दोषी कौन..? रायगढ़ में फिर दिखी कोरोनावायरस के प्रति जागरूकता की मिशाल..? किसी जागरूक ने इस्तेमाल कर फेंक दिया पीपीई किट को सड़क पर, और उसे पहना एक कचरे वाले ने..

3,684 views

रायगढ़। कोरोनावायरस कितना भयानक और खतरनाक है.. बीते 8 महीनों में रायगढ़ क्या, हिंदुस्तान क्या.. पूरा विश्व इस बात को लगभग समझ चुका है। लेकिन फिर भी समझने में कहीं ना कहीं एक बड़ी चूक है! आज भी लोग कोरोनावायरस को अपने घर के कचरे की तरह समझते हैं। जिसे अपने घर से बाहर निकाल दिया तो यह सोच लिया कि दोबारा वापस हमारे घर नहीं आएगा। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं..? दरअसल ऐसा कहने के लिए हमारे आंखों के सामने एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत हुआ। जिस पर चौकना जायज था। इसे समझने के लिए आपको नीचे की कुछ तस्वीरों को देखना होगा..

दरअसल यह पूरा नजारा  रायगढ़ शहर से जूट मिल क्षेत्र से निकलकर संस्कार स्कूल वाले जाने वाली रोड पर का है। किसी जागरूक व्यक्ति ने इसे पहना, अपने स्वयं बचाव के लिए… और फिर इसे फेंक दिया, बाकी लोगों में फैलाव के लिए! बल्कि यह होना था कि इसका नियम के अनुरूप सुरक्षित निपटान होना था।

ये जिंदा वायरस है कोई घर का कचरा नहीं..

इन तस्वीरों को देखकर तो आप समझ ही गए होंगे कि किसी ने कचरा समझ कर कोरोनावायरस की रोकथाम के लिए अपनाई गई इस पीपीई किट को खुले रास्ते में इस तरह फेंक दिया जैसे कि आदमी घर का कचरा निकाल कर सड़क पर फेंक देता है। लेकिन यह कोई निर्जीव कचरा नहीं, यह जीता जागता वायरस है। जो वायरस चाइना से निकलकर पूरे विश्व का भ्रमण कर रहा हो, यहां तक की चाइना से हजारों किलोमीटर दूर रायगढ़ की सड़कों गलियों तक इसकी पहुंच गया हो। अगर आप इसे फेंक कर यह सोच रहे हैं कि आपने इससे पिंडा छुड़ा लिया.. तो यकीन मानिए आप बहुत गलत हैं, यह वापस फिर आएगा ! अगर इस पीपी किट में वायरस का तनिक भी अंश है तो वह उस तक भी पहुंच सकता है, जिसने उसे फेंका है।

यह किस तरह की जागरूकता..?

जिसने भी इसका इस्तेमाल किया है इतना तो कंफर्म है कि वह जागरूक था, ! मगर किसके लिए..? सिर्फ स्वयं के लिए…? जबकि यह बीमारी स्वयं के नहीं बल्कि सामाजिक स्तर पर है; यहां एक की गलती की सजा पूरा का पूरा शहर भुगगता है, ऐसे कई उदाहरण हमने पहले देखे हैं।

आज उस कचरा बटोरने वाले ने कौतूहलवस इस पीपीई किट को पहना, कल वह आपकी गली मोहल्ले में भी कचरा बिनने आएगा! यह भी हो सकता है कि जिसने यह किट को फेंका है.. उसके घर के बगल में भी वह कचरा बिनने आ सकता है तो क्या ऐसे में जिसने भी इसे फेंका है वॉइरस से बच गया!

कौन पहनता है इस तरह के किट.. कौन है इसका जिम्मेदार

काफी हद तक संभव है कि इसका इस्तेमाल करने वाला इसकी रोकथाम के लिए बनाए गए किसी विभाग से संबंधित हो। क्योंकि रायगढ़ शहर में आम आदमी को मास्क लगाने के लिए भी जागरूक करना पड़ता है, नहीं तो दंड स्वरूप जुर्माना का डर दिखाना होता है! ऐसे में भला पीपीई कीट पहनकर कौन घूमेगा..? इतना बड़ा जागरूक तो रायगढ़ में कोई नहीं। इस बात पर गौर करने की जरूरत है कि इस तरीके की सामग्रियों का निपटान सही तरीके से हो। हम प्रशासन पर आरोप नहीं लगा रहे हैं! इतने बड़े सिस्टम को संभालना आसान नहीं होता, इस बात को हम समझते हैं लेकिन जहां कुछ कमियां दिखे तो वहां अवगत कराना भी हमारा धर्म है! व्यवस्था अच्छी है, और कहीं कमी है तो उसे और दुरुस्त करना भी जरूरी है।