कोरोना मैनेजमेंट में फिसड्डी साबित होता रायगढ़ स्वास्थ्य विभाग? 2 दिन तक मरीजों को लेने नहीं आते..! सीएचएमओ साहब फोन नहीं उठाते.. जूनियर उनकी बात नहीं सुनते.. मरीजों के खाने में कीड़े और बाल, आधी अधूरी जानकारी तो कभी पहले ही सोशल मीडिया में लिस्ट लीक..? और भी बहुत कुछ पढ़े पूरी खबर

रायगढ़, 03 सितम्बर। रायगढ़ जिले में कोरोना का बढ़ता हुआ संक्रमण जिलेवासियों के खतरनाक होता जा रहा है। संक्रमण के आंकड़े बढ़ने के साथ ही जिला प्रशासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं की पोल भी खुल रही है। कोविड हॉस्पिटल में लगातार अव्यवस्था की शिकायत सामने आ रही है तो संक्रमित मिलने के बाद समय पर अस्पताल में इलाज हेतू स्वास्थ्य विभाग मरीजों को हॉस्पिटल नहीं ले जा रहा है। पॉजिटिव संक्रमितों के परिजनों की जांच, कांटेक्ट हिस्ट्री खंगालने जैसी प्रक्रियाएं सिर्फ नाम की दिखाई दे रही हैं और तो और प्रतिदिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा पॉजिटिव मरीजों की जानकारी दी जाती है तो उनमें से कई लोगों का पता भी नहीं रहता है।

रायगढ़ स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ी समस्या सीएमएचओ से नहीं मिलता रिस्पॉन्स

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कोरोना काल में अभी डॉक्टर भगवान का रूप हैं लेकिन जब यही भगवान ध्यान न दें तो लोगों के मन में क्या बीतता है उसकी कल्पना कर पाना भी असंभव है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एस एन केसरी का जब मन करता है तब वह फोन उठाएंगे और जब मन नहीं करता है तब वे फोन नहीं उठाते हैं। सीएमएचओ को लोग क्यों फोन करेंगे या तो कोई सूचना देनी होगी या तो कोई सूचना लेनी होगी या मेडिकल संबधित कोई मदद की बात करनी होगी लेकिन डॉक्टर केसरी को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता आदमी मरता है मर जाये। फोन उठाने की जहमत तक इन्हें महसूस नहीं होती है। चलो मान लिया जाए कि साहब बहुत व्यस्त होते हैं लेकिन कम से कम एक मिस्ड कॉल देखने के बाद वापस काल तो करना चाहिए वो भी नहीं करते साहब।

तमनार बीएमओ डॉ. डी एस पैंकरा भी फोन पर रिस्पांस नहीं देते

सीएमएचओ रायगढ़ की तर्ज पर तमनार बीएमओ भी फोन उठाना जरूरी नहीं समझते हैं। तमनार क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों तथा कोरोना पीड़ित परिजनों द्वारा उन्हें फोन किया जाता है तो वे फोन नहीं उठाते हैं। एक जिम्मेदार पद पर आसीन सरकारी अधिकारीयों द्वारा जब इस तरह का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार किया जाए तो लोगों में सरकार व जिला प्रशासन के प्रति उदासीनता और विरोधाभास होना लाजिमी है। सरकार ने उन्हें मोबाइल नंबर जारी किया हुआ है ताकि वे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधा मुहैया करा सके और उनकी समस्याओं को दूर कर सकें। अगर सीएमएचओ और बीएमओ इतना ही व्यस्त हैं तो इनको कोई दूसरा ऑप्शन देना चाहिए ताकि इस तरह से लोगों को परेशान ना होना पड़े।

सीएमएचओ की स्वास्थ्य विभाग में नहीं है कोई पकड़, ना है दबदबा

मुख्य चिकित्सा अधिकारी का उनके विभाग नहीं कोई पकड़ नजर नहीं आता क्योंकि विगत दिवस हमने देखा है कोविड हॉस्पिटल के खानों में कीड़े, बाल व हॉस्पिटल में गंदगी की वीडियो अभी भी मौजूद है। जिसे देखकर इस बात की शिकायत जिला कलेक्टर तक की जा चुकी है। कोरोना मरीजों ने वीडियो के माध्यम से पूरे जिले को रायगढ़ कोविड-19 हॉस्पिटल की अव्यवस्था को दिखाया है। उच्चअधिकारियों द्वारा अपने जूनियर्स को निर्देशित किया जाता है की व्यवस्था को बनाए रखें लेकिन जूनियर के कानों में जूं तक नहीं रेंगता।

सीएमएचओ VS मेडिकल कॉलेज

हमारे विश्वस्त सूत्रों से हमें जानकारी मिली है कि सीएमएचओ और मेडिकल कॉलेज की टीम के बीच तालमेल नहीं बैठ रही है। जिसकी वजह से कोविड-19 हॉस्पिटल में इस तरह की अव्यवस्था निर्मित हो रही है। डीन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों एवं उनकी टीम को अपने हिसाब से ऑपरेट करते हैं और अपने ही तरीकों से कोरोना मरीजों का इलाज के व्यवस्था में लगे हुए हैं। सीएमएचओ द्वारा उन्हें जो भी आदेश दिया जाता है। उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग में पैठ रखने वाले लोग यहां तक कह रहे हैं कि सीएमएचओ का जिले में किसी भी स्वास्थ्य अधिकारी के ऊपर कोई दबाव नहीं और उनके जूनियर अधिकारी उन्हें लाइटली लेते हैं। उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते इस वजह से भी अव्यवस्था हो रही है।

लगातार मिल रहे शिकायतों से कांग्रेस सरकार व जिला प्रशासन की हो रही किरकिरी

RIG24 ने विगत कुछ दिनों से कोविड हॉस्पिटल की पूरी अव्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है। हॉस्पिटल में भर्ती कोरोना मरीजों ने बताया है की यहां समय पर खाने पीने की चीजें नहीं मिलती। गरम पानी नहीं मिलता कोरोना के हिसाब से जो खाने पीने की व्यवस्था है। उसे फुलफिल नहीं किया जाता। अस्पताल परिसर में साफ – सफाई बद से बदत्तर है। हालांकि कलेक्टर ने इस विषय में संज्ञान लिया है लेकिन अभी भी कोरोना मरीजों के द्वारा हमें फोन पर सरकारी अव्यवस्थाओं की सूचना दी जाती है।

कोरोना के आंकड़ों में क्या छुपा है राज जो सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाते

सीएमएचओ द्वारा प्रतिदिन जिले में मिल रहे कोरोना संक्रमितों के आंकड़ों की जानकारी जाती है। पत्रकारों का एक ग्रुप है जिसमें सूची अपडेट कर दी जाती है और उसी के अनुसार पूरे जिले में मीडिया के माध्यम से लोगों को कोरोना अपडेट मिलता है लेकिन जब रात 11:00 बजे के आसपास प्रदेश द्वारा मेडिकल बुलेटिन जारी होती है तो उसके आंकड़े चौंकाने वाले होते हैं। अब कल का ही आंकड़ा उदाहरणार्थ ले लीजिए रायगढ़ जिले में सीएमएचओ ने 107 पॉजिटिव मरीजों की पुष्टि की थी लेकिन छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी मेडिकल बुलेटिन में 156 लोगों की पुष्टि की गई यानी की 49 पॉजिटिव की जानकारी जिले में किसी को नहीं मिली। यह कहां से हैं, कौन है, क्या इनको हॉस्पिटल इलाज के लाया जा चुका है? इन सब विषय की जानकारी शून्य है और ये एक दो बार की बात नहीं है! हमेशा रायगढ़ जिले द्वारा दी गई जानकारी और प्रदेश द्वारा दी गई जानकारी में अंतर देखा जा रहा है।

बिना आधिकारिक पुष्टि के सोशल मीडिया में कई लोग पहले से दे रहे हैं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एक्सेल शीट की स्क्रीनशॉट ! फिर वही स्क्रीनशॉट सीएमएचओ द्वारा ग्रुप में डालते हुए की जाती है आधिकारिक पुष्टि ??

जिला कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा है की बिना अधिकारिक पुष्टि के कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफार्म पर कोरोना संबंधित कोई भी जानकारी शेयर नहीं करेगा लेकिन शहर में कई व्हाट्सएप ग्रुप में शहर के कई लोग ऐसे हैं जो स्वास्थ्य विभाग के मुखिया डॉक्टर केसरी से पहले कोरोना आंकड़ो की एक्सेल शीट का स्क्रीनशॉट कलेक्ट प्राप्त कर ले रहे हैं। फिर वही लोग व्हाट्सएप व फेसबुक ग्रुप में शेयर करना शुरू कर देते हैं।

CMHO साहब आपके विभाग से ही एक्सलशीट का स्क्रीनशॉट मिलता है। जिस का पासवर्ड आपको पता होगा या आपके अधीनस्थ कर्मचारियों को पता होगा और वही स्क्रीनशॉट आप बाद में शेयर करते हैं। अब आप सोचिए कि आप की मर्जी के बिना इस डिपार्टमेंट में कोरोना वायरस की जानकारी कैसे बाहर आ जाती है ? कौन है वह व्यक्ति जो ऐसी हरकत कर रहा है ? जो एक्सल शीट से डाटा निकालकर अपने लोगों को मार्केट में शेयर कर रहा है और उसी स्क्रीनशॉट को आपके द्वारा बाद में मीडिया वालों को दिया जाता है। साहब कोरोना काल में मीडिया की भूमिका को हर कोई सराह रहा है लेकिन रायगढ़ स्वास्थ्य विभाग में जिस प्रकार से कुव्यवस्था का प्रभाव देखा जा रहा है उस पर कुछ ना कहना मतलब अपनी आत्मा को मारने के समान है।

जिले में कितने कोरोना मरीजों को हॉस्पिटल में भर्ती नहीं किया गया है इसका डाटा किसी के पास नहीं दिया जाता है।  स्वास्थ्य विभाग ही जाने जिले में कितने कोरोना मरीज घरों में कैद हैं या घूम रहे हैं। CMHO को यह भी बताना चाहिए कि आज दिनांक तक कितने लोगों को अस्पताल में भर्ती किया जाना बाकी है क्योंकि हमें सूचना मिल रही है कि दो से तीन दिनों तक कोरोना मरीजों को हॉस्पिटल में इलाज के नहीं ले जाया जा रहा है।

प्रतिदिन यह आंकड़ा जारी होगा पूरे जिले वासियों को भी पता चले कि कितने मरीज अभी अस्पताल जाने बाकी हैं।

परिजन अस्पताल ले जाने के लिए फोन करते हैं तो उनका फोन ही नहीं उठता आखिर कोरोना मरीज करें तो क्या करें।

साहब जाते जाते कम से कम यह कहना चाहते हैं कि केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान करने के लिए ही लोग आपको फोन नहीं करते हैं। रायगढ़ जिले के स्वास्थ्य विभाग के मुखिया हैं। आप और आप इस तरीके से गैर जिम्मेदाराना हरकत करेंगे तो स्वास्थ्य विभाग के प्रति जिला प्रशासन के प्रति सरकार के प्रति लोगों के मन में जो उदासीनता व विश्वसनीयता उत्पन्न हो रही है। साथ ही साथ सबसे बड़ी बात मीडिया जगत जो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। आप उनको भी अनदेखा नहीं कर सकते हैं क्योंकि मीडिया ही ऐसा माध्यम है जो केवल खबरों का आदान – प्रदान नहीं करता, बल्कि स्वास्थ्य संबंधित जरूरतमंदों को तत्काल इलाज की सुविधा उपलब्ध हो सके। इसके लिए भी लोग आपको फोन करते हैं और आप हैं की फोन नहीं उठाते कैसे भगवान हैं आप ?

देख लीजिएगा भगवान, अब फोन की घंटी बजी तो फोन उठा लीजिएगा क्योंकि क्या पता कोई मजबूर आपको फोन करता हो… क्योंकि इस वक्त आप भगवान हैं और लोग आपसे उम्मीद कर रहें हैं।

इस कोरोनाकाल में यूं मजाक न बनाइये मजबूर पीड़ित परिजनों का….