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रायगढ़: त्रि-स्तरीय पंचायत आम/उप निर्वाचन पंचायत को लेकर आदर्श आचार संहिता जारी! अवकाश, हथियार, लाउडस्पीकर और प्रत्याशियों को लेकर गाइडलाइन जारी.. जाने डिटेल में

रायगढ़, 28 दिसम्बर2021/ छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग, रायपुर के द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत आम/उप निर्वाचन 2021-22 हेतु निर्वाचन कार्यक्रम 24 दिसम्बर 2021 को जारी किया जा चुका है। निर्वाचन कार्यक्रम जारी किए जाने के साथ ही जिले के संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता प्रभावशील हो गयी है।

1.अवकाश

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, रायगढ़ ने जिले में त्रिस्तरीय पंचायत उप निर्वाचन 2021-22 की प्रक्रिया समाप्त होने तक सभी शासकीय/अद्र्धशासकीय कार्यालयों तथा राज्य शासन के उपक्रमों के अधिकारियों/कर्मचारियों के जिन अधिकारियों की ड्यूटी निर्वाचन कार्य में लगायी गयी है, वह सभी अधिकारी-कर्मचारी संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी की अनुमति के बिना अवकाश पर प्रस्थान नहीं करेंगे तथा मुख्यालय परित्याग भी नहीं करेंगे। निर्वाचन कार्य में संलग्न किसी अधिकारी/कर्मचारी द्वारा बिना अनुमति के अवकाश पर प्रस्थान करने एवं बिना अनुमति के मुख्यालय परित्याग करने पर संबंधित जिला प्रमुख/कार्यालय प्रमुख जिम्मेदार होंगे।

2. आदर्श आचरण संहिता प्रभावशील

संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों/ ग्रामों में लोक-परिशांति बनाये रखने तथा निर्वाचन प्रक्रिया एवं मतदान, निर्विघ्न, निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने हेतु अन्य उपायों के साथ-साथ प्रतिबन्धात्मक उपाय किया जाना आवश्यक हो गया हैं।
कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी भीम सिंह ने दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 144 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन सभी क्षेत्रों हेतु जहाँ त्रिस्तरीय पंचायत उप निर्वाचन होना है, प्रतिबन्धात्मक निषेधाज्ञा जारी किया है।

जारी आदेश के तहत रायगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों की सीमा क्षेत्र के अंदर कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार के घातक अस्त्र-शस्त्र यथा बन्दूक, राईफल, भाला, बल्लम, बरछा, लाठी एवं अन्य प्रकार के घातक हथियार तथा विस्फोटक सामग्री लेकर किसी भी सार्वजनिक स्थान, आम सडक, रास्ता सार्वजनिक सभाओं एवं अन्य स्थानों पर नहीं चलेगा। कोई भी राजनैतिक दल या अभ्यर्थी सशस्त्र जुलूस नहीं निकालेगा और न ही आपत्तिजनक पोस्टर वितरित करेगा। यह आदेश उन शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा, जिन्हें अपने कार्य के सम्पादन के लिये लाठी या शस्त्र रखना आवश्यक है। यह आदेश उन शासकीय कर्मचारियों पर भी लागू नहीं होगा, जिन्हें चुनाव व मतदान के दौरान कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये पुलिस अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह आदेश उन व्यक्तियों पर भी लागू नहीं होगा, जिन्हें शारीरिक दुर्बलता, वृद्धावस्था तथा लंगडापन होने के कारण सहारे के रूप में लाठी रखना आवश्यक होता है। इस आदेश का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति/दल भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दण्डनीय होगा। निर्वाचन कार्य आसन्न एवं अति आवश्यक प्रकृति का कार्य होने से परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए इस आदेश के संबंध में सर्व संबंधित को सूचना पत्र जारी कर सुनवाई किया जाना सम्यक रूप से सम्भव नहीं है, अत: यह आदेश एकपक्षीय रूप से पारित किया जाता है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा तथा निर्वाचन प्रक्रिया समाप्त होने तक संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों/ ग्रामों में, जहां त्रिस्तरीय पंचायत उप निर्वाचन होना है, प्रभावशील होगा।

3. निर्वाचन क्षेत्रों में रात्रि 10 से प्रात: 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर प्रतिबंध

निर्वाचन के दौरान सभी अभ्यर्थियों तथा उनसे सहानुभूति रखने वाले व्यक्तियों द्वारा अपने दल के प्रचार-प्रसार के लिये ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। इन ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग न केवल स्थायी मंच से होता है, वरन वाहनों यथा जीप, कार, ट्रक, टेम्पो, तिपहिया वाहनों, स्कूटर सायकल रिक्शा, आदि पर घूम-घूम कर या स्थिर रख कर भी होता है। ये वाहन सभी सड़कों, गलियों, उप-गलियों पर चलते हैं और बस्तियों, मोहल्लों, कालोनियों से बहुत ऊची आवाज पर लाउडस्पीकर से प्रसारण करते हुए जाते है। लाउडस्पीकर के ऊंची आवाज में प्रयोग से विद्यार्थी वर्ग गंभीर रूप से अशान्त हो जाते हैं, क्योंकि इससे उनका अध्ययन बाधित होता है। लाउडस्पीकर पर अबाध रूप से किये जाने वाले शोर-गुल से वृद्ध, दुर्बल बीमार व्यक्ति को, चाहे वह किसी चिकित्सालय, संस्था घर में हो, बहुत परेशानी होती है।
निर्वाचन अवधि में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग को पूर्ण रूप से रोका नहीं जा सकता है, क्योंकि ध्वनि विस्तारक यंत्र निर्वाचन प्रचार-प्रसार एवं जन समूह के बीच अपने विचार व्यक्त करने के साधनों में से एक साधन है। लेकिन उसके साथ-साथ विषम समय में विषम स्थान पर ध्वनि यंत्र के अविवेकपूर्ण एवं ऊंचे स्वरों में अवैधानिक प्रयोग, जिससे जनमानस की शांति एवं स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता हो, की अनुमति दिया जाना उचित नहीं है।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों के प्रकाश में सभी पहलुओं पर विचार करने के उपरांत कलेक्टर श्री भीम सिंह ने छ.ग.कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 195 की धारा 04 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिले के उन क्षेत्रों में जो संबंधित जनपद/ ग्राम पंचायत/ पंचायत वार्ड की सीमा के अंतर्गत आते हैं, रात्रि 10 बजे से प्रात: 06 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग किया जाना अथवा करवाया जाना पूर्ण से निषिद्ध किया है।

ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग चुनाव प्रचार के लिये वाहनों पर एवं चुनावी सभाओं में प्रात: 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक ही किया जा सकेगा। किन्तु ऐसे ध्वनि विस्तारक यंत्र साधारण किस्म के होंगे एवं मध्यम आवाज में ही प्रयोग किये जायेंगे, लोक शांति को देखते हुए लम्बे चोंगे वाले लाउडस्पीकरों का प्रयोग पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाता है। वाहनों पर एवं चुनावी सभाओं में एक से अधिक लाउडस्पीकर, समूहों में लगाया जाना भी प्रतिबंधित किया जाता है। चुनावी सभाओं एवं चुनाव प्रचार करने के लिये वाहनों में ध्वनि विस्तारक यंत्र लगाने के लिये तहसील मुख्यालय में तहसीलदार एवं कार्यपालक दण्डाधिकारी तथा उप तहसील स्तर पर अतिरिक्त तहसीलदार/नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी से लिखित पूर्वानुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रात: 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग सक्षम अधिकारी की अनुमति प्राप्त कर सामान्यत: किया जा सकता है, परन्तु शैक्षणिक संस्थाओं, चिकित्सालयों नर्सिंग होम न्यायालय परिसर, शासकीय कार्यालय, छात्रावास, नगरपालिका परिषद, जनपद पंचायत एवं अन्य स्थानीय निकाय कार्यालय, बंैक, पोस्ट आफिस, दूरभाष केन्द्र आदि से 200 मीटर की दूरी के भीतर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग सामान्य स्थिति में भी पूर्णत: प्रतिबंधित किया जाता है। यह प्रतिबंध 24 दिसम्बर 2021 से चुनाव प्रक्रिया समापन तिथि तक जिले के संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा में प्रभावशील रहेगा।

– अनुमति

प्रभावशील आदर्श आचरण संहिता के दौरान कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 के अंतर्गत लाउडस्पीकर के उपयोग के संबंध में जारी किए गए प्रतिबंधात्मक आदेश के संदर्भ में चुनाव प्रचार सभाओं के आयोजन तथा इन सभाओं में लाउड स्पीकर के उपयोग, प्रचार वाहनों में लाउडस्पीकर के उपयोग, जुलूस के मार्ग निर्धारण, जुलूस निकालने की अनुमति आदि के लिए संबंधित तहसीलदार को सक्षम अधिकारी नियुक्त किया है। नियुक्त सक्षम अधिकारी, अपने कार्यालय में अनुमति हेतु प्राप्त होने वाले आवेदन पत्रों की प्राप्ति पंजीबद्ध करेंगे तथा कोविड-19 के संबंध में भारत सरकार, राज्य शासन, जिला दण्डाधिकारी रायगढ़ एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नियमों का पालन करते हुए सशर्त अनुमति जारी करेंगे।

4. अभ्यर्थियों द्वारा प्रचार के संबंध में निर्देश जारी

त्रिस्तरीय पंचायत उप निर्वाचन 2021-22 के दौरान आदर्श आचरण संहिता प्रभावशील रहने की स्थिति में अभ्यर्थियों द्वारा चुनाव प्रचार करने के लिए शासकीय/अशासकीय भवनों पर नारे लिखे जाने, विद्युत एवं टेलीफोन के खम्भों पर चुनाव प्रचार से संबंधित झंडिया लगाये जाने तथा अन्य प्रकार के शासकीय/अशासकीय संपत्ति को विरूपित करने कार्यवाही संभावित है, जिस पर रोक लगाया जाना अत्यंत आवश्यक है।

छत्तीसगढ़ संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1994 की धारा 03 में निहित प्रावधानुसार कोई भी व्यक्ति, जो संपत्ति के स्वामी की लिखित अनुज्ञा के बिना सार्वजनिक दृष्टि में आने वाले किसी संपत्ति को स्याही, खडिया, रंग या किसी अन्य पदार्थ से लिखकर या चिन्हित कर के उसे विरूपित करेगा, वह जुर्माने से जो एक हजार रुपया तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा। इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय  कोई भी अपराध संज्ञेय होगा।
छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग, रायपुर के द्वारा जारी निर्देशानुसार संपत्ति विरूपण के संदर्भ में राज्य में प्रचलित विधि के प्रावधानों के अनुसार कठोर कार्यवाही किया जाना है। छत्तीसगढ़ संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1994 के प्रावधानों का कठोरतापूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करते हुए प्रभावी कार्यवाही की जाये। संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान यदि निर्वाचन लडऩे वाले विभिन्न अभ्यर्थियों द्वारा शासकीय व अशासकीय भवनों की दीवारों पर किसी भी प्रकार के नारे लिखकर विकृत किया जाता है, तो ऐसे कृत्यों के निवारण के लिए एक टीम तत्काल प्रभाव से गठित की जाये। इस टीम में जनपद पंचायत, लोक निर्माण विभाग तथा राजस्व विभाग (नायब तहसीलदार/राजस्व निरीक्षक)एवं पुलिस विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों को सम्मिलित किया जाये। आवश्यकतानुसार पर्याप्त संख्या में टीम गठित कर, जिला स्थानीय निर्वाचन कार्यालय रायगढ़ को अवगत कराया जाये। टीम गठित करने का कार्य संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)द्वारा किया जाये। गठित टीम संबंधित क्षेत्रों में सघन भ्रमण कर विरूपित संपत्ति विरूपण करने वाले के व्यय पर पूर्ण स्वरूप में लाएगी तथा टीम द्वारा संपत्ति विरूपण करने वाले तत्वों के विरूद्ध अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करायी जाएगी।

यदि किसी चुनाव लडऩे वाले अभ्यर्थी द्वारा निजी संपत्ति को बिना उसके स्वामी की लिखित सहमति के विरूपित किया जाता है, तो निजी संपत्ति के स्वामी द्वारा संबंधित थाने में सूचना दर्ज कराने के बाद, गठित टीम निजी संपत्ति को विरूप्ति होने से बचाने की कार्यवाही करेगी एवं संबंधित थाना प्रभारी द्वारा प्रदत्त सूचना रिपोर्ट पर विधिवत जांच कर सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया जाएगा। इसी प्रकार किसी धार्मिक स्थल का उपयोग चुनाव प्रचार-प्रसार के लिए नहीं किया जाएगा।

सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)अपने-अपने क्षेत्र में संपत्ति विरूपण की रोकथाम एवं प्राप्त शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही हेतु दल गठित करेंगे। संबंधित टीम शिकायत या उन्हें प्राप्त संपत्ति विरूपण के प्रकरणों को पृथक पंजी में दर्ज करेगी एवं संपत्ति की फोटोग्राफी/विडियोग्राफी करायेगी। संबंधित थाना प्रभारी द्वारा संपत्ति विरूपण से संबंधित प्राप्त शिकायतों पर तत्परतापूर्वक कार्यवाही की जाएगी।

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