जानलेवा हो सकती है आपको AC ट्रेन में मिलने वाली चादर..?

रायगढ़/ जी हां रेल में वातानुकूलित कोच में मिलने वाली चादर जिसे आप ओढ कर सोते हैं ! कहीं जानलेवा साबित न हो जाए? पर रेल्वे प्रबंधन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।


यह चौंकाने वाला वाक्या है रायगढ़ का, जहां कोरोना की इस विकट घड़ी में जब पुरा विश्व संक्रमण से बचाव के सारे उपाय करने में लगें हैं वहीं एक बहुत ही लापरवाही भरी बात सामने आई है। जिसे जानकर आप यह कहने से नहीं चुकेंगे की लोग थोड़े से लालच में बहुतों की जान खतरे में डालने नहीं झिझकते।

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युं तो रेलवे को लेकर कई खबरें पढी होंगी लेकिन यह खबर आपको सावधान कर देगी, रेलवे की चादरें केलो नदी में धोई जाती हैं, धोई भी जाती हैं या सिर्फ भिगोकर सुखा दी जाती है। यह भी किसने देखा है पर उसके बाद जहां सुखाया जाता है। वह देखकर आप दंग रह जाएंगे।
जी हां केलो नदी के सटे मैरिन ड्राइव पर लगे रेलिंग तथा सड़क पर बने डिवाइडर जो कि महज छह से आठ इंच ही ऊंचा है। जिसमें किस किस प्रकार का संक्रमण होगा अंदाज नहीं लगाया जा सकता कि वहां से कोई करोना का संक्रमित व्यक्ति गुजरा हो और उसने वहां थुका भी हो, या फिर उसे ओढ़ने वाला व्यक्ति अगर संक्रमित हो तो केलो में तो कहीं वायरस तो नहीं घुल रहा। इस स्थान जहां इसे सुखाया जा रहा है वहीं पर निगम द्वारा बनाया गया एस .एल.आर.एम.सेंटर है। जहां कई वार्डों का सभी प्रकार का गिला व सुखा कचरा छांटा जाता है। इसके साथ ही कोई सड़क पर घुमने वालें कुत्ते या अन्य पशुओं के द्वारा इसमें मल मुत्र करने की बात नकारी नहीं जा सकती। यह सारी बातें रेलवे तथा उसके सफाई ठेकेदार पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।

आखिरकार इसे जाचने वाला कोई अधिकारी होता भी है या नहीं?

इस प्रकार से अगर चादरों की धुलाई की जाती है तो क्या यही नियम है या फिर बिलासपुर से ही इस मामले का लेना-देना है अगर ऐसा है तो यहां के अधिकारियों को इससे कहीं लाभ तो ठेकेदार के द्वारा टेबल के नीचे से पहुंचाकर आंख बंद कराया जाना संभव प्रतीत होता है।हम इस बात की पुष्टि नहीं करते हैं।यह संभावना मात्र है इस तरह का कृत्य की संभावनाओं को जन्म देता है।

अगर विभाग अनजान है तो अब तत्काल हो कार्यवाही
ठेकेदार के द्वारा किए जा रहे इस तरह की लापरवाही से अगर रेलवे अनजान है तो उसे खबर के प्रकाशन उपरांत कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।


क्युंकि मामला गंभीर है तथा संक्रमण के इस भयावह काल में यह घिनौना कृत्य किसी अपराध से कम नहीं है। जिससे लोगों को संक्रमण का खतरा बढ़े इस ओर विभाग को गंभीर होनें की आवश्यकता है। लेकिन इस विषय में जब रेलवे के केयरटेकर पालेश्वर साहु से बात की गई तो वह साफ तौर पर अपना पल्ला झाड़ते नजर आए।