मध्यप्रदेश/ बक्सवाहा जंगल के नीचे देश की सबसे बड़े हीरा खदान मिलने का दावा.! 2.15 लाख पेड़ो को काटने की तैयारी शुरू..!! क्या हीरे की कीमत ऑक्सीजन से ज्यादा हैं..? पढ़े पूरी खबर..!!

मध्यप्रदेश/ वैसे तो मध्य प्रदेश के पन्ना जिले को हीरों की खान कहा जाता है। लेकिन पन्ना जिले से सटे छतरपुर जिले के बक्सवाहा के जंगलों में देश की सबसे बड़ी हीरों की खदान मिलने का दावा किया जा रहा है। इन जंगलों में 3.42 करोड़ कैरट के हीरे दबे होने का अनुमान लगाया गया है।

बक्सवाहा की हीरे की खदानों को पन्ना से 15 गुना बड़ा बताया जा रहा है। लेकिन इस खजाने को पाने के लिए हमें 382.131 हेक्टेयर में फैले जंगल की बलि देनी होगी।

20 साल से हो रहा है सर्वे।

छतरपुर के बक्सवाहा में बंदर डायमंड प्रोजेक्ट के तहत 20 साल पहले यहाँ सर्वे शुरू हुआ था। दो साल पहले प्रदेश सरकार ने इस जंगल की नीलामी की थी। इस नीलामी के तहत आदित्य बिड़ला समूह की एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को यहाँ खनन का ठेका दिया गया। हीरा भण्डार वाली लगभग 63 हेक्टेयर ज़मीन इस कंपनी को 50 साल के लिए लीज पर दी गयी है ।

आदित्य बिड़ला समूह से पहले ऑस्ट्रेलिया की रिओटिन्टो को यहाँ खनन का ठेका दिया जाना था ,पर किसी कारणवश उस कंपनी के मन करने के बाद यह एस्सेल माइनिंग को दिया गया।

ज़मीन की खुदाई के लिए होगी पेड़ों की कटाई।

हीरों के खनन के लिए अब जंगल की खुदाई की जाएगी, जिसके लिए पेड़ काटे जायेंगे। इसके लिए वन विभाग ने काटने वाले पेड़ों की गिनती कर ली है जो करीब 2,15,875 हैं। इसमें सागौन, जामुन, केम, बहेड़ा, पीपल, तेन्दु, अर्जुन, आदि के पेड़ हैं।

पेड़ों के अलावा इस खनन से वन्य जीवों पर भी असर पड़ेगा। इस जंगल में चौसिंघा, तेंदुआ, बन्दर,चिंकारा,भालू, गोयरे आदि की प्रजातियां रहती हैं। इस खुदाई से आस पास के गाओं वालों की जीविका पर भी असर पड़ेगा।

पानी की है कमी।

बक्सवाहा जंगल  क्षेत्र में पड़ता है। इस क्षेत्र में पानी की वैसे भी कमी है , और खनन के लिए भी पानी की आवश्यकता होती है। इस वजह से क्षेत्रवासी और भी ज्यादा चिंतित हैं और इस प्रोजेक्ट का पुरजोर विरोध कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दी गई चुनौती:-

मप्र हाईकोर्ट में छतरपुर जिले के बक्सवाहा जंगल में हीरा खदान के लिए लगभग 2.15 लाख पेड़ काटने की अनुमति को चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बैंच ने केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और आदित्य बिड़ला समूह की एस्सेल माइनिंग कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। मामले की अगली सुनवाई 21 जून को निर्धारित की गई है।

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