रायगढ़/ स्टेडियम के “कास्टिंग काउच” वाले सनसनीखेज मामले की निकली हवा..! बास्केटबॉल नेशनल कोच और लोकल महिला कोच को किशोरी और उसके पिता ने दी क्लीनचिट..! सारे आरोप स्टेडियम के वर्चस्व की पॉलिटिक्स का नतीजा ? लड़की के पिता ने बताई सच्चाई.. देखें वीडियो.. पढ़ें पूरी खबर

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रायगढ़, 22 जुलाई। रायगढ़ स्टेडियम हमेशा विवादों के कारण सुर्खियों में बने रहता है। विगत कुछ दिन पूर्व स्टेडियम में कोचिंग देने वाले बास्केटबॉल के नेशनल कोच गोपु एवं अंजू जोशी पर एक नाबालिक बास्केटबॉल बालिका खिलाड़ी ने “कास्टिंग काउच” आरोप लगाते हुए महिला रक्षा टीम थाने में उत्पीड़न एवं यौन शोषण की शिकायत की थी। नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया था कि नेशनल सिलेक्शन के बदले और फिजिकल ट्रेनिंग के नाम पर महिला को द्वारा उनके कपड़े उतारने को कहा गया था। महिला थाने से मामला जूटमिल चौकी मैं सौंपा गया क्योंकि मामला जूटमिल चौकी क्षेत्र का था।

मामला संवेदनशील था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जूटमिल चौकी के वर्तमान प्रभारी एसआई नेताम ने इस मामले में जांच शुरू कर दी। इसी बीच मामले में अब एक टर्निंग प्वाइंट सामने आया है। आरोप लगाने वाली बालिका खिलाड़ी एवं उसके पिता ने अपने आरोपों को सिरे से खारिज कर  दिया है और जूटमिल चौकी जाकर अपने द्वारा लगाये गए आरोपों की सच्चाई थाना प्रभारी को बताकर शिकायत को वापस ले लिया है।

जब RIG24 की टीम ने इस मामले की सच्चाई जानने नाबालिग बालिका एवं उसके पिता सुफल विश्वास से मुलाकात किया तो पूरी सच्चाई सामने आ गई। RIG24 को ने बताया कि : –

‘मैं घर में नहीं था और कुछ लोग मेरी बेटी को बहला – फुसलाकर महिला थाने ले गए और गोपु सर एवं अंजू जोशी के विरुद्ध शिकायत दर्ज करा दी। उस वक्त मुझे पूरी सच्चाई नहीं मालूम थी लेकिन जब मुझे यह पता चला कि दोनों कोच को कुछ लोग व्यक्तिगत दुश्मनी की वजह से बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं तो मुझे आत्मग्लानि महसूस हुई। फिर मैं व बेटी जूटमिल चौकी गए और वहाँ लिखित रूप से अपनी शिकायत को हमने वापस लेने हेतु शिकायत वापसी के लिए निवेदन किया है। आगे सुफल विश्वास ने बताया कि अब वह इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं चाहते क्योंकि गोपु सर एवं अंजू जोशी निर्दोष हैं। उन दोनों पर कोई भी लांछन ना लगाएं।  किसी निर्दोष पर पुलिस प्रशासन कोई कार्यवाही ना करें इसके लिए उन्होंने निवेदन भी किया है।’

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रंजिश एवं निजी स्वार्थ के लिए नाबालिग खिलाड़ी का किया इस्तेमाल

इस विषय में जब हमने और तहकीकात की तो नए अहम तथ्य सामने आये हैं। पड़ताल के दौरान हमें यह मालूम हुआ की पूरा का पूरा मामला रायगढ़ स्टेडियम बास्केटबॉल संघ में वर्चस्व की लड़ाई है। कुछ लोगों ने आपसी रंजिश व निजी स्वार्थ सिद्धि के लिए कोच गोपु एवं अंजू जोशी के विरुद्ध नाबालिक बच्ची पर दबाव डाला और उसे बहला फुसलाकर महिला थाने ले जाकर शिकायत कराई थी। बास्केटबॉल के दोनों कोच को निकालने के लिए कुछ लोग पर्दे के पीछे रहकर साजिश रचते हुए बालिका खिलाड़ी और उसके पिता को कोच अंजू जोशी और गोपु के विरुद्ध इस्तेमाल किया है। यदि इस मामले में इन लोगों की मंशा सफल हो जाती तो दोनों निर्दोष कोच का कैरियर बर्बाद हो जाता और वे स्टेडियम समिति में बास्केटबॉल के कोच पद से निकाले जाते। उसके बाद फिर यही लोग इस पद के लिए आगे आते और अपना स्वार्थ सिद्ध कर धांधली करते।

पिता पुत्री ने जूट मिल चौकी में जाकर अपने द्वारा की गई शिकायत को वापस लेने हेतू लिखा गया शिकायत वापसी पत्र

कौन है नेशनल कोच गोपु और लोकल कोच अंजू जोशी..?

यहां पर यह बताना लाजमी है कि गोपू रायगढ़ जिले के एकमात्र ऐसे बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं। जिन्होंने रायगढ़ जिले का नाम नेशनल स्तर पर कई बार रोशन किया है और वे उत्तरप्रदेश की बॉस्केटबॉल टीम के कोच भी रह चुके हैं। अपनी खेल प्रतिभा के दम पर उनकी गिनती नेशनल लेवल के खिलाड़ियों में होती है। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आने वाले कुछ दिनों में कोचिंग को लेकर वे जर्मनी जाने वाले हैं। तो वही पिछले 2 वर्षों से स्टेडियम में कोचिंग दे रही अंजू जोशी वर्तमान में जिला जेल में प्रहरी के तौर पर कार्य कर रही हैं और कलेक्टर के आदेश पर बास्केटबॉल खेल की कोचिंग बच्चों को दे रही हैं। मुख्यमंत्री से उत्कृष्ट खिलाड़ी का अवार्ड भी अंजू जोशी को मिल चुका है।

इस मामले में हमने स्टेडियम में कोचिंग लेने वाले लगभग एक दर्जन बास्केटबॉल खिलाड़ियों से भी बात की जिनमें कई महिला बास्केटबाल खिलाड़ी भी हैं। इस बारे में उनका कहना था की –

‘उनके दोनों कोच पर जिस प्रकार से आरोप लगाए गए हैं वो गलत व बेबुनियाद हैं। हम लोग यहां वर्षों से कोचिंग ले रहे हैं। देर शाम – रात तक हम सभी ने उनके साथ प्रैक्टिस किया है और इस दौरान हमें कभी भी ऐसा नहीं लगा कि हमारे कोच द्वारा हमारे साथ किसी प्रकार का गलत व्यवहार हो रहा है। गोपू सर दिल्ली से जब भी आते हैं और अपने अल्प समय में हमें मैदान में बास्केटबॉल की कुछ टिप देकर चले जाते हैं । हम लोग उनके सानिध्य में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। आज तक उन्होंने कभी भी हमसे अभद्र भाषा एवं अश्लील हरकतें कभी नहीं की है।

पिता द्वारा दिया गया शपथ पत्र

पिता – पुत्री ने सच्चाई जान व समझकर इस मामले में निर्दोष दोनों कोच पर लगाए गए आरोप से इनकार कर दिया है और किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही न करने के लिए पुलिस थाने में अपना आवेदन दे दिया है। इन सबके बीच स्टेडियम में चल रही अंदरूनी वर्चस्व की लड़ाई अब किस स्तर तक पहुंच गई है.. इस बात को भी इस मामले ने स्पष्ट कर दिया। रायगढ़ स्टेडियम में खेल कम और राजनीति हावी हो गई है, वह भी एकदम निचले स्तर की। जिसके लिए नाबालिक बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

बहरहाल, रायगढ़ स्टेडियम में हो रही राजनीति को जड़ से समाप्त करने के लिए खेल से जुड़े हुए अच्छे लोगों को, खिलाड़ियों को, जिला प्रशासन को और  प्रदेश के खेल मंत्री उमेश पटेल को भी आगे आना होगा ताकि आने वाले समय में ऐसे किसी भी प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति दोबारा ना हो और रायगढ़ जिले का सबसे बड़ा स्टेडियम विवादों के कारण सुर्खियों में ना रहे, बल्कि खेलों के कारण सुर्खियों में रहे।

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