रायगढ़

पार्षद संजना शर्मा की आत्महत्या में आरोपी पत्रकार के भाई आलोक पांडे ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस! पुलिसिया जांच पर उठाए गंभीर सवाल ! कांग्रेसी नेता और ठेकेदार को बचाने में जुटी रायगढ़ पुलिस! कांग्रेसी सत्ता ने अपनी इज्जत बचाने के लिए बनाया पत्रकार को बलि का बकरा! और भी बहुत कुछ पढ़ें पूरी खबर..

रायगढ़: कांग्रेसी नेत्री और वार्ड क्रमांक 27 की महिला पार्षद संजना शर्मा के द्वारा जहर सेवन कर आत्महत्या कर लेने का मामला सामने आया था। जिसके बाद पुलिस ने मृतिका पार्षद के घर से एक आवेदन पत्र बरामद किया था। जिसे सुसाइड लेटर मानते हुए पुलिस ने वेब पोर्टल के संचालक अमित पांडे को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड में जेल भेज दिया। इस मामले में आज अमित पांडे के भाई आलोक पांडे के द्वारा प्रेस वार्ता रखी गई। जिसमे पुलिस की जांच पर कई सवाल उठाए गए है,जिसके बारे में हम आपको आगे विस्तार से बतलाने वाले है !

अमित पांडे के भाई आलोक पांडे के द्वारा रखी गई प्रेस वार्ता में कही गई बातें-

प्रेस वार्ता में अमित पांडे ने कहा कि प्रेस वार्ता में मैं किसी को बचाने या किसी को फसाने के लिए नहीं आया हूँ, मैं चाहता हूं कि संजना शर्मा को न्याय मिले। चाहे आरोपी कोई भी हो ,आगे इसकी जांच हो, जो भी इसमें आरोपी बनता हो, जिसका आरोप प्रमाणित होता हो उसे न्याय मिलना चाहिए। इसके साथ ही पत्रकार आलोक पांडे ने इस पूरे मामले में पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेता और एक ठेकेदार को बचाने में जुटी पुलिस

पत्रकार अमित पांडे के बड़े भाई आलोक पांडे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दैनिक भास्कर की खबर का हवाला देते हुए बताया कि उस मामले में दैनिक भास्कर द्वारा मृतिका संजना शर्मा के साथ काम करने वाले लोगों का बयान चलाया है। जिसमें संजना शर्मा के एक कांग्रेस नेता और एक ठेकेदार के साथ निजी संबंध और मनमुटाव की बातें बताई गई हैं। जिसे लेकर वह काफी व्यथित रहती थी। घटना के कुछ दिन पहले इनका विवाद भी संजना शर्मा के साथ हुआ था। पुलिस द्वारा अभी तक इस मामले में इस एंगल पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसके साथ ही उन्होंने तीन स्थानों का हवाला देते हुए कहा कि अगर वहां की सीसीटीवी फुटेज की सही तरीके से जांच की जाए, तो इस मामले से पर्दा हट जाएगा। मरने से कुछ दिन पहले उन लोगों के द्वारा उसके साथ विवाद किया गया था।

पीएम रिपोर्ट पर सवाल

आलोक पांडे ने कहा कि संजना शर्मा की जो शार्ट पीएम रिपोर्ट है, उसे अभी तक किसी को नहीं बताया गया है। ना तो मीडिया को बताया गया है ना किसी को बताया गया है। पुलिस यह बोलती है कि सेंसिटिव मामला है। पुलिस बताने से गुरेज करती हैं। पीएम रिपोर्ट में ऐसा क्या चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। जिसे पुलिस मीडिया में बतलाना नहीं चाहती हैं। इतने बड़े मामले में जहां एक कांग्रेसी नेत्री के आत्महत्या पर एक पत्रकार को घसीटा जा रहा है। उस मामले में कहीं भी पुलिस द्वारा यह नहीं बताया गया कि उसकी मौत कब हुई ? कौन से जहर खाने से उसकी मौत हुई और शार्ट रिपोर्ट में ऐसा क्या है… जो सार्वजनिक करने से पुलिस कतरा रही है।

पुलिस की भूमिका पर संदेह-

पुलिस ने सुसाइड नोट को आधार बनाया और अमित को पूछताछ के लिए लेकर गई। और बहुत जल्दी बाजी में धारा 306 कायम भी कर दिया गया। पुलिस जिसे सुसाइडल नोट मान रही है। उसके राइटिंग का परीक्षण भी नहीं कराया गया। पुलिस की भूमिका पर मुझे संदेह है।

कॉल रिकॉर्डिंग अभी तक सामने नही आई

पुलिस ने इस मामले में संजना शर्मा के कॉल रिकॉर्ड की डिटेल घटना के अगले दिन ही मंगवा ली। कॉल डिटेल के बारे में भी पुलिस ने रहस्यमई चुप्पी साध रखी है। आलोक का कहना है कि संजना शर्मा की एक निगम ठेकेदार के साथ 15 सौ से अधिक बार बातचीत हुई है। इस पर भी पुलिस पर्दा डाल रही है। पत्रकार अमित पांडे के भाई आलोक पांडे ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में संजना शर्मा से अमित की बात हुई है जिसमें एक बार किसी खबर के विषय में वर्जन लेने के लिए और एक बार जब लंबी बात हुई तब उसने अपनी राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में उनसे 22 मिनट तक चर्चा की कहीं भी उन्होंने आत्महत्या जैसी या हताहत होने जैसी बात नहीं कही है। उसकी कॉल रिकॉर्डिंग भी उन्होंने मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की।

प्रार्थना पत्र को पुलिस मान रही है सुसाइड नोट

महीना भर पहले लिखें एक आधे अधूरे प्रार्थना पत्र को पुलिस सुसाइड नोट मान रही है। जो उनके द्वारा लिखा भी नहीं गया है।

कांग्रेसी दबाव में रायगढ़ पुलिस

आलोक ने कहा कि अगले डेढ़ साल के भीतर कांग्रेस में चुनाव होने वाले हैं और कांग्रेस की ही एक पार्षद तो दो बार चुनाव जीत चुकी है। उसकी आत्महत्या में एक कांग्रेस नेता और कांग्रेस समर्थित ठेकेदार का नाम सामने आ रहा है। कांग्रेस अपनी इज्जत बचाने के लिए पुलिस पर दबाव डाल रही है। जांच पूरी तरह से एकतरफा एक पत्रकार को फसाने के लिए किया जा रहा है।

न्यायिक जांच की मांग

इस मामले में आलोक पांडे ने कहा है कि मृतका संजना शर्मा को न्याय मिलना चाहिए। उसके दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। चाहे वह कोई भी हो। पुलिस को इस मामले की हर एक एंगल पर निष्पक्ष रूप से जांच करनी चाहिए थी, मगर वह नहीं कर रही है। इसलिए संजना शर्मा को न्याय दिलाने के लिए वे इस मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हैं। सही जांच के पश्चात सही आरोपी चाहे कोई भी हो! चाहे वह मेरा भाई हो या कोई भी… उसे सजा मिलनी चाहिए ! संजना शर्मा को न्याय मिलना चाहिए।

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