रायगढ़ / ग्रामीण महिलाओं के लिए वरदान साबित होती जेएसपीएल फाउंडेशन की शुभांगी परियोजना..! स्वास्थ्य क्षेत्र में एक राजनीतिक आंदोलन – शालू जिंदल..!

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रायगढ़। भारतवर्ष गांवों का देश है। यहां की अधिकतम आबादी गांव में ही बसती है। गांव जो कि विभिन्न समुदायों से सुसज्जित समाज, संस्कृति एवं परंपराओं की एक पुंज होती है। समाज इन्हीं संस्कृति और परंपराओं का अनुसरण कर सदियों से गतिमान है। प्राय: परंपराओं से आबद्घ पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को जहां विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ा है, वहीं विभिन्न बीमारियों से भी जूझना पड़ा है।

वर्तमान परिपेक्ष्य में महिलाओं में प्रजनन स्वास्थ्य सबसे संवेदनशील समस्या के रूप में देखी गई व प्रमुख है। जिसके कारण करोड़ों महिलाएं सम्मानजनक व स्वच्छंद जीवन नहीं गुजार पाती एवं विभिन्न प्रजनन संक्रमणों के साथ जीवन जीने को विवश होती है। जेएसपीएल फाउंडेशन, जेपीएल तमनार द्वारा महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शुभांगी परियोजना का शुभारंभ वर्ष 2014 में किया गया जिससे कि किशोरी बालिकाओं और महिलाओं के मासिक स्वास्थ्य व स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके व उन्हें अपने ही गांव में कम लागत में उच्च गुणवत्ता पूर्ण सेनेटरी नेपकिन उपलब्ध हो सके।

इस क्रम में परियोजना अन्तर्गत के स्व सहायता समूह के माध्यम से सेनेटरी नेपकिन निर्माण इकाई ग्राम बासनपाली में स्थापित की गई। पहले यह इकाई ग्राम पंचायत के पुराने भवन में संचालित थी, जिसकी सफलता को देखते हुए ग्राम पंचायत ने महिला समूह को निशुल्क भूमि उपलब्ध कराई, जिस पर जेएसपीएल फाउंडेशन, जेपीएल तमनार के सहयोग से महिलाओं द्वारा भवन निर्माण किया गया। जिसमें आज सेनेटरी नेपकिन निर्माण इकाई संचालित है। गावों में प्रजनन स्वास्थ्य शिविरों व स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिससे किशोरी बालिकाओं एवं महिलाओं में प्रजनन संक्रमणों को दूर कर उन्हें मासिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा सके। लक्ष्मी स्व सहायता समूह बासनपाली द्वारा सेनेटरी नैपकिन उत्पादन व पैकिंग का कार्य किया जाता है। वहीं क्षेत्र के गावों में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक वितरण प्रणाली विकसित की गई है। जहां से सेनेटरी नैपकिन तैयार व पैक होकर डिपो (वात्सल्य केन्द्रों) में जाता है। जहां से प्रत्येक स्वास्थ्य संगिनी सेनेटरी नेपकिन पैकेट लेकर अपने गांव में वितरित करती है। परियोजना अन्तर्गत 15 मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित किए गए हैं, जो कि गांवों व स्कूलों में मासिक स्वास्थ्य व स्वच्छता संबंधी कक्षाएं लेती है तथा उनकी व्यक्तिगत परेशानियों को सुनकर उन्हें दूर करती हैं।

आज शुभांगी परियोजना ग्रामीण महिलाओं के उच्च मासिक स्वास्थ्य की सुनिश्चितता हेतु गेम चेंजर साबित हुई है। उक्त परियोजना के पीछे जेएसपीएल फाउंडेशन का उद्देश्य न केवल महिलाओं को सेनेटरी नेपकिन का उपयोग पर जोर देना बल्कि इसकी उपयोगिता व सामाजिक विक्रय चैनल स्थापित करना लक्ष्य रहा है, जिससे कि महिलाएं न केवल मासिक धर्म के दिनों बल्कि सम्पूर्ण वर्ष 365 दिन तक अपने को स्वतंत्र व सशक्त महसूस कर सकें। मुझे गर्व व खुशी है कि शुभांगी परियोजना अाज क्षेत्र के घर घर में एक जाना पहचाना ब्रांड होने के साथ साथ एक महिला सामाजिक आंदोलन के रूप में स्वीकार किया जाने लगा है।

शालू जिंदल चेयरपर्सन जेएसपीएल फाउंडेशन