Chhatisgarh

RIG Fact Check : छत्तीसगढ़ / नहीं देखे होंगे ऐसे अनोखे भक्त ! माता के इस मंदिर में आते हैं जंगली भालू… आरती में होते हैं शामिल ! प्रसाद खाकर लौट जाते है वापस ! देखें वीडियो… पढ़ें- क्या है पूरी कहानी ?

महासमुंद। आप लोगों ने भी यह जरूर सुना होगा कि महासमुंद जिले के मूंगई माता मंदिर में शाम होते ही भालू दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं और प्रसाद खा कर पुनः जंगल की ओर लौट जाते हैं। जिसकी सच्चाई जानने के लिए RIG24 की टीम ने पड़ताल शुरू की, जहां मंदिर परिसर में जाने पर पता चला कि हकीकत में भालू का एक परिवार मंदिर परिसर में शाम के वक्त आता है।

बडे चाव से फ्रूटी पी रहे भालू

जब हम कल शाम 5:22 बजे मंदिर परिसर में पहुंचे तो वहां लोगों की भीड़ लगी हुई थी। लोगों में भालू को देखकर उसके साथ खुद की तस्वीर कैद करने के लिए होड़ मची हुई थी। वहां आने वाले श्रद्धालु अपने साथ पेय पदार्थ फ्रूटी लेकर आ रहे थे जिसे खूब दिलचस्पी के साथ भालू पी रहे थे। श्रद्धालु मंदिर परिसर में आकर यह भूल जाते है कि ये भी वही भालू है जो घने जंगलों में रहते हैं और लोगों को देखकर आक्रामक हो जाते है, परंतु इस जगह पर लोगों में डर देखने को नहीं मिल रहा था, मानो ऐसा लग रहा था कि हिंसक भालू और लोगों के बीच काफी पुराना संबंध हो।

जिला मुख्यालय महासमुंद से 35 किमी दूर पटेवा और झलप के बीच एन एच-53 स्थित मुंगईमाता पहाड़ी के नीचे रोज भालू का एक परिवार आता है। भालुओं की अठखेलियां और यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के हाथ से बिस्कुट, नारियल आदि खाना मंदिर के सामने बिक रहे फ्रूटी को लेकर श्रद्धालुओं के द्वारा भालुओं को पिलाना अब एक आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। बागबाहरा के पास घुंचापाली पहाड़ी स्थित चंडी माता मंदिर में भालुओं के रोज आने का सिलसिला लगभग 10 वर्ष पुराना है।

मंदिर परिसर

मंदिर परिसर के सामने के दुकानदार ने बताया कि कभी-कभी एक भी भालू मंदिर परिसर में नहीं आते हैं तो कई दिन ऐसा भी होता है कि कभी पांच तो कभी तीन भालू ही देखने को मिलते हैं।कल जब हम मुंगई माता पहाड़ी के नीचे नेशनल हाईवे किनारे पहुंचे तो वहां भालू को देखने लोगों की भीड़ इकठ्ठी थी जिसे देखकर यह लग रहा था कि यहां इंसान और जंगली जानवर के बीच द्वंद नहीं बल्कि स्नेह है।

मंदिर परिसर पर भालुओं के साथ

लोगों ने बताया कि गर्मी के दिनों में जहां एक ओर भालू हिंसक होकर अनेक स्थानों पर जंगल जाने वाले महिला-पुरुषों पर जानलेवा हमला करते हैं। कई जगहों से यह बातें भी सामने आती है कि भालू के हमले से लोगों की मौत हो गई है,इसके विपरीत यहां आने वाले भालू अपने और बच्चों की भोजन-पानी का इंतजाम होने से मानव पर हमला नहीं करके बड़े ही चाव से उनके द्वारा दिया जाने वाला खाद्य सामग्री खाते हैं। यहां रोज शाम को आने वाले ये भालू आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

देखें वीडियो

अगर आप भी इस सड़क से गुजर रहे हैं तो शाम के वक्त मंदिर परिसर में आने वाले भालुओं का एक झुंड को देख सकते हैं, तो समय निकालकर इस जगह पर पहुंच कर माता रानी का दर्शन करने के साथ ही साथ इंसान और जंगली जानवरों के बीच का संबंध जरूर देख लें।

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