नई दिल्ली/रायगढ़। मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहे तनाव और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण भारत के कच्चे तेल के आयात पर भारी दबाव आ गया है। इस संकट को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को राहत देते हुए 30 दिनों तक रूसी तेल खरीदने की विशेष छूट दी है। इस छूट के बाद भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना शुरू तो कर दिया है, लेकिन अब पेमेंट को लेकर एक नया संकट खड़ा हो गया है। ऑयलप्राइसडॉटकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, देश का सबसे बड़ा बैंक ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ (SBI) रूसी तेल कंपनियों को पेमेंट करने से बच रहा है।
खबर के मुख्य बिंदु:
- मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका ने भारत को दी रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की छूट
- छूट के बावजूद पेमेंट में फंसा पेंच, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जोखिम लेने से कर रहा इनकार
- अमेरिकी बाजार में SBI का 26% निवेश, प्रतिबंधों के डर से रूसी कंपनियों को पेमेंट करने से बच रहा बैंक
- अमेरिका के OFAC ने 4 अप्रैल 2026 तक के लिए जारी किया है विशेष जनरल लाइसेंस
- Kpler के डेटा के अनुसार समुद्र में 130 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों पर है मौजूद
SBI क्यों नहीं लेना चाहता जोखिम?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, SBI अपनी वैश्विक प्रतिष्ठा और अमेरिकी बाजार में अपने बड़े हितों को लेकर कोई भी खतरा मोल नहीं लेना चाहता है। इसके पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं: अल्पकालिक छूट: अमेरिका की ओर से दी गई यह छूट (OFAC लाइसेंस) फिलहाल केवल एक महीने के लिए है। बैंक इस बात को लेकर अनिश्चित है कि 30 दिन बाद यह छूट आगे बढ़ेगी या नहीं। अमेरिकी बाजार में भारी निवेश: SBI के इंटरनेशनल लोन पोर्टफोलियो का 26% हिस्सा अकेले अमेरिका में है। ऐसे में बैंक अपने इस विशाल कारोबार को अमेरिकी प्रतिबंधों या किसी कानूनी पचड़े में नहीं फंसाना चाहता।
4 अप्रैल 2026 तक मिली है अमेरिकी छूट
ज्ञात हो कि यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने Rosneft और Lukoil जैसी रूसी ऊर्जा कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। पूर्व में ट्रेड डील के दौरान ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया था, जिसके बाद भारत ने आयात काफी कम कर दिया था।
लेकिन अब लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण भारत की आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी के ‘विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय’ (OFAC) ने पिछले सप्ताह भारत को एक ‘जनरल लाइसेंस’ जारी किया है। इसके तहत भारतीय रिफाइनर 4 अप्रैल 2026 तक उन रूसी जहाजों से तेल खरीद सकते हैं जिन पर प्रतिबंध लगा हुआ है। हालांकि, यह छूट केवल उन्हीं जहाजों के लिए है जिन पर तेल की लोडिंग 5 मार्च 2026 या उससे पहले हो चुकी है।
समुद्र में तैर रहा 130 मिलियन बैरल तेल
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी करीब 60% जरूरतें मिडिल ईस्ट से पूरी करता है। डेटा फर्म Kpler के अनुसार, 6 मार्च तक करीब 130 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल समुद्र में टैंकरों पर मौजूद था। इसमें से लगभग 27 मिलियन बैरल अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में, 20 मिलियन बैरल लाल सागर और स्वेज नहर मार्ग के पास, और करीब 7.5 मिलियन बैरल सिंगापुर के आसपास मौजूद है।


