कलम पर भारी राजनीतिक रसूख…! वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला पर थाने के सामने हमले में आरोपियों के विरुद्ध मामूली धाराओं में अपराध दर्ज…. साथी पत्रकार प्रवीण यादव पर भी मामला दर्ज कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास..! आरोपियों के हाईटेक कांग्रेस कनेक्शन की बात दारू पार्टी मे, ऑडियो वायरल! पढ़ें पूरी खबर एक्सक्लूसिव वीडियो और ऑडियो के साथ..

कांकेर। 26 सितंबर शनिवार को दोपहर 1:45 पर कांकेर थाने के सामने जो हुआ उसकी गूंज अब पूरे छत्तीसगढ़ में सुनाई दे रही है। वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला को सरेआम राजनीतिक रसूख और सत्ता का दम भरने वाले नेता के रूप में कुछ गुंडे अपने गुर्गों के साथ सरेआम मां बहन की गाली देते दिखाई दिए। उनसे हाथापाई किया। वहां जो कुछ भी हुआ। वह कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। बिल्कुल एक साउथ की फिल्मों का नजारा था। जहां एक गुंडा सरेआम एक बुजुर्ग पत्रकार को थाने के सामने ही पीटता है और मारता है और इसके साथ ही अपनी गुंडागर्दी का दंभ भी भरता है। ऐसा सब कुछ साउथ की फिल्मों से निकलकर अब छत्तीसगढ़ में हो रहा है। कल दोपहर 1:45 बजे जो हुआ नीचे आप वीडियो में देख सकते हैं।

नोट: वीडियो में अभद्र भाषा और गाली गलौज का इस्तेमाल किया गया है। पाठक अपने विवेक अनुसार इसे देखें।

वहां जो कुछ हुआ वह छत्तीसगढ़ जैसे प्रदेश के लिए किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं है। जब एक वरिष्ठ पत्रकार और उनके साथ खड़े कई पत्रकारों को घसीट घसीट कर गंदी गालियां देकर पीटा जाता है। कसूर सिर्फ इतना ही कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सबूतों के साथ खबर चलाई। इस पूरे मामले में पुलिस सिर्फ मुख दर्शक बनकर बैठी रही। थाने में बंदूक भी घुमाई गई। पुलिस खामोश रही और उन्होंने दोनों पक्षों के साथ काउंटर रिपोर्ट फाइल करवा दी। वो भी मामूली मारपीट की धाराओं के साथ।

अब आप समझ सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में जब पत्रकारों के साथ ऐसा होता है। वह पत्रकार जिसने जनता के लिए ऐसे तत्व के खिलाफ आवाज उठाई, उसे सरेआम पीटा जाता है, यह राजनीतिक रसूख के साथ पले बड़े गुंडों द्वारा एक आम जनता के लिए सबक है कि वह खामोश रहें और सब कुछ चुप चाप सहते रहे! वरना एक दिन उनके भी सरेराह इस तरह पिटाई की जाएगी। अगर फिर भी ना माने तो जो बंदूक हवा में लहराए गई थी, वह चल भी सकती है और कह दिया जाएगा कि आत्मरक्षा में हमने गोली चला दी।

आखिर क्या हुआ था उस दिन

इस पूरे मामले में वरिष्ठ पत्रकार और पीड़ित कमल शुक्ला ने बताया कि दोपहर एक बजकर पैतालिस मिनट पर पता चला कि कांकेर के पत्रकार सतीश यादव को नगर पालिका के पुर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सिह ठाकुर कोलिहा के साथ कुछ पार्षद लोग मारते पीटते हुये पुलिस थाना कांकेर मे लेकर आये है। इस बात की सुचना मिलते ही मै और कांकेर के अन्य पत्रकार साथी कांकेर थाना पहुचे तो वहां काग्रेस के विधायक शिशुपाल शोरी के प्रतिनिधि गफफार मेमन , पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जितेन्द्र सिह ठाकुर , पार्षद मकबूल खान , पार्षद शादाब खान, प्रदीप भटट , सोमेश सोनी एल्डर मेन काग्रेस नेताम गणेश तिवारी , पूर्व पार्षद मनोज जैन यासीन कराणी आदि हंगामा कर रहे थे और पुलिस चुचचाप देख रही थी। वे लोग खुलेआम मां बहन की गाली बक रहे थे और कांकेर के सभी पत्रकारो की मां बहन के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे।

उन्होने जैसे ही मुझे देखा तो सबसे पहले गणेश तिवारी काग्रेस कुछ नेता ने थाने के कम्पाउड मे ही मारने की कोशिश की और मां बहन की गाली दी। तब कुछ पत्रकार साथियो ने मुझे घेरकर बचा लिया। इस समय गफफार मेमन ने अपना पिस्तौल निकालकर मुझे दिखाया और कहा कि तुमने मेरे रेत के कारोबार को खुब नुकसान पहुचाया है। अब मै तेरे को नही छोडूगा। मेरे पास लायसेसी रिवाल्वर है, तू बाहर निकल तेरे को ठोक दुंगा।

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जितेन्द्र सिह ठाकुर थाने के कम्पाउड मे ही सभी पुलिस जवानो व थानेदार एम डी देशमुख के सामने ही अपने साथ आये असामाजिक तत्व की भीड को भडका रहा था, कि कांकेर के पत्रकारो से कमल शुक्ला ही पालिका व अन्य खबरे को लिखवा रहा है। तब मै जान बचाकर थाने के भीतर थानेदार के कक्ष मे छुप गया। जहां पहले से ही डरा हुआ और इनसे मार खाया हुआ पत्रकार सतीश यादव बैठा हुआ था। उसके सामने मैने थानेदार महोदय से निवेदन किया कि मेरी जांन बचा ले पर उन्होने मुझे कहा किे रिपोर्ट बस लिखाकर तुरत थाना छोड दो।

इस बीच 20-25 पत्रकार साथियो ने घेराबनाकर मुझे बाहर निकालने की कोशिश की पर पुलिस के जवानो पुरी तरह हम सभी पत्रकारो को इन तीन सौ से ज्यादा गुंडो के हवाले कर दिया। थाने के बाहर से ही मेरी पिटाई करते हुये जितेन्द्र सिह ठाकुर, गफफार मेमन, गणेश तिवारी, शादाब खान आदि बहुत लोगो ने मेरे साथ पिटाई शुरू कर दी। इन्होने मुझे बचाने की कोशिश कर रहे कई और पत्रकारो के उपर हाथ उठाया।

ऊपर दिए गए वीडियो और घटनाक्रम को देखकर आप समझ सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में सत्ता का रुआब कितना सिर चढ़कर बोल रहा है। फिलहाल कई पत्रकार संघ ने इसकी कड़ी निंदा की है और पत्रकार सुरक्षा कानून को लागू करने की मांग कर रहे हैं इसके साथ ही दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की भी मांग पूरे छत्तीसगढ़ से उठी है। पत्रकार तो अपने अपने माध्यम से इस मामले को उठाए रहे मगर आम जनता भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटना की निंदा करते हुए पूरे शासन प्रशासन को आड़े हाथों ले रही है।

इस पूरे मामले में हमला करने वालों का साहस उनकी राजनीतिक रसूख को बयान करने वाला एक ऑडियो/वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। जिसमें डंके की चोट पर कहा जा रहा है कि हम पर कुछ नहीं हुआ हमारी तो जमानत भी हो गई और कमल शुक्ला पर अब एससी एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी और उसे जिला बदर किया जाएगा। साथ ही ऑडियो क्लिप में उन्होंने इनके हाईटेक कांग्रेसी कनेक्शन की बात भी स्वीकारी है।

इतना कुछ देखने सुनने के बाद क्या कार्रवाई की जाए एक आम आदमी भी समझता है। कांकेर का बच्चा-बच्चा जानता है कि कौन क्या है मगर डर के आगे सब खामोश है और कल जो हुआ। उसके बाद अभी कुछ नहीं हुआ, तो छत्तीसगढ़ में माफिया युग की शुरुआत समझ लीजिए की हो चुकी है।

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