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सोसायटी में रहते है तो मेंबर फी पर लगेगा 2017 से जोड़कर GST ! 1 जनवरी से सरकार ला रही नियम

क्लब और एसोसिएशन मेंबर से लिए जाने वाले चार्ज पर जीएसटी वसूलेंगे. यह वसूली 1 जुलाई 2017 की तारीख से की जाएगी. सरकार इसके लिए नया नियम लाने जा रही है. हालांकि एक्सपर्ट इस नियम से ऐतराज जता रहे हैं और उनका कहना है कि अगर यह नियम लागू होता है तो सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और एएआर के आदेशों का उल्लंघन होगा.

एक्सपर्ट कहते हैं कि यह मामला कोर्ट-कचहरी में फंस सकता है. अगर जीएसटी का यह नियम लागू होता है तो क्लब और एसोसिएशन को पूरा खाता-बही मेंटेन करना होगा. यह उनके लिए बेवजह का काम बढ़ने वाला हो सकता है.

क्या है नया नियम

बिजनेस लाइन‘ की एक रिपोर्ट बताती है कि वित्त मंत्रालय ने इस नियम के बाबत जीएसटी कानून की धारा 7 में संशोधन को लागू करने के लिए 1 जनवरी की तारीख अधिसूचित की है. इस संशोधन में जीएसटी का एक नया क्लॉज जोड़ा गया है. इसमें कहा गया है कि ‘एक्प्रेसन सप्लाई’ भी किसी व्यक्ति के द्वारा की गई गतिविधि या ट्रांजेक्शन में गिने जाएंगे.

इस नियम में पहले से इंडिविडुअल, क्लब के मेंबर या एसोसिएशन के मेंबर या उससे जुड़ी संस्थाएं शामिल हैं. इनके द्वारा कैश या पहले का कोई पेमेंट किया जाता है तो नया नियम लागू होगा. धारा 7 का यह नया क्लॉज 1 जुलाई, 2017 से लागू हो गया है. यानी उस तारीख से जीएसटी जोड़ कर लिया जाएगा.

नियम से क्या बदलेगा

इस नए नियम का अर्थ हुआ कि क्लब, एसोसिएशन या सोसायटी और उसके मेंबर को दो अलग-अलग व्यक्ति या संस्था माना जाएगा. इन दोनों के बीच ट्रांजेक्शन होता है तो उस पर टैक्स लगेगा. पहले ये दोनों एक माने जाते थे, इसलिए इनके बीच ट्रांजेक्शन को टैक्स के दायरे में नहीं रखा गया था. अब अगर आप किसी सोसायटी में रहते हैं, किसी क्लब के मेंबर हैं तो उसके लिए जो चार्ज चुकाते हैं, उस पर टैक्स लगेगा.

इस तरह का एक मामला सुप्रीम कोर्ट में गया था. यह केस कलकत्ता स्पोर्ट्स क्लब से जुड़ा था. सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के टैक्स को लेकर राहत दी थी. रांची क्लब से जुड़ा एक मामला झारखंड हाई कोर्ट में गया था. बेंगलुरु का एक मामला अथॉरिटीज फॉर एडवांस रूलिंग या AAR में गया था. इन सभी केस में टैक्स को लेकर राहत दी गई थी.

अदालतों में गया है मामला

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला सर्विस टैक्स के टाइम में उठाया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने ‘म्यूचुअलिटी’ के नियम के आधार पर कहा था कि अगर मेंबर न रहें तो क्लब नहीं होगा या क्लब नहीं होंगे तो मेंबर भी नहीं होंगे. एक दूसरे के बिना किसी का अस्तित्व नहीं. लिहाजा क्लब या एसोसिएशन को मेंबर से चार्ज वसूलने की जरूरत नहीं. उस वक्त सर्विस टैक्स का नियम था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने सर्विस टैक्स नहीं वसूलने का आदेश दिया. मेंबर से किसी भी प्रकार के सर्विस टैक्स न वसूलने का आदेश आया.

चूंकि इस मामले में साल 2017 से जोड़कर टैक्स वसूलना है, इसलिए माना जा रहा है कि केस कोर्ट तक जाएगा. फिर पुराने सर्विस टैक्स की तरह मामला अदालतों तक पहुंचेगा. मामला लगभग 4 साल से भी पुराना होने जा रहा है. ऐसे में क्लब और एसोसिएशन को उस समय से जीएसटी जोड़कर लेने में कई अड़चनें आ सकती हैं.

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