सच की लड़ाई लड़ने वाले मेरे साथियों के साथ हर मुश्किल परिस्थिति में खड़ा मिलूंगा – हेमंत

रायगढ़ 18 अगस्त। रायगढ़ प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद का उत्तरदायित्व पाकर प्रसन्नता तो है लेकिन खुशी से ज्यादा जिम्मेदारी का एहसास है। सबसे पहले सारे वरिष्ठ साथियों ने जिस तरह एकमत होकर मुझे उत्तरदायित्व के योग्य समझा वह मेरे लिए भावुक करने वाला पल था। अशेष कृतज्ञता आप सभी के प्रति। उनकी आशाओं, आकांक्षाओं और अपेक्षाओं कर उतरने की चुनौतियां अब मेरे सामने है। रायगढ़ में पत्रकारिता गौरवशाली इतिहास रहा है।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमरनाथ तिवारी, संविधान सभा के यशस्वी सदस्य पंडित किशोरी मोहन त्रिपाठी, पूज्य बंदे अली फातमी और कामरेड हबीब, साहित्य और पत्रकारिता के पुरोधा गुरुदेव कश्यप, जनकवि आनंदी सहाय शुक्ल, बहुमुखी प्रतिभा के धनी अनुपम दास गुप्ता, देश की शीर्ष अंग्रेजी अखबारों में मान – सम्मान पाने वाले बारिन्द्रनाथ बनर्जी, ऐसे कितने नाम हैं जिनके गौरवशाली विरासत की रक्षा का उत्तरदायित्व आज की हमारी नई पीढ़ी पर है। मैं इस विशिष्ट परंपरा का अति सामान्य उत्तराधिकारी हूँ। इन पूर्वजों से जो संस्कार में मुझे मिलें हैं उनकी ताकत, उनकी शक्ति इतनी ज्यादा है कि मैं स्वयं को आत्मविश्वास से लबरेज अनुभव कर रहा हूँ।

रोजाना पत्रकार साथियों से मेरी चर्चाएं होती रहती है सच को उजागर करने और जनता के दु:ख – तकलीफ को आवाज देने वाले हम पत्रकारों को आवास, हमारी संतानों की शिक्षा और अपने स्वजनों के इलाज के लिए जूझना पड़ता है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि जनता के हक की लड़ाई लड़ने वाले हम पत्रकार भाइयों के हक की लड़ाई जनता लड़ेगी ऐसा जन उभार हम सब मिलकर खड़ा करेंगे।

बहुत कठिन समय से हम गुजरे हैं और नई ताकत लेकर उभरे हैं। लगभग 25 वर्षों से पत्रकारिता के दौर में मैंने अपने वरिष्ठ साथियों के मार्गदर्शन में अनेक संघर्षों में अपना योगदान दिया है और हम अपनी एकता और टीम वर्क के कारण हमेशा जीते भी हैं। आज जब आपने मुझे इस संघर्ष की अगुवाई करने का मौका दिया है तो मुझे अटूट विश्वास है कि आपका प्यार, सहयोग और हमारी जबरदस्त एकता हर लड़ाई में हमें जीत दिलाई दिलाएगी।


जब हम सबने पत्रकारिता की राह पर कदम रखा था तो हमें पता था की यह कांटो भरा रास्ता है। सच का रास्ता कठिन ही होता है लेकिन सत्य हमेशा विजयी भी होता है। निजी प्रतिष्ठा, सम्मान धन अर्जन यह सारे लक्ष्य और किसी अन्य पेशे में महत्वपूर्ण हो सकते हैं लेकिन एक पत्रकार तो अपना सर्वस्व सत्य की रक्षा के लिए न्यौछावर करने को ही सर्वोपरि प्राथमिकता देता है। बतौर अध्यक्ष मैं सच की लड़ाई लड़ने वाले मेरे साथियों के साथ हर मुश्किल परिस्थिति में खड़ा मिलूंगा।
यह कोरोना काल बहुत कठिन है। पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर जन समस्याओं को उजागर कर रहे हैं। हर क्षेत्र के भांति पत्रकारिता में भी ये छंटनी का दौर है। मैंने अपनी ईमानदार और निर्भीक पत्रकारिता से देश के सर्वोच्च राजनेताओं, वरिष्ठ अधिकारियों तथा शीर्ष पत्रकारों का थोड़ा बहुत विश्वास और सम्मान अर्जित किया है। कोविड-19 के इस दौर में अपने पत्रकार साथियों की आर्थिक और स्वास्थ्य विषयक सुरक्षा के लिए अपने निजी संबंधों का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करूंगा या भरोसा में उन्हें दिलाना चाहता हूं।


“जब संबंध बहुत निकट होता है तो शाब्दिक आश्वासन से ज्यादा ठोस आचरण का महत्व होता है। मुझे भरोसा है कि हम सब रायगढ़ की पत्रकारिता के सारे दौर के साक्षी बने।”

आपका – हेमन्त थवाईत

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