रायगढ़/ विवादों के साये में जिंदल पावर की ऐशडाइक.. ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें..!

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रायगढ़। रायगढ़ जिले के तमनार स्थित जिंदल पावर लिमिटेड की ग्राम डोलेसरा में प्रस्तावित ऐशडाइक से ग्रामीण मुश्किल में आ गये हैं।

डोलेसरा की लगभग 239 हेक्टेयर जमींन का भू अर्जन भी हो चूका है। वर्ष 2017 में पर्यावरण मंत्रालय से इस ऐशडाइक के लिये स्वीकृति भी मिल चुकी है। लेकिन जिंदल द्वारा अभी वहां कोई काम शुरू नहीं किया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें न तो जमींन का मुवावजा मिल रहा है और न ही वे अपना धान बेचने के लिये पंजीयन करवा पा रहे हैं। ग्रामीण घरघोड़ा एसडीएम से भी मिले लेकिन उन्हें बताया गया कि भू अर्जन निरस्त हो चूका है इसलिये अब मुवावजा नहीं मिलेगा। हालाकि कुछ ग्रामीणों ने मुवावजा की रकम प्राप्त कर ली है। चूँकि मुवावजा दोगुना की दर से दिया जा रहा था, इसलिये बहुतों ने मुवावजा नहीं लिया और कोर्ट चले गये।

चूँकि भूअर्जन हो चूका है इसलिये ग्रामीणों की जमींन अब उनके नाम पर न होकर उद्योग विभाग के नाम पर ट्रांसफर हो गई है। अब जब जमींन किसान के नाम पर न होकर उद्योग विभाग के नाम पर हो गई है तो धान बेचने हेतु पंजीयन भी नहीं हो सकता। यही नहीं स्थानीय ग्रामीण प्रकाश पटेल ने बताया कि अब तो डोलेसरा की जमीन की खरीद बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है।

इसका कारण डोलेसरा गांव डोलेसरा कोल ब्लाक के अंतर्गत आ रहा है। डोलेसरा के अलावा दो अन्य गांव बरक्शपाली और महुँवापाली भी इस कोल ब्लाक की जद में आ रहे हैं।


मामला इतना पेचीदा लग रहा है कि ग्रामीणों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है। नंबर एक तो यदि वास्तव में ऐशडाइक का भूअर्जन अवार्ड होने के बाद भी निरस्त हो चूका है तो क्या ग्रामीणों की जमीन वापस उनके नाम पर कर दी जायेगी।

अवार्ड होने के बाद जिन ग्रामीणों ने मुवावजा की रकम प्राप्त कर ली है उनसे रकम वापस कैसे हो पायेगी ! इस रकम को तो ग्रामीण कंही खर्च कर चुके होंगे।
यदि भू अर्जन निरस्त नही हुआ है तो ऐसा हो सकता है कि चूँकि जिंदल जमीन का पूरा पैसा शासन के पास जमा करवा चूका है इसलिये जमीन का आबंटन शासन जिंदल के नाम पर कर दे ! ऐसी परिस्थिति में कोल ब्लाक के लिये जब भी भू अर्जन होगा तो पूरा पैसा जिंदल को उस समय के बाजार भाव से चार गुना के हिसाब से मिलेगा।

जन चेतना के रमेश अग्रवाल का कहना है कि ऐशडाइक की पर्यावरणीय स्वीकृति के खिलाफ उन्होंने ने एन. जी. टी. में 2017 में ही याचिका दाखिल की हुई है जिसकी आगामी सुनवाई 02 नवंबर को होनी है। तब ये साफ हो जायेगा कि वास्तव में भ अर्जन निरस्त हुआ है या मामला कुछ और ही है ?

रमेश अग्रवाल