Chhatisgarh

बालोद: बेटी ने निभाया बेटे का फर्ज ! पिता की अर्थी को दिया कंधा ! चिता को दी मुखाग्नि !

बालोद: महिलाओं के प्रति सम्मान देने की कवादत शुरू हो चुकी है। समाज ऐसे कई मिशाल को पेश करते रहता है। जो केवल अब एक नजरिया मात्र नहीं रह गया है। ऐसी ही एक मिशाल की ख़बर छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से आई है। जहाँ पिता की मौत पर बेटी ने मुखाग्नि दिया है।यही नहीं अपने पिता कि अर्थी को भी कंधा देते हुए शमशान तक लेकर आई।

दरअसल बालोद जिले के आया ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले भीमकन्हार में एक व्यक्ति की मौत पर उनकी बेटियां द्वारा पिता का अंतिम संस्कार किया गया। ऐसा इस गांव में पहली बार हुआ है। गांव के पंचायत में ही रोजगार सहायक के पद पर काम करने वाली नीलम बाई ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया है। उनके पिता बनवाली राम ठाकुर का बुधवार को बीमारी के चलते आकस्मिक निधन हो गया।

मृतक को कंधा देती बेटी

मृतक की 4 बेटियां हैं। जिनमें पीलेश, उर्मिला बाई, नीलम बाई, लुमेश्वरी बाई शामिल है। नीलम गांव में ही रहती है। साथ ही वह एक अच्छी प्रतिष्ठित नौकरी पेशा है। इसलिए नीलम ने अपने पिता का अंतिम संस्कार स्वयं करने की सोची। ग्रामीणों ने भी उनका साथ दिया। सरपंच पोषण साहू सहित अन्य ग्रामीणों ने रोजगार सहायिका नीलम के इस हौसले को प्रोत्साहित किया।

घर से नीलम गांव के अन्य लोगों के साथ अपने पिता के अर्थी को कंधा देकर मुक्तिधाम जाने के लिए निकली और फिर वहां सभी विधि विधान के साथ पिता के शव को मुखाग्नि दी गई। आत्मा की शांति के लिए संपूर्ण कार्यक्रम 15 अप्रैल को रखा गया है।

इस संबंध में मीडिया के सामने सरपंच पोषण साहू ने बताया कि,

आमतौर पर लोगों की धारणा होती है कि हमारे अगर पुत्र नहीं होंगे। तो बुढ़ापे में सहारा कौन बनेगा? लेकिन यहां बेटियां ही बाप का सहारा थी और जब पिता नहीं रहे तो बेटियों ने खुद आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभाई। जो समाज के लिए भी एक बदलाव का संदेश है।

Back to top button