रायगढ़ / पोस्ट कोविड के बाद मानसिक स्वास्थ्य को तवज्जो दे रहे लोग … कोरोना काल में 1,200 से अधिक लोगों की हुई फ़ोन के जरिये काउंसलिंग..!!


रायगढ़ 25 जनवरी। जतन केंद्र में स्थित जिला मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में इन दिनों फिर से मानसिक तनाव से ग्रसित लोग सामान्य रूप से परामर्श लेने आ रहे हैं। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर लोगों ने यहां आना बंद कर दिया था ऐसी स्थति में यहां के काउंसलर मानसिक रोगियों को फोन (टेली-कॉउंसिल) से ही सलाह देते रहे और यह विधि कारगर भी रही। कोरोना से ग्रसित लोगों में अनेक प्रकार के तनाव आए और वह बेहिचक यहां के काउंसलर से सलाह लेते रहे । इस पूरे कोविड काल में करीब 1,200 से अधिक लोगों की यहां की इकाई ने टेलीपैथी के जरिये काउंसलिंग की है।


कोरोना के रोजाना मामलों में कमी आने के बाद अब यहां हर दिन 12 के करीब मरीज आ रहे हैं। कोरोना के बाद गेमिंग एडिक्शन ( मोबाइल गेम की लत) वाले मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके अलावा शराब, तंबाकू व डिप्रेशन वाले केस भी आ रहे हैं।


मानसिक स्वास्थ्य इकाई के काउंसलर पी अतीत राव बताते हैं “शुरुआत में बाहर से जो लोग आए और पॉजिटिव निकले थे उन पर कोरोना को लेकर काफी मानसिक तनाव था। कई बुर्जुगों को अकेलपन और संक्रमण फैलने समेत अनेक प्रकार का तनाव था जिसे लेकर वे उनसे लगातार संपर्क में थे। कोविड के समय तनाव बाकी समय के तनाव से कुछ अलग था हर केस में लोग अलग-अलग प्रकार से व्यवहार कर रहे थे। यह हमारे लिए बिल्कुल नया अनुभव था। लोगों को तसल्ली दिलाना और उन्हें सामान्य रखना वो भी फोन पर बड़ा दिक्कत भरा था लेकिन हमने इस पर विजय पाई। कोरोना काल में कोविड संक्रमित मरीजों के होम आइसोलेशन, दवाई पहुंचाना और फीड बैक लेने का काम भी हम देख रहे थे।“

जतन में मानसिक स्वास्थ्य इकाई होने के फायदे


जतन केंद्र में मानसिक स्वास्थ्य इकाई को तरह-तरह के मरीज मिल जाते हैं क्योंकि यहां एक साथ चार कार्यक्रम चल रहे हैं जिनके मरीजों में मानसिक स्वास्थ्य के लक्षण भी हो सकते हैं। जैसे जिला विकलांग पुर्नवास केंद्र में आने वाले मरीजों में कई बार साइको सोमेटो फॉम डिस्ऑर्डर ( भावनात्मक तनाव को समझ नहीं पाना) होता है। इसमें होता यह है कि तनाव को सही तरह से नहीं समझ पाने के कारण वह पहले सिर में दर्द उत्पन करता है और फिर बाद में मांस पेशियों में जिसके कारण पूरे शरीर में दर्द देता है। इस दर्द में कोई दवा काम नहीं आती। शरीर में दर्द और जकड़न के कारण लोग फिजियोथेरेपी कराने जिला विकलांग पुर्नवास केंद्र आते हैं लेकिन थेरेपी देने के बाद भी जब दर्द नहीं जाता तो यहां डॉक्टर उन्हें मानसिक स्वास्थ्य इकाई में रेफर कर देते हैं। इसी तरह बधिरता निवारण के लिए कई लोगों को स्पीच थेरेपी दी जाती है। उनमें भी मानसिक तनाव के लक्षण होते हैं तो यहीं पर उनका परामर्श हो जाता है। जिला त्वरति हस्तक्षेप केंद्र भी यहीं होने के कारण मानसिक रूप से बीमार मरीजों की पहचान भी सही समय पर हो जाती है। इस तरह एक जतन केंद्र में कई तरह के मरीज आते हैं और उनमें मानसिक स्वास्थ्य को तवज्जो दी जाती है।

मानसिक तनाव के कई रूप दिखे कोरोना काल में


मानसिक स्वास्थ्य इकाई के संतोष पाण्डेय बताते हैं “कोरोना काल में लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ा, आइसोलेशन में रहना, घर से बाहर नहीं निकलना, नौकरी से निकाला जाना और वर्क फ्रॉम होम हर एक मामले में लोगों को अलग प्रकार के तनाव में थे। लोग गंभीर स्थिति तक पहुंच रहे थे। मानसकि स्वास्थ्य को दरकिनार किए जाने के कारण अभी भी लोग मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को समझ नहीं पा रहे हैं। लेकिन कोराना काल में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के कारण लोगों ने यहां फोन किया और वो उस बुरे दौर से बाहर निकले। हम कोरोना संक्रमण की रोकथाम में मिली जिम्मेदारी को निभाते हुए मानसिक स्वास्थ्य के मरीजों का भी इलाज कर रहे थे“