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वीडियो: रायगढ़ के शहरी गौठान को क्यों बनाना पड़ा कचरे का नया डंप यार्ड..?? आखिर गाये क्यों मजबूर है गौठान के बाहर कचरे में खाना तलाशने को..??

रायगढ़। रायगढ़ शहर में ट्रांसपोर्ट नगर स्थित अमलीभौना में शहरी गौठान बनाया गया था। यहां पर शहर में आवारा घूम रही गायों को को रखा जाना था। अभी की स्थिति में गौठान बंद है और अभी वह निगम का नया.. कचरे का डंप यार्ड बना हुआ है। इस बारे में निगम का कहना है कि उसे वैकल्पिक तौर पर शहर का कचरा डंप करने के लिए बनाया गया है।

गौठान के बाहर पॉलिथीन मिक्स कचरे में अपना खाना तलाशती हुई गाये

निगम द्वारा इसे शहरी क्षेत्र में घूमने वाले गायों के लिए उपयुक्त मानकर का गौठान बना दिया गया था। जहां उनकी देखभाल की जानी थी मगर आज वहां कचरो का अम्बार है, खास करके पॉलिथीन का। आज गाये उस गौठान के अंदर दिखाई नहीं देती, हां मगर बाहर पॉलिथीन मिक्स कचरे में अपना खाना तलाशती हुई जरूर देखी है। देखा जाए तो यह बेजुबान गाये, नगर निगम की दोनों ही दावो को खोखला साबित करती है। पहली जिसमें गायों की सुरक्षा और उनकी देखभाल करने का दम भरा जाता है और दूसरी बात शहर में व्यवस्थित तरीके से कचरे का निपटान।

गौठान का वर्तमान दृश्य

आपको बता दें कि नगर निगम के इस शहरी गौठान या फिर वर्तमान में वैकल्पिक कचरे का डंपयार्ड..! इसके पास ही निगम द्वारा स्लम बस्ती का निर्माण किया गया है। करीब एक हजार के आसपास मकानों का निर्माण कर निगम द्वारा गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को आवंटित किया गया था। इसमें ऐसे लोगो की तादात ज्यादा है, जो बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा कर पाते हैं। एक अंदाजा है कि करीब तीन से चार हजार की आबादी यहां जरूर रहती है। कचरे डंपयार्ड से सटे, इतनी बड़ी बस्ती पर उसका क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा, यह तो वक्त ही जाने। बाकी इस बारे में जब हमने रायगढ़ की महापौर जानकी काटजु से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि नगर निगम की टीम इस बात पर बराबर इस पर निगरानी रखती है। समय-समय पर यहां पर निरीक्षण किया जाता है।

गौठान से सटी स्लम बस्ती

निगम के इस दावों की जमीनी हकीकत जानने के लिए जब हमने वहां के बाशिंदों से पूछा तो कोई भी कुछ भी कहने से कतरा रहा था। ऑफ द रिकॉर्ड उन्होंने कहा बड़ी मुश्किल से पक्का मकान मिला है, जो भी होगा देखेंगे। शायद कोई भी निगम के दिए हुए मकान पर निगम के खिलाफ बोलना नहीं चाहता।

नगर पालिका निगम शहरी गोठान

शहर भर का कचरा फेंकने के लिए इस आबादी के करीब की जगह को चुने जाने का कारण जब हमने महापौर जानकी काटजू से पूछा तो उनका कहना था कि कचरा कहीं ना कहीं तो फेंकना ही है, फिलहाल यह वैकल्पिक रूप से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। रामपुर डंपयार्ड जहां पहले कचरा फेंका जाता था। वहां केमिकल डालकर प्लास्टिक एवं अन्य कचरे को डिस्पोज़ करने की प्रक्रिया जारी है। तब तक के लिए इस स्थान को चुना गया है।

मामले की पूरी वीडियो स्टोरी

बचपन की किताबों में पढ़ा था कि कचरे कई बीमारियों को जन्म देते हैं खास करके बरसात के वक्त। देखा जाए तो रामपुर डंपयार्ड उपलब्ध ना होने के कारण शहर भर के कचरे को फेंकना एक समस्या तो है, महापौर के मानेतो कहीं ना कहीं कचरा तो फेंकना है। मगर हमारा मानना है कि आबादी के करीब फेंकना उचित नहीं है। और दूसरी बात उस गौठान के बाहर कचरे में भोजन तलाश रहे उन गायों को भी निगम को अच्छी व्यवस्था के तहत किसी दूसरे का उठान में शिफ्ट कर देना चाहिए ऐसा ना हो कि कहीं खबरों में फिर से सुनने को मिले कि अमुक गाय के पेट से इतना किलो पॉलिथीन मिला..??

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