आरोपो और षड्यंत्रो के बीच गरमाता सारंगढ़ का हाईप्रोफाइल मामला ! बात पहुंची पुलिस कप्तान से लेकर होम मिनिस्टर तक..! सोशल मीडिया में लगातार जारी हो रहे हैं धमाकेदार ऑडियो और वीडियो..! देखे सनसनीखेज मामले की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट.. वायरल विजुअल के साथ

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रायगढ़/ सारंगढ़। सारंगढ़ में इन दिनों समाज विशेष पुलिस और पत्रकार के बीच का एक मामला जबरदस्त हाई प्रोफाइल होते जा रहा है। इस मामले में रोज नए-नए वीडियो ऑडियो और स्टेटमेंट जारी हो रहे हैं और जोरो से वायरल भी हो रहे हैं। यह मामला सारंगढ़ ही नहीं पूरे रायगढ़ जिले का सबसे चर्चित मामला बन गया है,। इस पूरे मामले के दौरान जारी ऑडियो वीडियो और मीडिया में जारी खुलासों से पुलिस विभाग भी अछूता नहीं है।

कोर्ट में ब्लैकमेलिंग

सारंगढ़ के साहू समाज के द्वारा सारंगढ़ के वार्ड नंबर 1 रानीसागर में सन 2000 में एक भूमि खरीदी गई थी। 2020 में समाज के लोगों ने इसमें एक साहू धर्मशाला और छात्रावास बनाने का काम शुरू किया। इस साहू समाज के धर्मशाला के निर्माण पर पत्रकार भरत अग्रवाल और ओंकार केशरवानी ने आपत्ति जताते हुए लिखित शिकायत नगर पालिका सारंगढ़ और एसडीएम सारंगढ़ से की। जहां पर साहू समाज  तहसीलदार सारंगढ़ में भी इस आशय का शिकायत पत्र प्रस्तुत कर मामले में न्यायालीन कार्यवाही प्रारंभ किया गया। जहां पर कार्यवाही अभी लंबित है।

साहू समाज द्वारा पुलिस अधीक्षक से की गई शिकायत

साहू समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि तहसील कार्यालय में ओंकार केसरवानी ने समाज के लोगों के सामने ही निर्माण के के एवज में एक मोटी रकम की डिमांड की, और नहीं देने पर लगातार पेपर में गलत चला कर समाज की छवि धूमिल करने की बात कही गई। साहू समाज का कहना है कि आज भी उनके द्वारा समाचार पत्रों में इस तरह की खबरें चलाई जा रही हैं। पदाधिकारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इस मामले में दो और पत्रकार भरत अग्रवाल और विश्वनाथ गुरु के भी शामिल होने की बात कही है। इस मामले में समाज के कार्यकारी अध्यक्ष ने भी अपना बयान मीडिया को दिया।

साहू समाज के कार्यकारी अध्यक्ष का बयान

बात पहुँची कप्तान साहब से लेकर होम मिनिस्टर तक..

समाज के लोगों का कहना है कि उन्होंने समाज के जिला पदाधिकारियों और राज्य पदाधिकारियों से चर्चा के बाद इस बात की शिकायत सुबे के होम मिनिस्टर ताम्रध्वज साहू से भी की। 3 नवंबर को सारंगढ़ में जन चौपाल कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक से  इस पूरे मामले के बारे में  बताया और इसे संबंधित कुछ डाक्यूमेंट्स भी जिला पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह को दिखाया। इसके बाद उन्होंने इसकी लिखित शिकायत जिला पुलिस अधीक्षक से की। पूरे मामले की बारीकी से जांच करने और उन पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग रखी। क्योंकि मामला काफी हाईप्रोफाइल हो चुका था। उनकी मांग पर तत्काल ही सारंगढ़ ब्लॉक के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी एसडीओपी जितेंद्र खूंटे को मामले की जांच सौंपी गई।

जांच अधिकारी पर ही लगा दिया आरोप..

मामला अब काफी हाईप्रोफाइल हो चुका था, इसलिए इस मामले की जांच त्वरित ही शुरू कर दी गई। एक-एक करके सभी के बयान दिए जाने थे। आरोप लगाने वालों के भी और जिन पर आरोप है उनके भी। पत्रकारों के बयान के लिए एसडीओपी जितेंद्र खूटे ने उन्हें बुलाया। ओंकार केसरवानी और भरत अग्रवाल बयान के लिए एसडीओपी खूटे के पास पहुंचे। जहां ओंकार में अपना बयान दिया। लेकिन भरत अग्रवाल एसडीओपी ही पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया और चेंबर से चले गए। इसके बाद सोशल मीडिया में कुछ पोस्ट की। मीडिया में बयान भी आया। इस बात की शिकायत एसडीओपी के खिलाफ उसने सारंगढ़ थाना में लिखित रूप से दी।

भरत अग्रवाल के द्वारा सारंगढ़ थाना में की गई शिकायत

इस पूरे मामले में एसडीओपी ने मीडिया को बयान में बताया कि कथन के लिए ओंकार केसरवानी और भरत अग्रवाल को बुलाया गया था। ओमकार केसरवानी ने अपना बयान दर्ज कराया और भरत अग्रवाल उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगे और सिर्फ 30 सेकंड के भीतर ही वह उनके चेंबर से चले गए।

एसडीओपी का बयान

जाना था जापान पहुंच गए चीन..

इस पूरे मामले के बाद यह मामला और भी पेचीदा हो गया। कहा तो एक तरफ समाज द्वारा की गई शिकायत की जांच होनी थी। लेकिन अब इस पूरे मामले अलग ही तूल पकड़ लिया। आरोपी ही पीड़ित हो गया! आरोप क्योंकि ब्लॉक के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी पर लगा था। लोकल मीडिया में खबरें चलने लगी, बयानबाजी शुरू हो गई। ब्लैक मेलिंग के मामले की जांच भी प्रभावित हुई, और पूरा मामला भरत अग्रवाल वर्सेस एसडीओपी जितेंद्र खूंटे हो गया। मीडिया में इस प्रकार की खबरें भी चलने लगी कि कहीं एसडीओपी पर लगाया गया आरोप मामले का रुख मोड़ने के लिए और अपने बचाव के लिए भरत अग्रवाल द्वारा खेला गया कोई पैंतरा तो नहीं है। सारंगढ़ थाना टीआई को भी मीडिया ने रेडार पर लिया। उन पर अपने ही उच्च अधिकारी के खिलाफ साजिश करने का आरोप भी लगाया।

समाचार पत्र के स्क्रीनशॉट

इस बड़े आरोप के बाद मामला यहीं नहीं रुकना था। सतनामी समाज के लोगों ने भी एसडीओपी जितेंद्र खूटे को जबरन फंसाए जाने का आरोप लगाया। इस बारे में सतनामी समाज के अध्यक्ष देव प्रसाद कोसले ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से कई पोस्ट किए जिसमें उन्होंने एसडीओपी के के ऊपर लगाए गए आरोप को निराधार बताया और सोशल मीडिया में जमकर अपनी भड़ास निकाली। यहां तक कि एसडीओपी के पक्ष में आंदोलन करने के बाद भी कह दी।

देव प्रसाद कोसले की फेसबुक पोस्ट-1
देव प्रसाद कोसले की फेसबुक पोस्ट-2

टारगेट तो एसडीओपी है.. टीआई साहब भी ऐसा ही चाहते हैं

मामला सतनामी समाज के अध्यक्ष के बयान के बाद अब और भी ज्यादा तब गरमा गया। जब आज दोपहर एक ऑडियो रिलीज सोशल मीडिया में रिलीज हुई। देखते ही देखते ही वायरल भी होने लगी। कई न्यूज़ पोर्टल ने भी इस ऑडियो को लेकर खबर चलाई। इस मामले में दिलचस्पी रखने वाले हर एक मोबाइल पर या ऑडियो वायरल होने लगा। इस ऑडियो में कथित रूप से दावा किया जा रहा है कि इसमें एक तरफ की आवाज पत्रकार भरत अग्रवाल की है और दूसरे किसी सारंगढ़ थाने के पुलिस कर्मचारी की। इस ऑडियो में कहा जा रहा है कि टारगेट तो एसडीओपी ही है.. वहीं दूसरी तरफ से बीच मे कथित पुलिस कर्मचारी कहता है कि कि टीआई साहब भी ऐसा ही चाहते हैं।

सोशल मीडिया में वायरल ऑडियो