रायगढ़/ 2 महीने तक मजदूरों से मजदूरी करा ली और अब ‘साहब’ भूल गए पेमेंट करना ! अब तो उनका फोन भी रिसीव नहीं करते ! किसी को खेती के लिए बीज खरीदना है तो, किसी को बच्चे की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल.. लगाए दफ्तरों के चक्कर, दिया आवेदन भी..पर पेमेंट के बदले मिला आश्वासन..?

रायगढ़। जिले के तमनार ब्लॉक में आए दिन वन विभाग अपने कारनामों से सुर्खियां बटोरता रहता है। कभी लकड़ी के एवज में पैसे तो कभी बीजा लकडी तस्करी! हालांकि पहले इस मामले में रफा दफा करने की पूरी कोशिश की गयी। मगर मामला हाईलाइट हो गया और मजबूरन बिट गार्ड को निलंबित कर दिया गया। इस बार एक और अनोखा मामला तमनार के वन विभाग से निकल कर आ रहा है। जहां ग्राम पंचायत बनाई और ग्राम पंचायत औराईमुडा में वन विभाग में 2 महीने तक काम किए हुए मजदूरों का आज दिनांक तक मजदूरी भुगतान नहीं हुआ है।

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औराईमुडा के मजदूरों के बताए अनुसार, गांव के तकरीबन 12 मजदूरों ने बीते जनवरी माह से करीबन 60 दिनों की मजदूरी जंगल में की है। 287 रू प्रत्येक दिन के मजदूरी दर के एवज में ही वनरक्षक निदान केरकेट्टा द्वारा काम पर बुलाया गया था। बीते कई दिनों से कभी ग्रामीण खुद तो कभी जनप्रतिनिधियों के माध्यम से वनरक्षक निदान केरकेट्टा से फोन से संपर्क साध रहे है; लेकिन केरकेट्टा जी तो अब साहब जो बने बैठे हैं। वे न तो ईनका फोन रिसीव करते हैं और न ही एइनके गांव जाते है ।

ग्रामीणों ने तमनार रेंजर बी आर खेस्स से भी तमनार आफिस जाकर अपने मजदूरी भुगतान के लिए बात कही। लेकिन वहां आश्वासन के अलावा आज तक कुछ नही मिला। ग्रामीण दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। ग्रामीणो को एक ओर से कोरोना की मार तो दुसरी ओर से मजदूरी न मिलने की परेशानी। 60 दिन की मजदुरी 12 मजदूरों की 287 रु के एवज में निकाला जाए तो करीबन 2,06,640 रु होता है। साथ ही साथ और भी दूसरे ग्रामीणो से गढ्ढे खोदवाने के लिए मजदूरी ली गई है। उनका भी भुगतान नहीं किया गया है।

ऐसा ही मामला औराईमुडा के पडोसी पंचायत बनाई का भी है। जहां 25 से 30 मजदुरों से मजदूरी काम लिया गया है। जिन्हें प्रत्येक दिन की मजदूरी 280 रु के ऐवज में काम लिया गया है। जहां मजदूरों ने करीबन 150 दिन काम किए हैं। जिन्हें आज तक उचित भुगतान नहीं हुआ है ।

मजदूरी के भुगतान के लिए दिया गया आवेदन

बनाई के भी ग्रामीणो ने तमनार रेंज आफिस में अपने मजदूरी दर के लिए आवेदन प्रतिलिपी डी एफ ओ को दे चुके हैं लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।बरहाल देखने वाले बात होगी की बेबस और लाचार ग्रामीणो का गुहार शासन प्रशासन कब सुनती है।

वर्सन

घुराउ कुम्हार, ग्रामीण औराईमुडा

1.खेती किसानी का दिन है खेतों में दवाई का छिडकाव करना है पैसा मिला नहीं है समस्या हो रही है। -घुराउ कुम्हार, ग्रामीण औराईमुडा

हिरण राठिया, ग्रामीण औराईमुडा

2. कोरोना काल में बच्चों की आनलाइन कक्षाएं संचालित हो रही है । मोबाइल खरीदना है लेकिन पैसा की समस्या है, अपने मजदूरी का भुगतान के लिए भटकना पढ रहा है।हिरण राठिया, ग्रामीण औराईमुडा

देव सिंह राठिया क्षेत्रीय बी डी सी प्रतिनिधि

3. मेरे द्वारा भी वनरक्षक निदान केरकेट्टा को फोन से संपर्क करने की कोशिश ग्रामीणो की समस्या को लेकर की गई लेकिन साहब न तो फोन उठाते है और न ही गांव आते है। –देव सिंह राठिया क्षेत्रीय बी डी सी प्रतिनिधि

भगत राम राठिया, वन समिति अध्यक्ष

4.मेरे गांव के 25 से 30 ग्रामीणों ने वन विभाग में काम किया है, भुगतान अभी तक विभाग द्वारा नहीं किया गया है ईसके लिए आवेदन रेंजर साहब को भी दे चुके हैं। हमारा कोई सुनने वाला नहीं है।- भगत राम राठिया, वन समिति अध्यक्ष