घरघोड़ा, धरमजयगढ़ व लैलूंगा ब्लाक मे अब कोल माफियाओं का राज! लट्ठेतो के दम पर खौफ के साए में होता है आधी रात को कोयले का खनन ! राजनीतिक रसूख डर और पैसे के आगे सब बेबस ! जानिए रायगढ़ जिले में माफिया युग की शुरुआत की कहानी..

  • एक दूसरे के धुर विरोधी कोयला माफिया एक होकर अब सरकार और जिला प्रशासन को लगा रहे हैं चूना..
  • जनप्रतिनिधियों व स्थानीय नेताओं की मिलीभगत के कारण कॉन्ग्रेस सरकार पर उठने लगी उंगलियां
  • अवैध कोयले के कारोबार से कोल माफिया हो रहे मालामाल.. खौफ में है स्थानीय जनता

रायगढ़, 01 सितम्बर। रायगढ़ जिले में कोयला की अवैध खनन का मामला आज का नहीं है। वर्षों से चले आ रहे ब्लैक डायमंड की चोरी इसमें बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। जिनके शह पर कोयला तस्करों द्वारा धरती का सीना फोड़ ब्लैक डायमंड की चोरी की जाती है। जिले में कोयले के अवैध खनन एक बार फिर से सुर्खियों में है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोयले की तस्करी यहां धड़ल्ले से की जा रही है। बेखौफ कोयला माफिया को किसी की परवाह नहीं है। लोगों का मानना है कि यदि प्रशासनिक और राजनीतिक के संरक्षण में कोयला तस्करी नहीं हो रही है तो पुलिस और जिला प्रशासन की चुप्पी क्यों है।


“धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोयलार व दुलियामुड़ा, लैलूँगा अंतर्गत मुड़ियाकछार, घरघोड़ा अंतर्गत कोनपारा, लैलूँगा चिमटापानी में कोयला का खुलेआम अवैध खनन हो रहा है। रायगढ़ जिला में लॉकडाउन के बावजूद कोयले का अवैध खनन बेरोकटोक जारी है। कोयला माफियाओं पर शासन व प्रशासन का कोई डर नहीं है क्योंकि यहां JCB पोखलैण्ड जैसे कीमती मशीनों से निडरता के साथ कोयला खोदने का काम किया जा रहा है। यह पूरा काम लाठी और हथियारबंद गुर्गो के दम पर होता है जो खनन के दौरान वहां पहरा देते हैं।”

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कोयला तस्करों ने लॉकडाउन को बनाया अवसर
एक तरफ कोरोना के कारण रायगढ़ जिले में बेरोजगारी चरम पर है गरीब दुखी जहां रोजगार के लिए मर रहे हैं तो वहीं शॉर्टकट में ज्यादा धन कमाने की लालसा लिए जिले के कुछ कोयला चोरों के लिए यह लॉकडाउन किसी अवसर से कम नहीं है। जिला प्रशासन के सख्त निर्देशो और अवैध कोयला उत्खनन के विरुद्ध सख्त कार्यवाहियों के बावजूद कोल तस्करों की योजना के तहत घरघोड़ा, धरमजयगढ़ व तमनार क्षेत्र के वनांचलों कोल माफियाओं द्वारा स्थानीय पैठ रखने वाले ग्रामीणों के गुट को अपनी तरफ कर कोयले का अवैध उत्खनन लगातार कर रहे हैं।

चोरों को प्रशासन व पुलिस का नहीं है भय
कोल माफियाओं पर स्थानीय पुलिस खनिज और वन विभाग सहित प्रशासन की कार्रवाई का भी असर या खौफ दिखाई नहीं देता है। लोगों ने यहां तक कहना शुरू कर दिया कि बिना किसी स्थानीय नेताओं और सरकारी अधिकारियों के सेटिंग के कोयला की चोरी असंभव है। जरूर दाल में कुछ काला है।

भूपेश बघेल सरकार हो रही बदनाम तो जिला प्रशासन की हो रही किरकिरी
प्रदेश की कांग्रेस सरकार की  ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मॉडल विदेशों में बोल रहा है। इसकी तारीफ चहुँओर है लेकिन इन कोयला चोरों के कारण प्रदेश की भूपेश सरकार पर सत्ता के जनप्रतिनिधि और नेताओं की सरफरसती और संलिप्तता के कारण अब लोगों ने उंगली उठानी शुरू कर दी है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इन कोयला चोरों को ना तो प्रशासन का भय है ना पुलिस का भय है और ना सरकार के बदनाम होने का भय है इनको सिर्फ अपनी जेब को भरना है और इसमें भले ही किसी को भी नुकसान हो सकती हो या कुछ भी हो इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। जिला प्रशासन ने जिले में लॉकडाउन के पालन के पुख्ता इंतजाम किए हैं लेकिन इन कोल तस्करों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। जिले के कोयलांचल वाले इलाकों में ये तस्कर अपना अलग अवैध खदान का संचालन करते नजर आ रहे हैं। वही इनके कोयले का अवैध उत्खनन निर्बाध जारी है।


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कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों व स्थानीय नेताओं पर उठ रही है उंगलियां
अब ग्रामीणों के द्वारा जिला तथा स्थानीय जन प्रतिनिधियों पर भी उंगली उठाई जा रही है। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इतना बढ़िया काम कर रहे हैं प्रदेश में लेकिन इन कोयला तस्करों पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं और ना ही इस क्षेत्र के विधायक व जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्यवाही की जा रही है। वो तो छोड़िए पुलिस एवं जिला प्रशासन क्या कर रहे यह समझ में नहीं आता है। कोयला चोरों के खिलाफ अब तक बड़ी कार्यवाही न होने पर पूरा सरकारी सिस्टम सन्देह के दायरे में खड़ा नजर आ रहा है।

क्या कहते हैं स्थानीय लोग   

जब हमारी स्थानीय लोगों से बात हुई तो उनका कहना है कुछ घरघोड़ा व धरमजयगढ़ के स्थानीय लोग हैं जिनकी सह पर कोयला तस्करी का काम प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। लॉकडाउन के दौरान कोयले की खुदाई के लिए पोखलैंड जेसीबी तक लगाए गए हैं। रात को होता है बड़े-बड़े मशीनों से कोयले की खुदाई, पुलिस जब सोती है तो ये चोर अपना काम करते हैं।

जिले में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखकर कलेक्टर भीम सिंह ने धरमजयगढ़ नगर पंचायत को भी लॉकडाउन के श्रेणी में रखा था किंतु यहाँ समय के नजाकत को भांपते हुए तस्कर इन लॉकडाउन में भी सारे नियम कानून को दरकिनार करते हुए कोयले का अवैध उत्खनन में लगे रहे और राजस्वविभाग को लाखों का चूना लगाते हुए दिन-रात कोयले का अवैध उत्खनन कर रहे है। वहीं यहां के कुछ शॉर्टकट में अधिक धन कमाने की लालसा रखने वाले बेईमान स्थानीय लोगों की मदद से जेसीबी, पोखलेन मशीन लगाकर लगभग आधा दर्जन हाईवा को लोड किए जाते हैं। इस खेल के लिए रात के 12:00 बजे से लेकर 3:00 बजे तक  जोरों पर तस्करों के द्वारा किया जाता है। इस समय पुलिस प्रशासन रात को अपने अपने घरों में सोते रहती है और इसी वक्त थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में ये गाड़ियां धरमजयगढ़ के ग्राम दोलियामुड़ा, कोयलार मेन पाइंट से मुख्य मार्ग होते हुए पत्थलगाव या रायगढ़ के लिए थाने से 100 मीटर के दूर से कट जाते हैं।

CM की माफियाओं को न बख्शने की बात निकली खोखली :

“किसी भी खनिज माफिया को बख्शा नहीं जाएगा ये बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था लेकिन इस पर जिला प्रशासन कुंभकरण निद्रा में सोई हुई है और उनके नाक के नीचे से कोयला तस्कर फल फूल रहे हैं।”

सूबे के मुखिया ने प्रदेश के लिए इन माफियाओं को लेकर फरमान जारी किया है कि किसी तरह के तस्करी प्रदेश सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी किन्तु सरकार के इस फरमान को ठेंगा दिखाते कोयला माफिया बेरोकटोक अपने काले कारनामे को अंजाम दे रहे हैं।

स्थानीय धुर विरोधी कोयला तस्करों के बीच हुआ समझौता
जब हमने इस विषय पर धर्मजयगढ़ घरघोड़ा क्षेत्र के लोगों से जानकारी रहनी चाहिए तो हमें यह मालूम हुआ की वर्षों से कोल तस्करी में वनवास जैसी स्थिति बिताने के बाद अब सेटिंग होते ही दो धुर विरोधी कोयला माफियाओं के बीच समझौता हो गया है और पैसा कमाने को तवज्जो देते हुए दोनों मिलकर कोयला का अवैध खनन कर रहे हैं। 2 धुर विरोधी कोल माफियाओं के बीच समझौतावादी नीति के तहत कोयले के काले खेल में पत्थलगांव के एक बिचौलिए की भूमिका अहम मानी जा रही है।

खनिज विभाग की कार्यशैली सन्देह के घेरे में
जिला में बैठे खनिज विभाग के अधिकारियों को इस विषय पर जानकारी देने के बावजूद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे कोयला माफियाओं का हौसला बुलंद हो गया है। जिला मुख्यालय में इन सबके लिए एक अलग शाखा का निर्माण किया गया है। जिनका यही काम है किंतु इन्हें मुख्यालय के कुर्सी से इतना लगाव है कि ये यहाँ से टस से मस नही होते और इसी कारण भी माफियाओं का हौसला बुलंद होता जा रहा है।  खनिज विभाग में पदस्थ अधिकारी कर्मचारी क्षेत्र के दौरे पर आना मुनासिब नहीं समझते और मुख्यालय में कुर्सी पर बैठे – बैठे क्षेत्र में हो रहे कोयला, रेत, मुरुम, मिट्टी के अवैध उत्खनन पर महज कागज पर दिखावे की कार्यवाही कर देते हैं।