रायगढ़/ डॉक्टर, इंजीनियर और कंपाउंडर द्वारा आदिवासी महिला से जमीन हड़पने के सनसनीखेज मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश एट्रोसिटी रायगढ़ ने दिया फैसला.. आरोपी इंजीनियर की अग्रिम जमानत खारिज!

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रायगढ़। आयुर्वेदिक डॉक्टर, विद्युत सब इंजीनियर और कंपाउंडर द्वारा मिलकर एक आदिवासी महिला से जमीन हड़पने के सनसनीखेज मामले में आरोपियों से एक आरोपी की अग्रिम जमानत पर अदालत का फैसला आ गया है। जज गिरजा देवी मेरावी विशेष सत्र न्यायाधीश एट्रोसिटी रायगढ़ ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी आमिर उल्लाह खान की अग्रिम जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी है।

आरोपी आमिर उल्लाह खान रायगढ़ विद्युत विभाग में उप इंजीनियर है। अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद आरोपी इंजीनियर पर अब गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है। पीड़ित आदिवासी महिला की तरफ से सीनियर एडवोकेट अशोक मिश्रा एवं एडवोकेट आशीष मिश्रा द्वारा अदालत में पैरवी की गई थी।

अदालत ने पीड़ित पक्ष को भी बुलाया..

आपको बता दे कि आरोपी इंजीनियर आमिर उल्लाह खान अग्रिम जमानत पर अदालत द्वारा पीड़ित पक्ष को भी नोटिस कर सूचित किया गया था। पीड़िता की तरफ से सीनियर एडवोकेट अशोक मिश्रा एवं एडवोकेट आशीष मिश्रा के द्वारा मामले की गंभीरता को मजबूती से अदालत के समक्ष पेश किया गया और उनकी अग्रिम जमानत खारिज करने की मांग की गई। जज गिरजा देवी मेरावी विशेष सत्र न्यायाधीश एट्रोसिटी रायगढ़ पीड़ित पक्ष की दलीलें और पुलिस द्वारा प्रस्तुत केस डायरी को देखते हुए इस मामले को गंभीर माना। इसके अलावा अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम 18 के अनुसार इस तरह के गंभीर मामले में अग्रिम जमानत का प्रावधान ना होने के कारण आरोपी की अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया गया। जमानत रद्द होने के बाद अब आरोपियों की जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है।

क्या था मामला..

आपको बता दें कि वर्ष 2012 में धर्मजयगढ़ के एक छोटे से गांव खम्हार में रहने वाली आदिवासी महिला चारमती की धर्मजयगढ़ में ही तुर्रापारा में 18381 स्क्वायर फुट की बेशकीमती जमीन थी। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ खुर्शीद खान और उनके भाई नूर उल्लाह खान, अमीर उल्लाह खान द्वारा पीड़ित महिला से जमीन की फौती दर्ज कराने के नाम पर कोरे स्टांप पेपर पर उसके अंगूठे का निशान ले लिया गया। इस कोरे स्टाम्प पर आरोपी पक्ष ने अपने कंपाउंडर मृणाल मल्लिक को पीड़ित महिला और उसके सह खातेदार का आम मुख्तियार बना दिया। इसके बाद सारी जमीन डॉक्टर ने अपने और अपने भाई के नाम रजिस्ट्री करवा कर हड़प ली।

महिला द्वारा इनके खिलाफ कई जगह 9 साल तक चक्कर काटने के बाद न्याय के लिए अदालत की शरण में आना पड़ा। अदालत में पीड़िता की तरफ से सीनियर एडवोकेट अशोक मिश्रा के निर्देशन में एडवोकेट आशीष मिश्रा द्वारा मुकदमा किया गया था। 4 माह में ही न्यायालय के आदेश के बाद डॉ खुर्शीद खान, उनके भाई नूर उल्लाह खान, अमीर उल्लाह खान और कंपाउंडर मृणाल मल्लिक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120B, 294, 506, एट्रोसिटी एक्ट 3(1) (5), और 3 (1) 10 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

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