आरएन प्रसाद- एक पिता, जिसकी लगन और साधना ने दोनों बच्चों को पहली बार में ही देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी में दिलाया दाखिला, पढ़िए उनकी कहानी

1,499 views

रायगढ़। लक्ष्य के प्रति समर्पित हो तो सफलता अवश्य मिलती है। इस सूक्ति वाक्य को धरातल पर सत्य साबित किया है आरएन प्रसाद ने। आरएन प्रसाद अभी नलवा स्टील एंड पावर लिमिटेड में मानव संसाधन विभाग (HR) के प्रमुख पद पर कार्यरत है। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों के बारे में बताया कि जीवन की शुरुआत से उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि आर्थिक रूप से उतनी मजबूत नहीं थी। एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से संघर्ष करते हुए आज भी इस मुकाम पर पहुंचे हैं। अपने जीवन के 15 वर्ष उन्होंने जिंदल ग्रुप में अपनी सेवाएं दी है।

उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि उनके दोनों बच्चे ऋषभ और रितिक देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी में अध्ययनरत हैं। उनका बड़ा बेटा रितिक रंजन प्रसाद 2019 में आईआईटी मुंबई में पढ़ाई कर रहा है। इसके अगले वर्ष बाद ही उनका छोटा ऋषभ का भी आईआईटी में सिलेक्शन हो गया। वह अभी आईआईटी रुड़की में अपनी पढ़ाई कर रहा है। जीवन के संघर्ष के दौरान उन्होंने अपने परिवार अपने बच्चों भविष्य के लिए कभी कोई समझौता नहीं किया। अपने बच्चों को एकाग्रता लगन लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा दी। दोनों ही बच्चों की गणित विषय के प्रति रुचि को देखकर उन्होंने बचपन में ही उन्हें लक्ष्य और एकाग्रता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने बताया कि दोनों बच्चों ने बचपन में ही तय किया था। उन्हें आईआईटी संस्थान से इंजीनियरिंग कर देश की सेवा के लिए कुछ करना है और उनकी लक्ष्य के प्रति समर्पण एकाग्रता का ही परिणाम है कि आज दोनों आईआईटी में अध्ययनरत हैं। उन्होंने बताया कि दोनो बच्चो ने आईआईटी एग्जाम पहले ही बारी में क्रैक कर लिया था।

बच्चों के भविष्य को संवारने में उनकी धर्मपत्नी सरिता वर्मा का भी अपूर्णयीय योगदान है। उनकी पत्नी अभी समाज सेवा में है और नारी सशक्तिकरण के लिए झारखंड की राजधानी रांची में अपनी एक स्वयं की संस्था चलाती हैं। उन्होंने बताया कि जीवन में उनके लिए सफलता का मतलब अपने कार्य और अपने परिवार दोनों के बीच संतुलन बनाकर दोनों में अपना सर्वश्रेष्ठ देना है। हर माता-पिता का सपना और दायित्व होता है कि उनके बच्चे एक खास मुकाम हासिल करें। जीवन की व्यस्तता के बीच बच्चों को सही शिक्षा और समय देना अति आवश्यक है। क्योंकि बच्चे सिर्फ अपने माता-पिता का ही भविष्य नहीं होते बल्कि राष्ट्र का भी भविष्य होते हैं। समय-समय पर उनका मार्गदर्शन करना और लक्ष्य के प्रति जागृत करते रहना चाहिए।