रायगढ़/ आदित्य बिरला ग्रुप की कंपनी हिंडालको के सैकड़ों कर्मचारी उतरे सड़क पर ! पहुंचे कलेक्ट्रेट !जबरन रिटायरमेंट और कोरे कागज पर दस्तखत करने के लिए धमकाने का लगाया आरोप! मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक से कर चुके हैं अपनी बात.. अब कलेक्टर से आश..! जानिए पूरा मामला..

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रायगढ़। आदित्य बिरला ग्रुप की कंपनी हिंडाल्को ने अपनी एक कोल माइंस सरकार को वापस लौटा दी है। इसके बाद कंपनी प्रबंधन द्वारा वहां के कामगारों को जबरन वीआरएस लेने के लिए कहा जा रहा है और इसके लिए प्रलोभन भी दिया जा रहा है। जिसे लेकर आज हिंडाल्को के कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर से इसमे दखलंदाजी की मांग की है।

कलेक्टर परिसर में बैठे हिंडाल्को कर्मचारी

मामला..

हिंडालको ने तमनार स्थित गारे पलमा कोल् माइंस IV/4 एवम IV/5 ऑक्शन में सबसे बड़ी बोली लगाकर हासिल की थी लेकिन इसके कुछ साल के बाद भी प्रबंधन ने हाल ही में जनवरी के प्रथम सप्ताह में इसमें से एक माई गारे पालमा IV/5 को बंद करने का फैसला किया और इसे सरकार को वापस लौटा दिया।

प्रबंधन द्वारा जारी नोटिस -1

प्रबंधन द्वारा 5 जनवरी को कर्मचारियों को वीआरएस लेने के लिए नोटिस जारी किया गया। इसके साथ ही पहले वीआरएस लेने वालों को 50,000 और इसके बाद लेने वाले 30,000 और 20000 के अतिरिक्त राशि देने का बात कही है। एक तरह से देखा जाए तो इसे वीआरएस लेने के लिए कंपनी द्वारा एक प्रलोभन दिया जा रहा है ताकि लोग पहले आवेदन देकर अधिक राशि प्राप्त करें। कर्मचारियों ने अपनी मांगों में इसका विरोध किया है। इसके साथ ही वीआरएस लेने वाले कर्मचारियों को आदित्य बिरला ग्रुप के अन्य किसी प्रबंधन में नौकरी के लिए प्रतिबंधित भी किया गया है।

प्रबंधन द्वारा जारी नोटिस -2

मुख्यमंत्री से कह चुके है अपनी समस्या

कर्मचारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के 2 जनवरी को रायगढ़ दौरे पर उन्होंने मुख्यमंत्री से भी इस बात की शिकायत की थी। इसके लिए उन्होंने आवेदन दिया था जहां मुख्यमंत्री द्वारा उनके साथ अन्याय ना होने देने की बात कही गई थी। उन्होंने एक पत्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम भी लिखा है। जिसमें उन्होंने बताया है कि उनसे वीआरएस लेने के लिए कोरे पेपर पर दस्तखत कराए जा रहे हैं। इसके लिए धमकाया भी जा रहा है। उनके सामने रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है। ऐसे में उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में कार्रवाई करने की मांग रखी है।

मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

जिला कलेक्टर से मदद की उम्मीद

इसके साथ ही उन्होंने जिला कलेक्टर को भी आवेदन दिया है। जिसमें उन्होंने जबरदस्ती रिटायरमेंट लेने की बात बताई है। अपने पत्र में उन्होंने बताया है कि कम पहले रिटायरमेंट लेने के लिए उन्हें 50000 तक का प्रलोभन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने नियमों का पालन नहीं किया है। उन्हें नियमानुसार 3 महीने पहले कर्मचारियों को सूचित किया जाना था, मगर यहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कंपनी द्वारा कंपनसेशन राशि लेकर एक कोरे कागज पर दस्तखत करने के लिए कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। कंपनी ने यह भी साफ नहीं किया है कि कितने कर्मचारियों को वीआरएस दिया जा रहा है। कंपनी में अपनी एक ही माइंस को सरेंडर किया है, उसकी बाकी माइंस चालू है। श्रमिकों ने इस मामले में कलेक्टर से कार्यवाही करने का अनुरोध किया है। मजदूरों के समस्याओं को देखते हुए प्रबंधन के द्वारा उनकी नीति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही उनकी नौकरी सुरक्षित रहें, इसके लिए भी जिला कलेक्टर से अनुरोध किया गया है।

रायगढ़ कलेक्टर को लिखा पत्र