RIG Breaking: प्रदूषण की भयानक मार झेल रहे रायगढ़ का अब फूटा गुस्सा ! त्रस्त जनता ने पर्यावरण कार्यालय के सामने ही पर्यावरण अधिकारी गेदाम के पुतले को काले पानी और काली धूल से नहलाया, खिलाया..! क्या टूट रहा है अब सब्र का बांध..? जानने के पढ़े पूरी ख़बर, एविडेंसियल वीडियो के साथ..

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रायगढ़। रायगढ़ जिले में विकासदूतो पर जिम्मेदार अधिकारियों की मेहरबानी का नतीजा पूरा रायगढ़ भुगत रहा है। यहां हमारा विकास दूतों से तात्पर्य उद्योगों से है और उन पर पर्यावरण अधिकारी की मेहरबानी इस चरम तक पहुंच गई हैं कि शिकायत होने के महीनों बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होती। जो आंखों देखा दिखता है, उस पर भी जांच के नाम पर लंबी चौड़ी लीपापोती की जाती है। घर की छतों पर जमे काले धूल की परत इस बात का गवाह है। मगर अब जनता धीरे-धीरे प्रदूषण प्रति लामबंद हो रही है और आज रायगढ़ जिले में पर्यावरण कार्यालय के सामने जो प्रदर्शन हुआ शायद वह इतिहास में कभी देखने को मिला होगा।

अनोखा प्रदर्शन..

रायगढ़ के समसायिक मुद्दों को उठाने वाला संगठन जन कारवां और जिले के कुछ पत्रकारों ने यह प्रदर्शन किया और इसका लाइव वीडियो भी फेसबुक पर चलाया। पर्यावरण कार्यालय के सामने पर्यावरण अधिकारी अजय गेदाम का पुतला बनाया गया। जिसमें बिलाई नाले का पानी जो पूरी तरह से प्रदूषित होकर काला हो चुका है। इस पानी को सांकेतिक रूप से पुतले को पिलाया गया और उसके बाद नहलाया भी गया। खाने के लिए फ्लाई एस की डस्ट दी गई और इससे भी पुतले को नहलाया गया।

उनका कहना था कि पर्यावरण अधिकारी अजय गेदाम तनख्वाह तो सरकार के लेते हैं मगर काम उद्योगों के लिए करते हैं। महीनों शिकायत के बाद भी उद्योगों को उनका संरक्षण बना रहता है। रायगढ़ की आम जनता को यह धूल और काले डस्ट इन्हीं की मेहरबानी से मिली है। ना लो और तालाबों का पानी काला हो रहा है। इसमें रहने वाले जीव जंतु मर रहे हैं। पर्यावरण अधिकारी शिकायत तो ले लेते हैं मगर कोई कार्यवाही धरातल पर नहीं दिखती। साहब फोन तक रिसीव करना उचित नहीं समझते। कभी कबार ही कार्यालय में पाए जाते हैं। उद्योगों का धड़ल्ले से ईएसपी बंद कर काला डस्ट वातावरण में फैलाया जा रहा है। लोग श्वास, ह्रदय एवं स्किन संबंधी रोग  से पीड़ित हो रहे हैं। देखिए इस अनोखे और जानदार प्रदर्शन की लाइव वीडियो

क्यों करते है उद्योग जानभुझकर ऐसा..?

शहरी क्षेत्रों से ज्यादा भयानक असर इसका  उद्योग के आस-पास के गांव में देखने को मिलता है। उद्योगों को विकास के साथ-साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी दी गई है मगर इक्के दुक्के उद्योग ही इसका पालन करते नजर आते हैं। उद्योगों से निकलने वाले का काले घातक डस्ट की रोकथाम के लिए ESP मशीन का चलाया जाना जरूरी होता है। यह वह मशीन है जो काले डस्ट को हवा में जाने से रोकती है। जानकारों का कहना है कि इस मशीन को चलाने के लिए बिजली का खर्च ज्यादा आता है। इसलिए प्रबंधन अपना खर्चा बचाने के लिए पूरे समाज को बीमारी और प्रदूषण की आग में झोंक देते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों का हाल भयानक

हाल ही में गेरवानी से सरायपाली मार्ग पर तीन उद्योगों के द्वारा दिल खोलकर प्रदूषण किया जा रहा है हालत इतनी बुरी है कि खेतों पर काला जम जाता है तालाब का पानी दूर से पूरा काला हो चुका है उसके अंदर के जीव जंतु मर रहे हैं ऐसा नहीं कि ग्रामीणों ने इसकी शिकायत नहीं की मई महीने में शिकायत की गई थी। नदी के पानी के सैंपल लिया गया था। मगर उसका क्या हुआ कुछ पता नहीं..?  मगर इतना पता है कि उद्योग पहले से भी ज्यादा रफ्तार से देखो काला डस्ट उगल रहे हैं। ग्रामीणों ने इसके लिए दोबारा आवेदन 12 जनवरी 2021 में भी दिया। शिकायत से लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों अपनी बात कही मगर हमेशा की तरह कुछ नहीं हुआ..?

शहरी क्षेत्र भी नहीं बचा

इसी तरह रायगढ़ शहरी क्षेत्र से लगे वार्ड नंबर 34 और 41 के बीच छाता मुड़ा पर भिलाई नाला है यहां 10 को से एक आयल मिल कृष्णा सॉल्वेंट का अपशिष्ट पानी खेतों से होकर जाती में नाले में मिलता है दशा यह हो चुकी है कि पहले जिस नाले के पानी से खाना पकाया जाता था अब उसके बगल से गुजारने के लिए नाक पर रुमाल रखना होता है।

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कहीं टूट गया पब्लिक के सब्र का बांध तब?

आज तो एक संगठन और कुछ जागरूक पत्रकारों ने इस पर अपनी आवाज बुलंद की है और आज तो सांकेतिक रूप से पर्यावरण अधिकारी के पुतले को प्रदूषित पानी और डस्ट खिलाया और नहलाया गया है। अगर देखा जाए तो अधिकारियों का क्या..? वह तो कुछ सालों के लिए आते हैं और रायगढ़ के आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य को दांव पर लगा कर चले जाते हैं। अगर इसी प्रकार से पर्यावरण विभाग और उद्योगों की जुगलबंदी सब कुछ बर्बाद करती रही। जिस दिन आम जनता किस सहने और सब्र की क्षमता जवाब दे गई तो उस दिन इस तरह का प्रदर्शन प्रतीकात्मक न होकर वास्तविक हो जाये।