रायगढ़/ न टेंडर हुआ ना ऑडिट ! युवाओं का भविष्य सवारने को बनी तेजस एकेडमी के बहाने कहीं, खनिज मद की बंदरबांट तो नहीं..?

रायगढ़/ जिला प्रशासन के द्वारा जिला खनिज मद से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए निशुल्क कोचिंग संस्थान तेजस अकैडमी प्रारंभ किया गया था।  जिसके अंतर्गत वर्तमान में संघ लोक सेवा आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे, बैंकिंग जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परीक्षार्थियों को निशुल्क कोचिंग कक्षाएं संचालित की जानी थी। इसके अतिरिक्त छात्रों को विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं जैसे नीट (NEET), जेई(JEE) (मेंस एवं एडवांस) पी ई टी (PET) पीपीएचटी (PPHT)नर्सिंग पीएटी(PAT) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग कक्षाएं प्रारंभ की गई थी।

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तेजस एकेडमी के लिए किसी प्रकार का कोई टेंडर नहीं किया गया था। जबकि छत्तीसगढ़ के बाकी जिलों से इसकी तुलना की जाए तो कई जिलों में पारदर्शिता के लिए टेंडर प्रक्रिया को अपनाया गया है। इस विषय पर भी कई बार सवाल खड़े हुए। जिला शिक्षा अधिकारी, तत्कालीन नोडल अधिकारी भागवत जायसवाल तथा सह समन्वयक मनोज कुमार पटेल के द्वारा समस्त व्यवस्थाएं देखीं व संभाली जा रही थी।

टेंडर के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी का आरटीआई के तहत दिया गया जवाब इसमें बताया गया है कि तेजस अकादमी का टेंडर नहीं किया गया है।

इसे सर्वप्रथम लॉ कॉलेज के बगल में स्थित ग्रन्थालय में संचालित किया जा रहा था। जहां किसी भी नियमित छात्रों के बिना कक्षायें लगाई जा रही थी। जिसमें जो भी छात्र-छात्राएं कोचिंग करनें आते उन्हें रजिस्टर में हस्ताक्षर करा कर कोचिंग दी जाती थी और टेस्ट भी लिए जाते थे। किंतु यह स्पष्ट नहीं है कि कितने छात्रों ने कितने टेस्ट दिए व कितनी क्लासेस चली। इसका कोई ठोस प्रमाण यह दस्तावेज समन्वयक के पास नहीं है।

स्टेशनरी व शिक्षकों के वेतन में हुई मोटी रकम खर्च

तेजस अकैडमी में स्टेशनरी के नाम पर तथा नियमित शिक्षकों व दैनिक शिक्षकों के वेतन पर सारी रकम खर्च तो की गई। जैसे टेस्ट पेपर की छपाई तथा प्रत्येक पीरियड के हिसाब से ₹500 का मानदेय देना आदि शामिल है। किंतु यह बिल्कुल भी स्पष्ट नहीं है कि कितने टेस्ट हुए और कितने घंटे क्लासेस चली.. मतलब खर्च तो हुआ पर हिसाब स्पष्ट बिल्कुल नहीं है।

शासकीय स्कूल के शिक्षको के द्वारा भी यहां दैनिक शिक्षक के रूप में कार्य किया गया है। यह भी एक जांच का विषय है, क्योंकि इस पर शिक्षा विभाग किसी प्रकार की नियमावली का कार्यालय में ना होना बता रहा है।

शिक्षकों के संबंध में आरटीआई के तहत जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का जवाब

अभी तक नहीं हुआ कोई भी ऑडिट

इसके साथ ही एक और चौंकाने वाली बात आई  जब इसमें इतना वित्तीय लेनदेन हुआ है तो नियम अनुसार ऑडिट भी होना चाहिए था और हिसाब किताब भी रखना था। मगर तेजस अकैडमी में लाखों रुपए खर्च होने के पश्चात भी ऑडिट क्यों नहीं कराया गया? यह प्रश्न कई सवाल खड़े करता है या फिर कहीं अनियमितता के पकड़े जाने का खतरा..? यह समझ से परे है।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से आरटीआई के तहत ऑडिट के संबंध में पूछा गया सवाल जिसमें स्पष्ट है कि ऑडिट नहीं कराया गया है।

जिस तरह के दस्तावेज और जवाब जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय से मिले हैं। उससे स्पष्ट है कि इस पूरे मामले की अगर सुक्ष्मता से जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की भरपूर संभावना है। अगर इस मामले में प्रशासन गंभीर होता है तो इसमें हुए गड़बड़ झाली को सामने आने से कोई नहीं रोक सकता। इस मामले में अभी कई खुलासे होने बाकी है।