रायगढ़/ प्राइवेट मेडिकल संस्थान आपके स्वास्थ्य को लेकर कितने गंभीर..? बड़े बोर्ड, महंगी टाइल्स, शानदार इंटीरियर के चक्कर मे मत समझना कि यहां सब कुछ ठीक है..? ऑलिव डायग्नोस्टिक सेंटर का ताजा मामला बताएगा आपको इसका यथार्थ..? देखें वीडियो, पढ़ें पूरी खबर

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रायगढ़। मेडिकल सुविधाओं को लेकर रायगढ़ की क्या हालात हैं..? यह किसी से छुपा नहीं है! आए दिन लापरवाही के किस्से सुनने को मिलते हैं। ज्यादातर सरकारी अस्पतालों की गलतियां खुलकर सामने आ जाती हैं,  अक्सर लोग इसी असुविधा और लापरवाही के किस्सों को सुनकर सरकारी अस्पताल जाने से कतराते हैं। इसी का फायदा प्राइवेट क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब्स और अस्पताल उठाते हैं, एवज में अच्छी खासी रकम ली जाती है। मगर क्या यह प्राइवेट संस्थान भी आपके स्वास्थ्य सुविधा को लेकर गंभीर हैं..? ऐसा ही एक नजारा रायगढ़ की ऑलिव डायग्नोस्टिक सेंटर में देखने को मिला। जिसने एक बार फिर से जिले में स्वास्थ सुविधाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे मामले में पीड़ित विजय कुमार ने बताया कि वह रायगढ़ के एक प्रतिष्ठित उद्योग में नौकरी के लिए गया था। जहां उसकी नियम के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट कंपनी द्वारा मांगी गई थी। उसने रायगढ़ के ऑलिव डायग्नोसिस सेंटर से अपना पूरा मेडिकल चेकअप कराया, लेकिन इसके बाद जो हुआ वह चौंकाने वाला था।

पीड़ित विजय कुमार ने बताया कि वह रिपोर्ट लेकर कंपनी प्रबंधन के पास गया था। जहां उसकी रिपोर्ट को कंपनी प्रबंधन द्वारा लौटा दिया गया। उसे बताया गया कि उसकी रिपोर्ट में बहुत बड़ी खामी है। पूरी मेडिकल रिपोर्ट के पहले और आखरी के दो पन्नों पर उसकी रिपोर्ट है मगर ब्लड ग्रुप ब्लड प्रेशर इत्यादि से संबंधित करीब 5 पेज की रिपोर्ट किसी और की है।  5 पन्ने किसी दूसरे व्यक्ति की है। इस पूरे मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी रिपोर्ट को डॉक्टर द्वारा खुद साइन कर अप्रूव किया गया है।

पीड़ित विजय कुमार अपनी रिपोर्ट बताते हुए

पीड़ित वहां से उसे वापस ऑलिव डायग्नोसिस सेंटर जाना पड़ा। जहाँ प्रबंधन ने मामूली गलती बोलकर पल्ला झाड़ लिया गया। पीड़ित के द्वारा और हमारी टीम के द्वारा पूछने पर भी कोई खास संतुष्ट करने वाला जवाब नहीं मिला। ना किसी कार्रवाई की बात कही गई, बस गलती मान ली गई और काम खत्म..? पर सवाल यह उठता है क्या वाकई यह सिर्फ प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा की गई एक मामूली चूक है..? इस पर गंभीरता से सोचने के बाद नहीं है..? इस पर कोई कार्यवाही नहीं होनी चाहिए..?

ऑलिव डायग्नोसिस सेंटर के अधिकारी

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ऐसे ही किसी गलती ने ले ली थी एक महिला की जान..

आपको याद होगा करीब डेढ़ साल पहले जनवरी के माह में रायगढ़ जिला अस्पताल में भी ऐसे ही भयानक चूक हुई थी। जिसमें एक प्रेग्नेंट महिला की ब्लड रिपोर्ट गलत थी। परिजन दिनभर उस गलत रिपोर्ट के आधार पर ब्लड ग्रुप तलाशते रहे और जब ब्लड मिला तब पता चला कि यह वह ब्लड ग्रुप है ही नहीं। दोबारा टेस्ट हुआ और फिर दूसरे ब्लड ग्रुप की तलाश में परिजन लग गए। तब तक 2 दिन हो चुके थे और उस महिला की मौत हो गई। मीडिया में खबर जोरों से उछली थी। उस समय भी यही हुआ, कहा गया यह एक मामूली गलती थी..?

इस पूरे मामले में पीड़ित ने काफी गंभीर प्रश्न उठाएं पीड़ित ने बताया कहा कि मान लीजिए इस रिपोर्ट के आधार पर अगर मैं अपनी किसी बीमारी का इलाज कराने जाऊं और तब..?

आम नागरिक से लेकर स्वास्थ्य विभाग को इस पूरे मामले को गंभीर रूप से लेना चाहिए। क्योंकि सवाल आपके जिंदगी से जुड़ा है, आपके स्वास्थ्य से जुड़ा है? स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि सभी प्राइवेट संस्थानों के चाहे वह बड़े हो या छोटे सब की व्यवस्था की समय-समय पर बारीकी और इमानदारी से जांच करनी चाहिए। बड़े बोर्ड, महंगी टाइल्स, शानदार इंटीरियर के चक्कर में यह नहीं समझना चाहिए कि यहां सब कुछ ठीक है..?