निगम कमिश्नर के ट्रांसफर के साथ ही दब गया करोड़ो का टॉयलेट-स्कैम..? अब तक नहीं पहुँची कलेक्टर के पास घोटालेबाजों की लिस्ट..? अब और कितना इंतज़ार..? कब होगी F.I.R..? क्या खेल खत्म या उम्मीद अब भी बरकरार..? पढ़े पूरी खबर..

रायगढ़ 12 जून। रायगढ़ नगर निगम घोटालों के कारण अखबारों की सुर्खियों में रहा है। इसी प्रकार करोड़ो का शौचालय घोटाला भी वर्षों से पब्लिक के चर्चा में शामिल है और अखबारों की सुर्खियों में हमेशा बनी रही है। डीएम भीम सिंह ने कुछ दिनों पहले शौचालय घोटाला के जिन्न को बोतल से बाहर निकाला था तो रायगढ़ के नागरिकों को लगा था की अबकी बार इंसाफ होगा। लगा था कि जनता के पैसे का लूट खसोट मचाने वाले ठेकेदारों, संलिप्त जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों पर डीएम भीमसिंह कड़ी कार्यवाही करेंगे लेकिन निगम कमिश्नर आशुतोष पांडे के जाने के बाद इस मामले को दबा दिए जाने की चर्चा शहर की गलियों में हो रही है।

मामला फिर से गया ठंडे बस्ते में

नगर निगम में बहुचर्चित शौचालय घोटाले की फाइल ओपन तो हो गई लेकिन अभी तक जिम्मेदार तय नहीं किए जा सके हैं। कलेक्टर भीम सिंह ने पूर्व कमिश्नर आशुतोष पांडे से पूरी रिपोर्ट और संलिप्त लोगों के नाम मांगे थे इसलिए वे संलिप्त लोगों की रिपोर्ट तैयार कर रहे थे लेकिन बीच में ही आयुक्त आशुतोष पांडे का तबादला होने से मामला थोड़ा ठंडा हो गया है। नगर निगम में ठेकेदारों और जनप्रतिनिधियों के गठजोड़ से शौचालय घोटाले को अंजाम दिया गया है। इसमें निगम की प्रशासनिक मशीनरी ने अहम भूमिका निभाई है। सारे नियम कायदे ताक पर रखकर ठेकेदारों को करीब साढ़े 6 हजार शौचालयों का ठेका बांट दिया गया था। गरीबों के मकानों में बनने वाले टॉयलेट का पैसा गबन कर लिया गया बिना टॉयलेट बनाए पुराने शौचालय को नया बताकर भी राशि आहरित कर ली है।

अब तक कलेक्टर को नहीं भेजी गई है संलिप्त लोगों की लिस्ट

दो साल पहले हुए जांच के बाद रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। तब कार्यवाही को रोक दिया गया था अब कलेक्टर ने एक बार फिर इसके जिम्मेदारों की जानकारी मांगी है। पूर्व निगम आयुक्त आशुतोष पांडे को रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों और ठेकेदारों के जानकारी मांगी थी। आयुक्त ने निगम को रिपोर्ट तैयार करने को कहा था लेकिन अभी तक निगम से रिपोर्ट बनाकर नहीं भेजी जा सकी है। मामले में करीब 11 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। कई ठेकेदारों ने बिना काम किए लाखों रुपए एक झटके में कमा लिया। इसमें जनप्रतिनिधियों की बड़ी भूमिका रही।

जांच करने वाले भाजपा कांग्रेस के पार्षद भी चद्दर ओढ़ कर पी रहें हैं घी, जुबान पर नहीं है आवाज

एक समय था जब शौचालय घोटाले का खुलासा करने के लिए भाजपा – कांग्रेसी पार्षदों का दल घर-घर जाकर जांच करता था। इसके आधार पर शिकायत भी की गई, लेकिन अब वहीं पार्षद खामोशी की चादर ओढ़ कर सो गए हैं। जांच पूरी होने के बाद कार्यवाही करने के बजाय मामले को दबाया गया, करोड़ो रुपए की बंदरबांट की गई। अखबारों में भाजपा व कांग्रेस के नेता विज्ञप्ति- विज्ञप्ति खेल रहे हैं लेकिन करोड़ों रुपए के शौचालय घोटाले में संलिप्त लोगों का नाम सामने लाने के लिए यह लोग निष्क्रिय हैं। इनकी भूमिकाओं पर भी पब्लिक सवाल उठा रही है। सत्ताधारी कांग्रेस दल के बड़े जनप्रतिनिधि इस विषय में क्या कर रहे हैं..? यह किसी को नहीं मालूम और दूसरी तरफ वर्तमान विपक्षी दल भाजपा भी इस मामले में कोई बड़ा एक्शन नहीं ले रही है! दोनों की चुप्पी भी घोटालेबाजों की चाँदी कर रही है। सत्ता दल, विपक्षी दल दोनों के मौन व्रत धारण से लोगों में उनके प्रति अविश्वास भी जाग रहा है।

क्या कहती है शहर की पब्लिक

इस विषय में जब हमने कुछ नागरिकों से बात किया तो उन्होंने अपने मन की बात हमें बताते हुए कहा, रायगढ़ शहर में भाजपा एवं कांग्रेस के जनप्रतिनिधि केवल आपसी दिखावा करते हैं जबकि नगर निगम में दोनों दल के नेता एक हैं। आशुतोष पांडे एवं भीम सिंह के की जोड़ी इन घोटाले बाजों का पर्दाफाश करने के लिए कार्य कर रही थी लेकिन इसी बीच आशुतोष पांडे का ट्रांसफर हो गया और उनके ट्रांसफर से यह मामला ठंडा बस्ते में चले गया है। निगम की तरफ से अभी तक कलेक्टर को घोटाले में संलिप्त लोगों की सूची नहीं दी गयी है, जिस ओर संदेह है। नए आयुक्त इस जिम्मेदारी को पूर्ण करें और करोड़ों के घोटाले करने वाले लोगों का नाम कलेक्टर के सामने प्रस्तुत करें।

कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से इस पर लेना होगा इंटरेस्ट

कई लोगों ने यह भी कहा की कलेक्टर को निगम के इस कांड के ऊपर व्यक्तिगत रूप से इंटरेस्ट लेना होगा। तब कहीं जाकर घोटालेबाजों को सजा मिल सकती है और उनका पर्दाफाश हो सकता है। यदि कलेक्टर ने मामले में सख्ती नहीं दिखाई तो फिर कुछ नहीं हो सकता क्योंकि यहां के कुछ अधिकारीयों, जनप्रतिनिधियों व ठेकेदारों ने मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया है।

सभी घोटालेबाज एक हो गए हैं और इसलिए शायद अब तक घोटाले बाजों की सूची कलेक्टर तक नहीं पहुँची है। यदि घोटाले में संलिप्त अधिकारी घोटाले बाजों की लिस्ट कलेक्टर को नहीं सौंपेंगे तो कार्यवाही किस पर होगी..? कलेक्टर भीम सिंह को इन घोटाले बाजों का पर्दाफाश करने के लिए व्यक्तिगत तौर पर विशेष इंटरेस्ट लेना होगा, क्योंकि नगर निगम घोटालों का एक ऐसा गढ़ है जहां पर जनप्रतिनिधि, ठेकेदार एवं अधिकारी तीनों के मिलीभगत से करोड़ों रुपए का घोटाला हो चुका है और उनके मिलीभगत से मामला वर्षों से कब्र में दफन है।

शहर के एक प्रतिष्ठित नागरिक ने कहा की कहीं ना कहीं घोटाले बाजों के मन में डर है कि यदि फाइल कलेक्टर के पास पहुंच जाएगी तो उन पर कार्यवाही हो जाएगी इसलिए फाइल को रोकने की प्रयास शुरू हो चुकी है। सालों पुराने मामले में अधिकारिक जांच में स्पष्ट है कि स्कैम तो हुआ है। निगम कमिश्नर का ट्रांसफर हो चुका है, रायगढ़ कलेक्टर भी अपना 1 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। ऐसे में समय कम है अगर समय रहते यह स्कैन अंजाम तक नहीं पहुँचा, तो घोटाले बाजों के हौसले बढ़ जाएंगे और वह दिन दूर नहीं, जिस दिन यह घोटालेबाज पूरा रायगढ़ बेच खाएं।

Read More