन गांव की जहां लोग आज भी कीड़े मकोड़ों की तरह जिंदगी जीने को मजबूर है .

देखिए पूरी Exclusive स्टोरी RIG24 की स्पेशल कार्यक्रम The लाल10 शो में

घनघोर जंगल और जंगली जानवरों के डर के साए में चट्टानों भारी पहाड़ी से गुजरकर  theलाल10 टीम के मध्यप्रदेश टीम लीडर हेमंत शर्मा उस गांव में दाखिल हो रहे थे इसी बीच देखा गया एक जीप जिसमें अंदर बाहर गड़ी के ऊपर बैठकर लोग गांव जा रहे थे इससे समझा जा सकता है  गांव की परेशानी राहगीरों ने बताया कई ढोड़न, पलकोहा,खरियानी गांव के ग्रामीण इसी रास्ते से ऐसे ही हर रोज जान हथेली पर रखकर निकलते हैं जरूरतों का सामान लेने गांव से लगभग 30 km दूर बमीठा जाते हैं लेकिन इस परेशानी पर कोई ध्यान नहीं दे रहा

RIG24 की टीम ढोड़न गांव पहुंची जहां गांव की बदहाली की तस्वीरे चौंकाने वाली है, शिक्षा स्वास्थ्य बिजली पानी सड़क, केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को नहीं सरकार गांव को शहरों से जोड़ने की बात करते हैं लेकिन ग्रामीण कहते हैं यहां तो हमारा पूरा जीवन ही लॉक डाउन है गांव का विकास नहीं हो पा रहा बच्चो का भविष्य अंधकार में है कई गांव इस घने जंगल के बीचो बीच बसे हैं जो मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं गांव में कई ऐसे विकलांग जिन्हें शासन की ओर से मिलने वाली योजनाओं का लाभ नहीं बुजुर्गो को पेंशन नहीं.

RIG24 की टीम ने गांव की पड़ताल शुरू की तो विकिपीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक ढोड़न गांव में परेशानी की वजह है कैन बेतवा लिंक परियोजना है अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में जब देश की 37 नदियों को आपस में जोड़ने का फैसला लिया गया यह देश की वह परियोजना है जिसे सबसे पहले शुरू होना था उनमे से एक यह भी थी इस परियोजना का मुख्य बाँध पन्ना टाइगर रिजर्व के ढोड़न गाँव में बनना है अटल बिहारी बाजपेई जी के गुजर जाने के बाद देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कैन बेतवा लिंक परियोजना प्रोजेक्ट को पूरा करने का बीड़ा उठाया लेकिन एक लंबे समय बीत जाने के बाद भी कैन बेतवा लिंक परियोजना कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है और ना ही इन गावों का विवस्थपान किया गया यही कारण है ढोड़न खारियानी, पल्कोहा,जैसे कई गांव के ग्रामीणों को केंद्र और प्रदेश सरकार की उन तमाम योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है 

RIG24 की टीम ने ग्राम पंचायत सरपंच गुरुदेव मिश्रा से बात की है सरपंच का कहना है कैन बेतवा लिंक परियोजना लंबे समय से शुरूत की बात केंद्र और प्रदेश सरकार तो कर रही है लेकिन व्यवधान उत्पन्न होने से शुरू नहीं हो पा रहा और मजबूर होकर अब कई ग्रामीण पलायन कर रहे हैं

RIG24 ने इस पूरे मामले को लेकर छतरपुर अपर कलेक्टर आर. डी. एस,अग्निवंशी से बात की तो उन्होंने कहा यह तो शासन स्तर की बात है आपके माध्यम से जानकारी मिली है में अपने वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामले को लाऊंगा 

 अपर कलेक्टर_ आर. डी. एस. अग्निवंशी

  केन बेतवा लिंक परियोजना को लेकर सरकारें प्रयास कर रही है और एक लंबा वक्त बीत गया और कितना समय लगेगा यह बता पाना मुश्किल है इस परियोजना की शुरुआत में समय लगने से ग्रामीण भी शासन की योजनाओं से वंचित हो रहे हैं ऐसे में सरकार को चाहिए जल्द से जल्द पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर बसे ग्रामीणों का व्यवस्थापन कराएं ताकि शासन की उन तमाम योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को मिल सके हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि केन बेतवा लिंक परियोजना को समय लग रहा है ऐसे में बच्चों का भविष्य और ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है ग्रामीणों को कहीं और जल्द शिपफ्ट किया जाना चाहिए

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