रायगढ़। खुले जगह पर मांस मछली बेचने का नियम तो नहीं है मगर ये रायगढ़ है, यहां सब चलता है। फिलहाल कबीर चौक से काशीराम चौक जाने वाले मार्ग पर रोज शाम 4:00 बजे से सड़क पर ही मछली बाजार लगता है। मछलियों की ख्यति इतनी हो चुकी है कि लोग जिंदल और डिमरापुर से भी यहां की मछलियां लेने आते हैं।
ऐसा नहीं है कि क्षेत्र में इन सब चीजों के लिए अलग से व्यवस्थित मार्केट नहीं बना है। पुराना सारंगढ़ बस स्टैंड में इन सब की जरूरत को ध्यान में रखते हुए बाज़ार बनाया गया है। वहां काफी पसरे अभी भी खाली हैं मगर सड़क में बेचने का मजा ही कुछ और है।

वैसे यहाँ मछली बेचने और मछली खाने वालों को तो कोई खास दिक्कत नहीं है मगर वहां के रहने वालों को इससे काफी दिक्कत है। सबसे बड़ी दिक्कत जो यह है कि मछली काटने बेचने के बाद साफ सफाई का कोई ध्यान नहीं रखा जाता। मांस और बाकी अवशेष नहीं छोड़ कर चले जाते हैं। बगल में दो स्कूल है। एक सरकारी है और एक प्राइवेट है। बरसात का मौसम शुरू हो गया है। बदबू से जीना दुर्भर हो जाता है और जाम लगता है वह अलग।

थोड़े से काम में होगा बहुत बड़ा नाम
फिलहाल तो प्रशासन और निगम प्रशासन दोनों ही प्रगति नगर के डैमेज कंट्रोल में लगे हुए हैं। अगर थोड़ी फुर्सत मिल जाए तो उनको वहां भी एक नजर डाल देनी चाहिए और उन्हें भी खुले आसमान से शेड वाला पसरा में विस्थापित कर देना चाहिए जो कि पहले से पुराने बस स्टैंड बनी हुई है। फिर बढिया सी हैडलाइन वाली प्रेस रिलीज़ भी जारी करनी चाहिए। ‘खुले में बेच रहे थे सामान, सर पर मिली छत.. चेहरे पर आई मुस्कान!’
बेचने वाले भी खुश, मोहल्ले वाले भी खुश, और नाम का नाम भी.. एक पंत तीन काज।



