रायगढ़/ सीए ने आदिवासी महिला से हड़पी 4 एकड़ जमीन…शिकायत के बाद फोरेंसिक जाँच के निर्देश!!

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रायगढ़। जिले में सीए और साथियों द्वारा आदिवासी महिला की जमीन हड़पने का बड़ा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। कम पढ़ी लिखी आदिवासी महिला से सन 2012 में 1 एकड़ जमीन का सौदा किया गया था, लेकिन 4 एकड़ 15 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। कानूनी कार्रवाई से असंतुष्ट महिला राधाबाई ने महिला आयोग में गुहार लगाई है। सीए सुनील अग्रवाल व संजय अग्रवाल पर धोखाधड़ी कर जमीन हड़पने आरोप है। महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक जांच के आदेश दिए हैं।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक ने गुरुवार को सृजन सभाकक्ष में आयोग के समक्ष महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रस्तुत प्रकरणों पर जनसुनवाई की। संपत्ति विवाद से जुड़े इस मामले पर आवेदिका की शिकायत है कि 26 फरवरी 2012 को उसे धोखे में रखकर एक एकड़ जमीन के स्थान पर 1.682 हेक्टेयर को अनावेदक ने अपने किसी कर्मचारी के नाम पर बेनामी रूप से लिखवा लिया था। आवेदिका ने 2018 में जब अपनी जमीन का कुछ हिस्सा बेटी के विवाह के लिए बेचना चाहा, तब उसे अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी का पता चला। इस प्रकरण में महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. नायक ने आवेदिका के हस्ताक्षर के फारेंसिक जांच करवाने और विवादित भूमि पर निर्णय न होने पर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य को पूर्णत: प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए हैं। इस संपूर्ण मामले की जांच कर एसडीएम रायगढ़ को दो माह में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. नायक ने बताया कि महिला केवल हस्ताक्षर करना जानती है,लेकिन वो साक्षर नहीं है। उसके पास जो तथ्य है वो वास्तव में बहुत गंभीर है। उसने 1 एकड़ जमीन बेचना स्वीकार किया और 30 लाख रुपए उसके खाते में आए भी हैं। एक आदिवासी की जमीन आदिवासी को बेची तो गई है, पर जिस आदिवासी ने जमीन खरीदी है वो अब तक बाकी जो दो अनावेदक है उनके यहां केवल नौकर है। मामला इसलिए गंभीर है कि उस नौकर ने इतने रुपए उस आवेदिका को कैसे दिए। ये अपने आप में एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है। पर सवाल यहां केवल 30 लाख का नहीं है, महिला की चार, साढ़े चार एकड़ जमीन की धोखाधड़ी से लिखापढी करा ली गई। दो से ढ़ाई करोड़ की रिकवरी निकलने का जब इनकम टैक्स से नोटिस आया तो महिला को पता चला। उसकी बेटी ने अब सारे रिकॉर्ड निकाले हैं और इसलिए इस पूरे मामले की फॉरेसिंक जांच कराना आवश्यक है। नहीं तो कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाते-लगाते महिला की पूरी उम्र निकल जाएगी। वास्तव में जो दो अनावेदक है वो यहां के जिम्मेदार सीए हैं। उन्होंने मांइडगेम खेला है। दोनों जमानत पर रिहा है।