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जंगल कटाई की अनुमति पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, महाजेंको और प्रशासन के खिलाफ जताया विरोध

रायगढ़। महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी (महाजेंको) को जंगल काटने की अनुमति मिलने के बाद रायगढ़ जिले के दर्जनों गांवों में आक्रोश फैल गया है। शुक्रवार को गारे, खम्हरिया, मुड़ागांव, सराईटोला, पाता, ढोलनारा, बजरमुड़ा सहित कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीण सराईटोला में एकत्रित हुए और विशाल जनसभा आयोजित की। ग्रामीणों ने बिना ग्रामसभा की अनुमति के पेड़ों की कटाई करने पर कड़ी आपत्ति जताई और कंपनी एवं प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया।

सभा में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों जैसे डीडीसी रमेश बेहरा और बीडीसी कन्हाई राम पटेल ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली को एकतरफा करार दिया। वक्ताओं ने कहा कि जंगलों पर आदिवासी समुदाय की निर्भरता होती है और उनकी कटाई से न केवल जीवन यापन प्रभावित होगा, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।

ग्रामीण महिलाएँ जंगलों की रक्षा की मांग के लिए एकत्रित हुईं।

एनजीटी ने खारिज की थी पर्यावरणीय अनुमति

महाजेंको को तमनार के गारे-पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक का आवंटन मिला था, लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इसकी पर्यावरणीय अनुमति खारिज कर दी थी। इसके बावजूद, बिना जनसुनवाई या सर्वे के घरघोड़ा एसडीएम द्वारा कंपनी को पेड़ कटाई की अनुमति दी गई, जो अब विवाद का मुख्य कारण बन गई है।

मिला है सामुदायिक वन अधिकार

ग्राम मुड़ागांव को 29.642 हेक्टेयर क्षेत्र में सामुदायिक वन अधिकार पत्र प्रदान किया गया है, जिससे ग्रामसभा को जंगलों के संरक्षण, प्रबंधन और पुनर्जीवन का अधिकार मिला है। इसके बावजूद, उन्हीं जंगलों की कटाई की अनुमति प्रशासन द्वारा दी जाना ग्रामीणों की नाराजगी का कारण बना।

सभा के अंत में 10 गांवों के ग्रामीणों ने जंगल बचाने के लिए सामूहिक संघर्ष का संकल्प लिया।

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