बिहार की राजनीति में पिछले तीन दशकों से चला आ रहा ‘लालू-नीतीश युग’ अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। लंबे समय तक राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति छोड़कर केंद्र का रुख कर लिया है। उनके राज्यसभा जाने के ऐलान के साथ ही यह लगभग तय हो गया है कि बिहार में अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है।
हाइलाइट्स:
- बिहार की राजनीति से नीतीश कुमार की विदाई, ‘X’ पर किया राज्यसभा जाने का ऐलान
- लालू-नीतीश युग के अंत के साथ ही बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाएगी भारतीय जनता पार्टी
- 2025 के विधानसभा चुनाव में 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी बीजेपी
- दशकों से गठबंधन में ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभा रही भाजपा का अधूरा सपना अब होगा पूरा
‘सुशासन बाबू’ की राज्य से विदाई, अब राष्ट्रीय राजनीति पर नजर
दशकों तक बिहार की राजनीति की धुरी रहे नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा ऐलान किया है।
नीतीश ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की जनता के विश्वास से राज्य विकास के मुकाम तक पहुंचा है, और अब वे राज्यसभा में जाकर देश के लिए व्यापक स्तर पर काम करना चाहते हैं। राज्यसभा के लिए उनका नामांकन दाखिल करना महज एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता संरचना (Power Structure) के पूरी तरह से बदलने का सबसे बड़ा संकेत है।
हिंदी पट्टी के आखिरी गढ़ में अब खिलेगा ‘कमल’
भारतीय जनता पार्टी देश के लगभग हर बड़े हिंदी भाषी राज्य में अपने दम पर सत्ता में रही है, लेकिन बिहार हमेशा से एक ऐसा चक्रव्यूह रहा जहां पार्टी अपना मुख्यमंत्री नहीं बिठा पाई।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से भाजपा का यह सबसे बड़ा और अधूरा लक्ष्य अब पूरा होने की कगार पर है। अगर भाजपा का कोई नेता अब बिहार का मुखिया बनता है, तो यह पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा और राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।
2020 से लिखी जा रही थी पटकथा, 2025 में मिली असली ताकत
बिहार में सत्ता संतुलन बदलने की नींव 2020 के विधानसभा चुनाव में ही पड़ गई थी, जब भाजपा ने 74 और जेडीयू ने सिर्फ 43 सीटें जीती थीं। तब ‘गठबंधन धर्म’ निभाते हुए भाजपा ने नीतीश को ही गद्दी सौंपी।
इसके बाद 2025 के विधानसभा चुनावों में भाजपा 89 सीटों के साथ राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि जेडीयू 85 सीटों पर रही। हालांकि नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री जरूर बने, लेकिन नई सरकार के मंत्रिमंडल में भाजपा का भारी दबदबा साफ नजर आ रहा था। अब जमीन पर कार्यकर्ताओं की मेहनत और बदलती परिस्थितियों ने भाजपा को उस मुकाम पर ला खड़ा किया है, जहां से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सिर्फ उनके नेता की दावेदारी बचती है।


