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RIG Expose: शिक्षा विभाग में प्रश्न पत्र छपाई मामले में तकरीबन 60 लाख रुपए का घोटाला…! जिले के नामी गिरामी लोगो के साथ पूर्व शिक्षा अधिकारी का नाम शामिल…!! पढ़े पूरी खबर…!!

बच्चों से 35 रुपये परीक्षा शुल्क के नाम वसूला भी गया और प्रश्न पत्र और कापी के नाम से किया गया लगभग 60 लाख रुपये का घोटाला…
जिला शिक्षा अधिकारी मनिंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि सूचना का अधिकार लगाओ तब दूंगा जानकारी।

RIG24 रायगढ़। आरएसएस की संघी मानसिकता से परिपूर्ण रहे पिछले जिला शिक्षा अधिकारी आर. पी. आदित्य अपनी कार्यप्रणाली को लेकर बहुतेरे रूप से जाने जाते थे। जिनमें प्रमुख कांग्रेसी प्रवृति के स्कूलों पर मनमानी कार्यवाही, भाजपा सरकार के प्रशासनिक आतंकवाद के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले शिक्षको के ऊपर निलम्बन अथवा स्थानांतरण की कार्यवाही,CSR, शिक्षकों की नियुक्ति में आरएसएस विचारधारा के लोगों की नियुक्ति और विभाग में खरीदी के नाम से करोड़ो के भ्रष्टाचार की जांच के समाचार अगले लाइनों में…

भाजपा सरकार में स्कूली शिक्षा जिले में बड़ी दुर्दांत सी हो गई थी, संघी मानसिकताओं ने प्रत्येक जिले में गांधी जी और नेहरू जी देशभक्तों जैसे विचारधारा को सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गोड़सेवादी बनाये जाने के लिए सभी शैक्षणिक षडयंत्र किये गए। जिसके तहत रायगढ़ जिले के जिला शिक्षा कार्यलय में तत्कालीन समय आर.पी. आदित्य को जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में भेजा गया। श्री आदित्य रायगढ़ जिले में आते ही अपने कार्यलय में अपने बाद के प्रमुख पदों पर आरएसएस विचारधाराओं के शिक्षको की ताबड़तोड़ नियुक्तियां करवाई। जिसके पश्चात गांधी और नेहरू के विचारधाराओं पर चलने वाले स्कूलों पर मनमानी रूप से कार्यवाहियों की गई पर सत्ता बदली और कांग्रेस की सरकार ने आदित्य का स्थानांतरण रायगढ़ जिले से अन्यत्र कर दिया पर आदित्य ने न्यायालय की शरण ली और परीक्षा पूर्ण करवाने तक माननीय न्यायालय से स्थगन प्राप्त किया इस दरमियान की कहानी भी बड़ी रोचक है सूत्रों के अनुसार जिला शिक्षा कार्यालय के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में परीक्षा पूर्ण कारवाने के नाम से परीक्षा प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका के छपाई के तहत लाखों का घोटाला को अंजाम दिया।

शासकीय स्कूलों में प्रति छात्र 35रुपये परीक्षा शुल्क वसूला जाता है और इसके पश्चात इन स्कूलों से जिला शिक्षा कार्यालय के नाम से बैंक के डिमांड ड्राफ्ट बनवाये गए और इसके प्रकाशन के लिए प्रकाशक को लगभग 60 लाख ₹ के प्रश्न-पत्र और उत्तर पुस्तिका छापने के आदेश दे दिया गया। जो कि किसी कोठियार मे धूल खा रहे है। सूत्रों के अनुसार इनका लोकसभा चुनाव के दरमियाँ लगभग 45लाख₹ का भुगतान श्री राम पेपर नामक फर्म को आदित्य ने कर दिया। प्रकाशक फर्म श्री राम पेपर शेष राशि के लिए निरंतर इस कार्यालय के चक्कर लगा रहा है और बड़े-बड़े नेता भी उसके समर्थन क्यो कर है समझ से परे है।

जांच का विषय यह भी है कि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी आदित्य के कार्यकाल में छपे इन प्रश्न पत्रों और उत्तर पुस्तिका का स्कूलवार वितरण हुआ कि नही जब ये सामग्री शिक्षा कार्यालय के अंतर्गत स्कूलों में वितरण ही नही हुई तो इसका लगभग 45 लाख का भुगतान आदित्य ने लोकसभा चुनाव के आचार संहिता के मध्य कैसे कर दिया और इसमें जिला शिक्षा कार्यालय के परीक्षा प्रभारी की भूमिका भी संदिग्ध है जो जांच के योग्य है।

कांग्रेस को चाहिये कि संघी मानसिकता के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी आदित्य के कार्यकाल को जांच की मांग करनी चाहिये और इस प्रश्न पत्र के साथ उत्तर पुस्तिका के सप्लाई नही होने पर हुये भुगतान के साथ बचे भुगतान को भी रुकवाने चाहिए। जिससे कि स्कूली छात्र-छात्रों से परीक्षा शुल्क के नाम से वसूले गए 35 रुपये का वास्तविक उपयोग कांग्रेस सरकार में हो, नही तो बीजेपी और कांग्रेस सरकार में फर्क नही दिखेगा।

इस भ्रष्टाचार से सम्बंधित जानकारी के लिए जब वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी मनिंद्र श्रीवास्तव से संपर्क किया गया तो उनका जवाब में कहा कि सूचना का अधिकार लगाओ तब जानकारी दूंगा।

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