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रायगढ़ में हाथी के शावक का सफल रेस्क्यू, मां से मिलाने में लगे तीन घंटे

रायगढ़ में एक हाथी के शावक को गड्ढे से निकालने का सफल रेस्क्यू किया गया है। मामला धर्ममजयगढ़ वन मंडल के बाकरूमा रेंज के जमाबीरा बीट का है। वन विभाग और हाथी मित्र दल ने रेस्क्यू अभियान के जरिए शावक को एक घंटे में बाहर निकाला और उसे उसकी मां से तीन घंटे बाद मिलवाया। रेस्क्यू के लिए एक रास्ता बनाया गया, जबकि शावक को गुड़ चना खिलाकर सुरक्षित छोड़ा गया। इस घटना का ड्रोन वीडियो भी सामने आया, जिसमें शावक को उसकी मां से मिलते हुए दिखाया गया। धरमजयगढ़ के डीएफओ अभिषेक जोगावत ने शावक के रेस्क्यू के लिए अपनी टीम के साथ मुस्तैद रहे।

मां से मिलाने में लगे तीन घंटे

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल के बाकरूमा रेंज के जमाबीरा बीट में वन विभाग और हाथी मित्र दल ने मिलकर एक हाथी के शावक को गड्ढे से सफलतापूर्वक बाहर निकाला। यह रेस्क्यू अभियान एक घंटे तक चला और तीन घंटे बाद शावक को उसकी मां से मिलवा दिया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता

वन विभाग और हाथी मित्र दल की टीम ने रेस्क्यू के लिए एक रास्ता बनाया, जिससे शावक को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। शावक को गुड़ और चना खिलाकर उसकी देखभाल की गई और फिर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।

ड्रोन वीडियो में कैद हुआ भावुक पल

इस घटना का ड्रोन वीडियो भी सामने आया है, जिसमें शावक को उसकी मां से मिलते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे देखकर लोग वन विभाग की इस पहल की सराहना कर रहे हैं।

वन विभाग की तत्परता से बची जान

धरमजयगढ़ के डीएफओ अभिषेक जोगावत ने अपनी टीम के साथ मुस्तैदी से इस रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व किया। उनकी तत्परता और टीम वर्क के कारण यह अभियान सफल रहा और शावक को सुरक्षित उसकी मां तक पहुंचाया जा सका। धरमजयगढ़ वन मंडल के डीएफओ अभिषेक जोगावत ने बताया कि वर्तमान दिनों में धरमजयगढ़ वन मंडल के जंगलों में 133 हाथियों का दल विचरण कर रहा हैं जिसमें हाथियों का 16 दल है और इस दल में कुल 26 हाथी शावक शामिल है। हाथी मित्र दल के अलावा वन विभाग की टीम हाथियों के हर मूवमेंट पर नजर बनाये हुए है।

वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और हाथी मित्र दल की मदद से यह रेस्क्यू सफल रहा। यह घटना वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक उदाहरण है और यह दर्शाता है कि उचित प्रयासों से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सकता है।

यह सफल रेस्क्यू अभियान वन विभाग की तत्परता और समर्पण का प्रतीक है, जिससे न केवल एक शावक की जान बची बल्कि यह संदेश भी गया कि वन्यजीवों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।

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